साइकोसिस और पारम्परिक चिकित्सा पद्वति      Publish Date : 22/04/2026

साइकोसिस और पारम्परिक चिकित्सा पद्वति

                                                                                       डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

क्या आपके या आपके किसी परिचित व्यक्ति के साथ ऐसा हुआ है कि आप खुद को अपनी एक अलग दुनिया में महसूस करते हैं या फिर दिमाग में वहम की स्थिति बनी रहती है? तो चिकित्सीय भाषा में इस स्थिति को साइकोसिस कहते हैं।

अक्सर फिल्मों में दिखाया जाता है कि कोई व्यक्ति ऐसी चीजें भी देख पा रहा है जो कि वास्तव में वहां मौजूद ही नहीं हैं, या उसे लगता है कि जैसे कोई उसके खिलाफ कोई साजिश रच रहा है। यह कोई पागलपन की शुरुआत नहीं है, बल्कि असल जिंदगी में इसे साइकोसिस कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति का वास्तविकता से संपर्क टूट जाता है।

साइकोसिस, एक ऐसी मानसिक अवस्था, जहां व्यक्ति वास्तविकता और अपने मन की बनाई दुनिया के बीच अंतर को ही खोने लगता है। आज हम अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर से समझते हैं कि शक की एक मामूली लहर कैसे एक काल्पनिक दुनिया में बदल सकती है।

शक और पैरानोया से होती है साइकोसिस की शुरुआत

                                

साइकोसिस की शुरुआत अक्सर छोटे-छोटे बदलावों से होती है। व्यक्ति को अचानक लगने लगता है कि लोग उसके बारे में बातें कर रहे हैं। कोई उसका पीछा कर रहा है या उसे नुकसान पहुंचाना चाहता है। टीवी या अखबार के मैसेज खास तौर पर उसके लिए हैं। इस स्थिति को पैरानोया (Paranoia) कहते हैं। इस स्थिति में प्रभावित व्यक्ति का दिमाग विभिन्न घटनाओं के बीच ऐसे कनेक्शन जोड़ने लगता है जिनका वास्तव में कोई आधार ही नहीं होता है।

हैलुसिनेशन होना- यानी जब आपका दिमाग खेल खेलने लगे

विशेषज्ञ बताते हैं कि जैसे-जैसे यह स्थिति गंभीर होती है, व्यक्ति की इंद्रियां उसे धोखा देने लगती हैं। इस स्थिति को हैलुसिनेशन कहा जाता है, जिसमें शामिल हैं-

1. ऐसी आवाजें सुनाई देना जो दूसरे नहीं सुन सकते। ये आवाजें प्रभावित व्यक्ति को आदेश दे सकती हैं या उसका मजाक भी उड़ा सकती हैं।

2. ऐसी आकृतियां या लोग देखना जो कि वास्तव में वहां मौजूद ही नहीं होते हैं।

3. प्रभावित व्यक्ति को अपने शरीर पर कुछ रेंगने या किसी के छूने का अहसास होना।

डेल्यूशन में रहना

जब शक गहरा होकर एक पक्का विश्वास बन जाता है, तो उसे डेल्यूजन कहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को सच और झूठ का फर्क महसूस नहीं होता। उसे लग सकता है कि उसके पास कुछ जादुई शक्तियां हैं। वह मान सकता है कि वह कोई बहुत बड़ी हस्ती या भगवान का अवतार है। उसे यकीन हो जाता है कि उसकी याददाश्त या विचारों को कोई और कंट्रोल कर रहा है।

साइकोसिस होने के मुख्य कारणः

साइकोसिस किसी को भी हो सकता है। इसके पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं-

1. जेनेटिक्स- परिवार में मानसिक बीमारी का इतिहास होना।

2. अत्यधिक तनाव- जीवन में कोई बड़ा सदमा या लंबे समय से चल रहा स्ट्रेस।

3. नशीले पदार्थ- शराब, गांजा (Cannabis) या अन्य ड्रग्स का सेवन करना भी इस स्थिति के लिए एक बड़ा ट्रिगर हो सकता है।

4. नींद की कमी- कई दिनों तक न सोने से दिमाग का संतुलन बिगड़ सकता है।

5. दिमागी बीमारियां- स्किजोफ्रेनिया (Schizophrenia) या बाइपोलर डिसऑर्डर आदि।

सम्भव है इसका उपचार

अच्छी खबर यह है कि साइकोसिस एक उपचारात्मक बीमारी और इसका इलाज मुमकिन है और व्यक्ति एक सामान्य जीवन जी सकता है।

1. दवाइयां (Antipsychotics)- यह दवाएं दिमाग में रसायनों (जैसे डोपामाइन) के संतुलन को ठीक करने में मदद करती हैं।

2. थेरेपी (CBT)- कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी के के माध्यम से प्रभावित व्यक्ति को अपने विचारों को पहचानने और वास्तविकता को समझने की ट्रेनिंग दी जाती है।

3. फैमिली सपोर्ट- परिवार का साथ और सहानुभूति रिकवरी की गति को कई गुना बढ़ा देती है।

निष्कर्ष- साइकोसिस ‘पागलपन’ नहीं है, बल्कि दिमाग की एक ऐसी स्थिति है जिसे डॉक्टरी मदद और सही देखभाल से ठीक किया जा सकता है। अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति असामान्य व्यवहार कर रहा है या उसे डरावने भ्रम हो रहे हैं, तो उसे डांटने या अंधविश्वास में फंसने के बजाय किसी मनोचिकित्सक (Psychiatrist) के पास लेकर जाएं। यह बात विशेष रूप से ध्यान रखें कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही जरूरी है जितना कि आपका शारीरिक स्वास्थ्य।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।