गर्म पानी में टी-बैग्स डालकर पीना: आंतों की गंभीर बीमारी को न्योता      Publish Date : 09/04/2026

गर्म पानी में टी-बैग्स डालकर पीना: आंतों की गंभीर बीमारी को न्योता

                                                                                                   डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

बदलते दौर के साथ गर्म पानी में टी बैग्स डालकर चाय पीने का शौक लोगों में दिनोंदिन बढ़ रहा है, लेकिन आप यह जानकार हैरान होंगे कि गर्म पानी में टी-बैग्स डालकर चाय के रूप में जो स्वाद आप ले रहे हैं वह आंतों की गंभीर बीमारी और हार्मोनल असंतुलन को जन्म दे रहा है। शहर के पेट एवं आंत रोग विशेषज्ञों के क्लीनिक पर ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ये आंतों की परत क्षतिग्रस्त एवं आंतों में सूजन संहित एंडोक्राइन सिस्टम में गड़बड़ी पैदा कर रहे हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए चिकित्सक टी-बैग्स की जगह खुली चाय की पत्ती के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं।

विभिन्न शोध पत्रों से यह बात सामने आई है कि ज्यादातर टी-बैग्स केवल कागज के नहीं होते, इनमें खाद्य-ग्रेड प्लास्टिक (जैसे नायलान या पीईटी) का मिश्रण होता है। जब इन बैग्स को खौलते गर्म पानी में डाला जाता है, तो इनसे अरबों की संख्या में माइक्रो-प्लास्टिक्स और नैनो-प्लास्टिक्स के कण रिलीज होते हैं। ये सूक्ष्म कण पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं। आंतों में सूजन पैदा कर देते हैं। हार्मोनल असंतुलन भी देखने को मिलता है। कुछ टी-बैग्स को पानी में फटने से बचाने के लिए उन पर एपिक्लोरैहाइड्रिन जैसे रसायनों की कोटिंग की जाती है। यह केमिकल पानी के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जाता है और शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को बिगाड़ देता है, जिससे पुरुषों और महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन की समस्या पैदा हो रही है। चिकित्सक ने कहा कि उनके क्लीनिक पर आंत संबंधी बीमारी के मरीज आते हैं तो उनसे उनकी हिस्ट्री पूछी जाती है। जिसमें टी-बैग्स की चाय पीने की बात सामनें आती है तो वह सलाह देते हैं कि इसका इस्तेमाल न करें।

शोध में सामने आ रहे दुष्प्रभाव

                                  

बार्सिलोना के स्वायत्त विश्वविद्यालय द्वारा किए गए और केमोस्फीयर नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में भी यह बात सामने आई है कि पालिमर आधारित टी बैग्स आपके कप में अरबों नैनो-प्लास्टिक्स और माइक्रो-प्लास्टिक्स के कण छोड़ सकते हैं, जो रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। ये के कण पूरे शरीर में फैल सकते हैं और आपकी आंतों की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित हो सकते हैं। इसके अलावा कई और शोध पत्रों में टी-बैग्स के गर्म पानी में डालकर पीने के दुष्प्रभाव सामने आए हैं।

खुली चाय पत्ती ही बेहतर

                               

पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर होटल, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कार्यालयों में टी-बैग्स का उपयोग बढ़ा है, जो खतरनाक है। भारतीय परंपरा में खुली पत्ती की चाय को पानी में डालकर उबालकर पीने की पंरपरा रही है, जो नुकसानदायक नहीं होती। खुली पत्ती का इस्तेमाल कहीं अधिक सुरक्षित और सेहतमंद है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।