
वर्तमान में फैटी लिवर की समस्या Publish Date : 21/04/2026
वर्तमान में फैटी लिवर की समस्या
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
आजकल बिना शराब पिए भी हो लोगों को हो रही है फैटी लिवर की समस्या, हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर बता रहे हैं कि इसके पीछे कौन-से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं-
फैटी लिवर की परेशानी आज के समय में काफी ज्यादा कॉमन हो चुकी है। इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं। तो चलिए ड़ॉक्टर सेंगर से इस विषय के बारे में विस्तार से बात करते हैं-
आज के समय में फैटी लिवर की समस्या सिर्फ शराब पीने वालों तक ही सीमित नहीं रहती। आज बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने कभी भी शराब को हाथ तक नहीं लगाया है। शराब न पीने के बावजूद फैटी लिवर होने की स्थिति को नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है। इसमें लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा होने लगती है, जो धीरे-धीरे लिवर में सूजन और नुकसान का कारण बनती है। प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 सेंगर का कहना है कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर की समस्या अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर हो सकते हैं। हमारे डॉक्टर से इस विषय के बारे में विस्तार से आपको जानकारी प्रदान कर रहे हैं-
क्यों बढ़ रही है फैटी लिवर की समस्या

डॉक्टर कहते हैं कि आजकल लोगों का लाइफस्टाइल काफी ज्यादा खराब हो गया है, जो इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण बनती है।
1. असंतुलित आहार, जंक फूड का अधिक सेवन, और शारीरिक गतिविधि की कमी लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज करती है।
2. मोटापा, खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी, इस जोखिम को और अधिक बढ़ा देती है।
3. इसके अलावा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां भी इस समस्या के साथ करीब से जुड़ी रहती हैं।
4. नींद की कमी और लगातार तनाव भी आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।
किन लोगों को रहता है अधिक खतरा
हमारे डॉक्टर का कहना है कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है या जिनकी जीवनशैली निष्क्रिय यानि स्थिर रहती है, उनमें यह समस्या अधिक संख्या में देखी जाती है। डायबिटीज से पीड़ित लोग, थायराइड की समस्या वाले व्यक्ति और पीसीओएस से जूझ रही महिलाएं भी इसके प्रति उच्च जोखिम में रहते हैं। इतना ही नहीं, बच्चों और टीनएज में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ती दिखती है, खासकर जब उनकी डाइट में प्रोसेस्ड फूड और शुगर की मात्रा अधिक होती है।
शरीर में दिखने वाले लक्षण
फैटी लिवर के शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते, यही कारण है कि यह अक्सर जांच के दौरान ही पता चलता है। लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है, कुछ संकेत सामने आते हैं, जैसे-
- वजन कम होना
- पीलिया के लक्षण दिखना जैसे- आंखों का पीला होना, नाखून पीले होना, इत्यादि।
- पेट में पानी भरना, इत्यादि।
हालांकि ये लक्षण सिर्फ कुछ ही फैटी लिवर के मरीजों में आते हैं, वो भी कई सालों बाद। ज्यादातर लोगों में फैटी लिवर कुछ नुक्सान नहीं करता है। थकान महसूस होना, असामान्य बदलाव इसके सामान्य लक्षण माने जाते हैं।
क्या नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर गंभीर हो सकता है?

डॉक्टर कहते हैं कि अगर समय पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो कुछ लोगों में यह समस्या नॉन-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस में बदल सकती है, जिसमें लिवर में सूजन और डैमेज शुरू हो जाता है। आगे चलकर यह फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियों का रूप ले सकती है। कुछ मामलों में लीवर कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है।
कैसे किया जा सकता है बचाव?
इस स्थिति को काफी हद तक जीवनशैली में सुधार करके नियंत्रित किया जा सकता है।
1. संतुलित आहार लेना, जिसमें हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हो, बेहद जरूरी माना जाता है। शुगर और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम किया जाता है।
2. नियमित व्यायाम, जैसे तेज चलना, योग या हल्की एक्सरसाइज, लीवर में जमा फैट को कम करने में मदद करता है। वजन को नियंत्रित रखना सबसे अहम कदम माना जाता है।
3. इसके साथ ही, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी जरूरी रहता है, ताकि समस्या को शुरुआती स्तर पर ही पहचाना जा सके।
फैटी लिवर अब केवल शराब से जुड़ी बीमारी नहीं रहती, बल्कि यह जीवनशैली से जुड़ी एक आम समस्या बन चुकी है। सही समय पर जागरूकता और छोटे-छोटे बदलाव इस बीमारी को बढ़ने से रोकने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
