स्ट्रोक के आने से पहले के शारीरिक चेतावनी और संकेत      Publish Date : 15/04/2026

स्ट्रोक के आने से पहले के शारीरिक चेतावनी और संकेत

                                                                                                        डॉ0 दिव्यंशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आपने अक्सर यह देखा होगा कि किसी भी व्यक्ति को स्ट्रोक अचानक ही आ जाता है और इसे आम बोलचाल की भाषा में कहें तो उसे अचानक ही लकवा मार जाता है। लेकिन ऐसा क्यों होता है? क्या इससे पहले शरीर में कोई संकेत दिखते हैं? तो आज इसके बारे में अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर से विस्तार से जानते हैं।

डॉ0 सेंगर कहते हैं कि भारत में स्ट्रोक के मामलों का बोझ निरंतर बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भारी दबाव पड़ रहा है। लंकिन क्या आप जानते हैं? स्ट्रोक किसी को भी, कहीं भी और कभी भी आ सकता है। इसके अलावा, वर्तमान समय में स्ट्रोक केवल बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रहा है। बल्कि आजकल, 25-40 साल की उम्र के लोग भी काफी संख्या में स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। हालांकि, स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों के बारे में अभी भी जागरूकता की बहुत कमी है। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से हमारे डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर से जानकारों के द्वारा बताए लकवा मारने या स्ट्रोक आने से पहले शरीर में दिखने वाले संकेतों के बारे में आपको जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं।

डॉक्टर सेंगर इसके बारे में थोड़ा विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी वाली स्थिति है जो उस समय होती है जब कि हमारे दिमाग के किसी हिस्से में खून का बहाव अचानक से रुक जाता है या कम हो जाता है। इससे दिमाग को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिससे हमारे दिमाग की कोशिकाएं कुछ ही मिनटों में मरने लगती हैं। पूरे भारत में विकलांगता और मौत के प्रमुख कारणों में से एक स्ट्रोक है। स्ट्रोक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं। इस्कीमिक स्ट्रोक तब होता है जब खून का थक्का दिमाग की किसी धमनी को ब्लॉक कर देता है। तो आइए हम इस विषय पर अब थोड़ा विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं।

लकवा या स्ट्रोक आने के कारणः

कुछ लोगों को दिमाग में खून की नस फटने के कारण हेमोरेजिक स्ट्रोक भी हो सकता है। स्ट्रोक के पीछे के जोखिम कारक उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल, व्यायाम की कमी और यहां तक कि तनाव भी हो सकता हैं। दिल की समस्याओं वाले लोगों को भी स्ट्रोक का जोखिम आम आदमी से कुछ अधिक होता है।

स्ट्रोक के दौरान व्यक्ति के शरीर में होने वाले परिवर्तनः

स्ट्रोक के कारण दिखने वाली जटिलताओं में लकवा, बोलने या समझने में कठिनाई, याददाश्त में कमी, देखने में दिक्कत और डिप्रेशन आदि शामिल हो सकते हैं। गंभीर मामलों में, यह जानलेवा भी हो सकता है और इसके चलते प्रभावित व्यक्ति की जान भी जा सकती है। इसलिए, इसकी जल्द पहचान और उचित उपचार एवं देखभाल बेहद जरूरी है। हालांकि, यह समझ लें कि एक बड़े स्ट्रोक से पहले शरीर अक्सर कुछ संकेत देता है।

बड़े स्ट्रोक आने से पहले शरीर में दिखाई देने वाले महत्वपूर्ण संकेतः

                                 

  • स्ट्रोक से पहले शरीर द्वारा दिए जाने वाले इन चेतावनी संकेतों को कभी भी नजरअंदाज करने का प्रयास न करें, अन्यथा जीवन हानि भी हो सकती है।
  • चेहरे, हाथ या पैर में, या शरीर के किसी भी एक हिस्से में अचानक सुन्नपन और कमजोरी महसूस हो सकती है।
  • मरीजों में बोलने में असमर्थता और शब्दों का लड़खड़ाना आदि स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
  • हालांकि, कुछ लोगों को भ्रम या भटकाव आदि भी महसूस हो सकता है।
  • एक या दोनों आंखों से देखने में दिक्कत हो सकती है, जैसे धुंधला या दोहरा दिखाई देना आदि।
  • मरीज को तेज सिरदर्द होना।
  • शरीर का संतुलन और तालमेल बिगड़ने लगना।
  • चक्कर आना, चलने में असमर्थता महसूस हो सकती है।

शरीर में दिखाई देने वाले इन लक्षणों पर दें ध्यान:

एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, नियमित जांच करवाकर और रक्तचाप व मधुमेह जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करके स्ट्रोक से बचा जा सकता है। इसलिए, इन लक्षणों पर ध्यान दें और तुरंत मदद जरूर लें। BeFast शब्द का इस्तेमाल करना आपके लिए मददगार हो सकता है-

                               

  • B का अर्थ है अचानक संतुलन बिगड़ना।
  • E का अर्थ है आंखों की रोशनी में बदलाव आना।
  • F का अर्थ है चेहरे का एक तरफ लटक जाना।
  • A का अर्थ है हाथ या पैर में कमजोरी का अनुभव करना।
  • S का अर्थ है बोलने में दिक्कत का समाना करना। और
  • T का अर्थ है तुरंत किसी स्ट्रोक-तैयार अस्पताल पहुंचना।

मुख्य बिन्दुः

  • स्ट्रोक तब आता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून का बहाव रुक जाता है या कम हो जाता है।
  • लकवा या स्ट्रोक के आने से पहले मरीजों में बोलने में असमर्थता, शब्दों का लड़खड़ाना और संतुलन और तालमेल बिगड़ने आदि शामिल होते है।
  • रक्तचाप व मधुमेह जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित करके स्ट्रोक से बचा जा सकता है।

अपीलः प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।