सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट      Publish Date : 19/04/2026

 सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट

                                                                                                डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट करवाना सबसे अधिक प्रचलन में है। ऐसे मे सवाल यह है कि क्या सभी महिलाओं को यह टेस्ट करवाना चाहिये, साल में कितनी बार पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए, किसी भी महिला को पैप टेस्ट करवाने की जरुरत कब पड़ती है, क्या यह सच में असरदार है. आइये इन सभी सवालों के जवाब अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जानते हैं।

                           

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्वाइकल कैंसर ऐसी बीमारी है जो अंदर ही अंदर पनपने लगती है और अधिकतर महिलाओं को इसका पता भी नहीं चलता है। इसका पता चलने तक काफी देर हो चुकी होती है और तब तक कैंसर पूरी तरह फ़ैल चुका होता है। यही कारण है कि सर्वाइकल कैंसर से मरने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी खतरे को रोकने के लिए सही समय पैप स्मीयर जांच करवाना बहुत जरुरी है जिससे आप कैंसर को शुरूआती स्टेज में पहचान सकें और इलाज करा सकें।

पैप स्मीयर या पैप टेस्ट क्या है:

यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में कैंसर के शुरूआती लक्षणों की जांच करने का एक महत्वपूर्ण टेस्ट है। सर्विक्स, महिलाओं के प्रजनन तंत्र का एक हिस्सा है जहां गर्भाशय उनकी योनि से मिलता है। सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी संक्रमण की जांच के लिए भी पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सही समय पर पैप स्मीयर जांच करवाने से सर्वाइकल कैंसर का समय रहते ही पता लगाया जा सकता है। यह गर्भाशय में उन कोशिकाओं को पता लगाती हैं जो कैंसर ग्रस्त हैं या भविष्य में जिनके कैंसर ग्रस्त होने की संभावना है।

पैप स्मीयर जांच कैसे करते हैं:

                              

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सर्वाइकल कैंसर ऐसी बीमारी है जो अंदर ही अंदर पनपने लगती है और अधिकतर महिलाओं को इसका पता भी नहीं चलता है। इसका पता चलने तक काफी देर हो चुकी होती है और तब तक कैंसर पूरी तरह फ़ैल चुका होता है। यही कारण है कि सर्वाइकल कैंसर से मरने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। इसी खतरे को रोकने के लिए सही समय पैप स्मीयर जांच करवाना बहुत जरुरी है जिससे आप कैंसर को शुरूआती स्टेज में पहचान सकें और इलाज करा सकें।

पैप स्मीयर या पैप टेस्ट क्या है:

यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) में कैंसर के शुरूआती लक्षणों की जांच करने का एक महत्वपूर्ण टेस्ट है। सर्विक्स, महिलाओं के प्रजनन तंत्र का एक हिस्सा है जहां गर्भाशय उनकी योनि से मिलता है। सर्वाइकल कैंसर के अलावा एचपीवी संक्रमण की जांच के लिए भी पैप स्मीयर टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सही समय पर पैप स्मीयर जांच करवाने से सर्वाइकल कैंसर का समय रहते ही पता लगाया जा सकता है। यह गर्भाशय में उन कोशिकाओं को पता लगाती हैं जो कैंसर ग्रस्त हैं या भविष्य में जिनके कैंसर ग्रस्त होने की संभावना है।

पैप स्मीयर जांच कैसे करते हैं:

पैप टेस्ट करने के लिए डॉक्टर या तकनीशियन स्पेकुलम (Speculum) नामक यंत्र को योनि में डालते हैं। एक बार जब सर्विक्स नजर आने लगता है तो वहां से कुछ कोशिकाएं यंत्र की मदद से इकठ्ठा की जाती हैं और फिर माइक्रोस्कोप की मदद से इन कोशिकाओं में किसी भी तरह की असामान्यता की जांच की जाती है। अगर वे कोशिकाएं कैंसर ग्रस्त पायी जाती हैं तो उसके हिसाब से डॉक्टर आगे का इलाज करते हैं।

क्या पैप स्मीयर टेस्ट करवाने में दर्द होता है:

जिस समय डॉक्टर आपके सर्विक्स से कोशिकाएं निकालते हैं तो उस समय आपको थोडा असहज महसूस हो सकता है लेकिन इस टेस्ट को कराने में किसी तरह का दर्द नहीं होता है। इसे कराना बिल्कुल आसान है, आप नजदीकी किसी भी क्लिनिक में जाकर पैप स्मीयर जांच करवा सकती हैं।

कैंसर की पहचान करने में पैप स्मीयर टेस्ट कितनी मददगार है:

पैप टेस्ट की मदद से कैंसर कोशिकाओं या ऐसी कोशिकाएं जो आगे चलकर कैंसर उत्पन कर सकती हैं उनका पता लगाना डॉक्टर के लिए आसान हो जाता है। अगर जांच में कैंसर के शुरूआती लक्षण नजर आते हैं तो इस टेस्ट से कैंसर के इलाज में भी मदद मिल सकती है। 

महिलाओं को कब पैप टेस्ट करवाना चाहिए:

आमतौर पर हर एक महिला को 21 साल की उम्र के बाद पैप टेस्ट जरुर करवा लेना चाहिए। कई महिलाओं का ऐसा मानना है कि जो महिलाएं सेक्सुअली एक्टिव हैं सिर्फ उन्हें ही ये टेस्ट करवाना चाहिए। जबकि ऐसा नहीं है, इस टेस्ट के लिए महिलाओं का सेक्सुअली एक्टिव होना जरुरी नहीं है बल्कि 21 वर्ष से अधिक उम्र की प्रत्येक महिला को नियमित अंतराल पर पैप टेस्ट कराते रहना चाहिए।

क्या पैप स्मीयर टेस्ट के लिए किसी तरह की तैयारी करनी पड़ती है:

नहीं, आपको इस टेस्ट के लिए किसी भी तरह की विशेष तैयारी नहीं करनी है। आप सिर्फ डॉक्टर के दिशा निर्देशों का पालन करें। हालांकि पीरियड या ज्यादा ब्लीडिंग होने पर उस दिन टेस्ट ना करवाएं बल्कि उससे 4-5 दिन बाद किसी और दिन के लिए इसे शेड्यूल कर लें।

एक महिला को कितनी बार पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए:

पैप स्मीयर के रिजल्ट महिला की उम्र पर निर्भर करते हैं। आमतौर पर 21 से 65 साल के बीच की उम्र वाली महिलाओं को हर 3 साल में एक बार ये टेस्ट जरुर करवाने चाहिए।

किन महिलाओं को पैप टेस्ट नहीं कराना चाहिए:

65 साल से अधिक उम्र की वे महिलाएं जो नीचे बताए गए शर्तों को पूरा करती हों उन्हें पैप टेस्ट नहीं करवाना चाहिए।

  • जिन्होंने कभी धूम्रपान ना किया हो।
  • आखिरी बार पैप टेस्ट कराने से अब तक उनके सेक्स संबंध एक ही पार्टनर के साथ हो।
  • अब तक उन्होंने नियमित रुप से पैप टेस्ट करवाया हो।
  • पिछले 10 सालों में कोई भी पैप टेस्ट असामान्य न पाया गया हो।

पैप स्मीयर टेस्ट का खर्च कितना है:

अधिकांश महिलायें पैप स्मीयर टेस्ट की कीमत जानना चाहती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आमतौर पर पैप स्मीयर टेस्ट कॉस्ट 200 से 2000 रूपए तक के बीच हो सकती है लेकिन यह काफी हद तक आपके डॉक्टर, क्लिनिक और आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है। इसलिए अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर पैप टेस्ट की सही कीमत का पता लगाएं और जल्द से जल्द ये टेस्ट कराएं।

पैप स्मीयर टेस्ट गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का पता लगाने में बहुत सहायक है और सही समय पर कैंसर का पता चलने से कैंसर के खतरे को टाला जा सकता है। इसलिए इसमें लापरवाही ना करें बल्कि नियमित तौर पर अपनी जांच करवाते रहें और स्वस्थ रहें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।