हार्ट बाईपास सर्जरी: एक जानकारी      Publish Date : 14/04/2026

         हार्ट बाईपास सर्जरी: एक जानकारी

                                                                                                    डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आजकल भी बहुत कम लोग ऐसे हैं जो कि दिल से जुड़ी बीमारियों और उनके इलाज के बारे में सही तरीके से जानते हैं। ऐसी ही एक स्थिति है हार्ट बाईपास सर्जरी है, जिसके बारे में हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं।

वर्तमान समय में बहुत से भारतीय हृदय रोग से जूझ रहे हैं। हृदय रोग से जुड़ी भ्रांतियों के कारण कई लोग समय पर इलाज नहीं करवा पाते। मरीज चुपचाप तकलीफ सहते रहते हैं और डॉक्टर की सलाह के बाद भी बाईपास सर्जरी से बचते हैं। हालांकि, दिल के मरीजों के लिए बाईपास सर्जरी करवाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह जान बचाने के लिए एक बेहद अहम प्रक्रिया हाती है।

भारत में हार्ट डिजीज मौत के सबसे बड़े कारणों में से एक है। यह न केवल बुजुर्गों को, बल्कि युवाओं को भी प्रभावित करता है। इसलिए, कई कारक जैसे कि सुस्त जीवनशैली, खाने की अस्वस्थ आदतें, तनाव, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और आनुवंशिक कारक हृदय रोग की संभावना को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में आज हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर आपको बता रहे हैं कि बाईपास सर्जरी आखिर होती क्या है?

                       

लोगों में दिखती है यह आम हार्ट डिजीज

डॉक्टर बताते हैं कि कुछ हार्ट से जुड़ी बीमारियां आजकल लोगों में बहुत ही आम हो चुकी है। जैसे कि सबसे आम हृदय रोग हैं कोरोनरी धमनी रोग (धमनियों में रुकावट), दिल का दौरा, हार्ट फेलियर और एरिथमिया जिसमें दिल की धड़कनें अनियमित हो जाती हैं। हम इन बीमारियों के शुरुआती लक्षण नहीं पहचान पाते हैं जो इस प्रकार हैं।

हार्ट डिजीज से पहले कौन से लक्षण दिखते हैं?

कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि हार्ट प्रॉब्लम के दौरान देखे जाने वाले लक्षणों में- सीने में दर्द या बेचैनी, सांस लेने में तकलीफ, थकान, हाथ, गर्दन, जबड़ा या पीठ में दर्द, पसीना आना, जी मिचलाना और चक्कर आना आदि शामिल हो सकते हैं। कई लोग सीने में दर्द और सांस फूलने जैसे शुरुआती चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, इलाज में देरी करते हैं, और दिल का दौरा और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर समस्याओं का शिकार हो जाते हैं।

हालांकि, लोग अक्सर बाईपास सर्जरी करवाने से डरते हैं। लेकिन बाईपास सर्जरी जैसे आधुनिक इलाजों के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, जो इलाज के नतीजों को बेहतर बनाने और मृत्यु दर को कम करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि आवश्यकता के अनुसार दिल के मरीजों को बाईपास सर्जरी करवानी चाहिए।

बाईपास सर्जरी क्या होती है?

बाईपास सर्जरी, जिसे कोरोनरी धमनी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) भी कहते है, एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है जो अवरुद्ध धमनियों को बाईपास करके हृदय में रक्त के प्रवाह को सुचारू करने में मदद करती है। गंभीर रुकावटों के मामले में कार्डियक सर्जन द्वारा इस सर्जरी की सलाह दी जाती है, और यह बार-बार होने वाले दिल के दौरों को रोक सकती है। चिकित्सा तकनीक में हुई प्रगति के साथ, बाईपास सर्जरी अब ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी हो गई है, जिससे लंबे समय तक फायदे मिलते हैं।

क्या बाईपास सर्जरी सुरक्षित है?

यह हृदय के स्वास्थ्य में सुधार करती है और मरीज आसानी से अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या फिर से शुरू कर सकता है। यह सर्जरी किसी के लिए भी जोखिम भरी नहीं है। इसलिए, इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए। इस सर्जरी के नतीजे काफी सफल होते हैं, क्योंकि उचित देखभाल, नियमित जांच और एक सक्रिय जीवन शैली अपनाकर मरीज 15-20 साल तक अधिक जी सकते हैं।

किन लोगों के लिए होती है बाईपास सर्जरी?

                         

लोगों को बाईपास सर्जरी के बारे में जानकारी देना जान बचाने में मददगार हो सकता है। यह उन लोगों के लिए सुझाया जाता है जिन्हें कोरोनरी आर्टरी की बीमारी है और जिन पर दवा या स्टेंटिंग का भी कोई असर नहीं होता। जिन लोगों को डायबिटीज है और जिन्हें बार-बार दिल से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उन्हें भी बाईपास सर्जरी करवाने की सलाह दी जा सकती है।

हार्ट हेल्थ पर ध्यान देना है बहुत जरूरी

आज दिल की सेहत को प्राथमिकता देना, एक स्वस्थ भविष्य के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए, अगर डॉक्टर आपको बाईपास सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। अपने दिल की सेहत की जिम्मेदारी खुद उठाएं और किसी विशेषज्ञ से अपॉइंटमेंट लें, जो बाईपास सर्जरी से जुड़े आपके सभी सवालों और शंकाओं का जवाब देगा। मरीजों और उनके परिवार वालों को अपने दिल को सुरक्षित रखने के लिए, सेहत से जुड़े सही और सोच-समझकर फैसले लेने चाहिए।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।