
फंगल इंफेक्शंस के लिए पारंपरिक उपचार Publish Date : 26/03/2026
फंगल इंफेक्शंस के लिए पारंपरिक उपचार
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
फंगल संक्रमण एक आम स्वस्थ्य समस्या हैं, यह त्वचा की समस्याओं विभिन्न प्रकार के कवकों के कारण होते हैं। ये त्वचा, नाखून, खोपड़ी और जननांगों सहित शरीर के अन्य क्षेत्रों को प्रभावित कर सकते हैं। फंगल संक्रमण अक्सर गंभीर नहीं होते, लेकिन अगर इनका उचित उपचार न किया जाए तो ये असुविधाजनक भी हो सकते हैं और लंबे समय तक बने रह सकते हैं। सौभाग्य से, आज ऐसे कई घरेलू उपचार उपलब्ध हैं जो लक्षणों को कम करने और संक्रमण को शुरुआती चरणों में नियंत्रण में रखने में मदद कर सकते हैं।
फंगल इंफेक्शन के लक्षण

फंगल संक्रमण जगह के आधार पर अलग-अलग दिख सकते हैं। कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार से हैं:
- त्वचा पर लाल, खुजली वाले धब्बे।
- त्वचा जो छिल रही हो, फट रही हो, या छिल रही हो।
- जो नाखून सफेद, पीले या भूरे हैं, उनका रंग फीका पड़ गया है।
- नाखून जो मोटे या भंगुर हों।
- जलन या चुभन महसूस होना।
- स्पष्ट किनारे वाला दाने (दाद में)।
- दुर्गंध, विशेष रूप से पैर या कमर के संक्रमण में।
फंगल संक्रमण का कारण क्या है?
गर्म, नम जगहों पर फफूंद बहुत अधिक पनपते हैं, जो फंगल संक्रमण का मुख्य कारण है। कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं:
- खराब स्वच्छता।
- बहुत अधिक पसीना आना।
- रेज़र, तौलिए और जूते जैसी चीज़ें साझा करना।
- बहुत अधिक तंग या गीले कपड़े लंबे समय तक पहनना।
- इम्यून सिस्टम यह भी ठीक से काम नहीं कर रहा है।
- मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जो पहले से मौजूद हैं।
- एंटीबायोटिक दवाओं या कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का सेवन करना।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
