हैडफोन का उपयोग करने से कमजोर हो रहे कान के पर्दे      Publish Date : 04/04/2026

हैडफोन का उपयोग करने से कमजोर हो रहे कान के पर्दे

                                                                                               डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

  • मेरठ में विश्व श्रवण दिवस पर आयोजित शिविर में 97 में से 38 मरीजों को सुनने में परेशनी की शिकायत।

आजकल फैशन के चलते युवाओं में फोन की लीड और हेडफोन आदि को कानों में लगाकर गाने सुनने की प्रवृत्ति के चलते बहरेपन की दर बढ़ रही है। इस दौरान लगातार तेज आवाज में गाने सुनने और हैडफोन का उपयोग करने के चलते कानों के पर्दे कमजोर होते जा रहे हैं। इस बार विश्व श्रवण दिवस के अवसर पर जिले में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर जिले की प्रत्येक चिकित्सा इकाई एवं जिला चिकित्सालय के द्वारा श्रवण क्षमता की देखभाल के प्रति जागरूकता का संचार किया गया। इस अवसर पर प्यारे लाल शर्मा जिला चिकित्सालय के प्रांगण में भी एक शिविर का आयोजन किया गया था। इस चिकित्सा शिविर में 97 मरीजों की जांच की गई जिसमें लगभग 38 मरीजों के सुनने की क्षमता में परेशानी की बात सामने आई है। चूँकि वर्तमान समय में युवाओं के द्वारा फोन की लीड अथवा हैडफोन का उपयोग करना काफी आम है और यही आजकल बढ़ रहे बहरेपन की समस्या का एक प्रमुख कारण भी बनकर सामने आया है।

                                 

जिला अस्पताल में आयोजित किए गए इस शिविर का उद्घाटन अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 पूजा शर्मा और चिकित्सा अधीक्षक डॉ0 बी. पी. कौशिक के द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

यह शिविर ‘समुदायों से कक्षाओं तक, सभी बच्चों के लिए श्रवण क्षमता की देखभाल, अभी कार्य करें, जिससे कान या सुनने की समस्याओं के चलते कोई भी बच्चा पीछे न रहें’थीम पर आधारित था। इस पहल का उद्देश्य आमजन को श्रवण सम्बन्धित बीमारियों और उनसे बचाव के प्रति जागरूक करना था।

श्रवण क्षमता की हानि का निरंतर बढ़ता खतरा

इस अवसर पर ईएनटी सर्जन डॉ0 बी. पी. कौशिक के द्वारा युवाओं और व्यस्कों में श्रवण क्षमता के ह्रास के बढ़ते खतरे पर चिन्ता व्यक्त की गई। डॉ0 बी. पी. कौशिक ने बताया कि वर्तमान समय में तेज आवाज में संगती सुनना एक आम प्रवृतित बन चुकी है। ऐसे में हैडफोन आदि का निरंतर प्रयोग करना भी श्रवएा क्षमता को गम्भीर हानि पहुँचा रहा है। इस अवसर पर डॉ0 कौशिक ने सुनने की क्षमता के प्रति सचेत रहने की लोगों से अपील भी की।

जागरूकता से ही सम्भव है बचाव

                                   

इस शिविर में उपस्थित सभी लोगों की श्रवण सम्बन्धी आवश्यक जांच की गई। जांच के दौरान जिन मरीजों में श्रवण सम्बन्ति परेशानी सामने आई, उनके आवश्यक उपचार और परामर्श भी प्रदान किया गया। इस अवसर पर डॉ0 कौशिक ने तीव्र वॉल्यूम वाले उपकरणों से दूरी बाने की सलाह दी। ऐसे जागरूकता वाले कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों की श्रवण सम्बन्धी समस्याओं के प्रति तत्काल कार्यवाई करना है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिशिचत् करना भी था कि कोई भी बच्चा कान या सुनने की समस्या के चलते पीछे न छूट सकें।

बरतने के योग्य कुछ सावधानियाँ

  • ऐसे उपकरणों का प्रयोग करते समय इनका वॉल्यूम 60 प्रतिशत तक रखना सुनिश्चित् करें और साथ ही दिन में 60 मिनट से अधिक हैडफोन का प्रयोग न करें।
  • उपकरणों का प्रयोग करते समय प्रति 30 से 40 मिनट के बाद कान को 10 मिनट के लिए आराम दें, क्योंकि लगातार संगीत आदि को सुनना कान की नसों को थका देता है।
  • छोटे ईयरबड्स के स्थान पर कान को ऊपर से ढकने वाले बडे हैडफोन का प्रयोग करना उत्तम है, क्योंकि यह कान के पर्दे से थोड़ी दूरी पर रहते हैं और उन्हें कम नुकसान पहुँचाते हैं।
  • इसके साथ ही इस प्रकार के हैडफोन्स का प्रयोग करने को प्राथमिकता दें जो कि बाहर के शोर को ब्लॉक करने क्षमता से युक्त हों। इससे आपको बाहर के शोर के चलते वॉल्यूम को तेज करने की आवश्यकता ही नहीं होगी।
  • यदि आप कमरे में एकेले हैं या फिर ऑफिस में काम कर रहें हैं तो एक्सटर्नल स्पीकर्स का अधिक प्रयोग करें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।