लावारिस कुत्तों के हमले में गंभीर घायल      Publish Date : 17/03/2026

  लावारिस कुत्तों के हमले में गंभीर घायल

                                                                                            डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

वर्तमान समय में पूरे प्रदेश में आवार कुत्तों का कहर जारी है इसी परिप्रेक्ष्य में रुड़की अस्पताल में एक ही दिन में लावारिस कुत्तों के काटने के 147 मामले आए हैं। शहरी और ग्रामीण इलाकों में लावारिस कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा ही रहा है। गुरुवार को रुड़की के अलग-अलग इलाकों में लावारिस कुत्तों ने एक बच्चे और एक किशोरी पर हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। दोनों घायलों को गंभीर हालत में सिविल अस्पताल लाया गया। शहर और देहात क्षेत्र से एक ही दिन में लावारिस कुत्तों के काटने के 147 मामले सिविल अस्पताल में दर्ज किए गए।

शक्ति विहार कॉलोनी निवासी चांदनी ने बताया कि उनका सात साल का बेटा अनमोल घर के बाहर खेल रहा था। तभी अचानक एक कुत्ता आया और उस पर हमला कर दिया। कुत्ते के काटने से बच्चा घबरा गया और चिल्लाने लगा। बच्चे की चीख सुनकर वह बाहर आई। पड़ोसी भी आए गए, उन्होंने हमलावर कुत्ते को वहां से भगाया। परिजन घायल बच्चे को तुरंत अस्पताल ले गए, जहां बच्चे को एंटी रैबीज इंजेक्शन और सिरम लगाया गया है।

इसी प्रकार सैनिक कॉलोनी निवासी बरखा ने बताया कि वह अपनी सहेली के साथ घर के बाहर जा रही थी, तभी अचानक एक कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और काट लिया। बरखा ने भी रुड़की सिविल अस्पताल में उपचार कराया। इसी तरह ढंडेरी गांव निवासी तरुण कुमार ने बताया कि उनका सात वर्षीय बेटा लवीश घर के बाहर खेल रहा था, तभी कुत्ते ने उसके हाथ में काट लिया।

                           

सिविल अस्पताल में बच्चे का उपचार कराया गया। वहीं, इनके अलावा गुरुवार को रुड़की सिविल अस्पताल में डॉग बाइट के कुल 147 मामले पहुंचे। इनमें पहली, दूसरी और तीसरी डोज' के मरीज भी शामिल हैं। अस्पताल के सीएमएस डॉ ए. के. मिश्रा के अनुसार दो बच्चों और एक किशोरी को गंभीर रूप से काटे जाने के कारण बच्चों को एंटी रेबीज वैक्सीन के साथ सिरम भी लगाना पड़ा है।

रुड़की सिविल अस्पताल में चार दिन के भीतर मामले:

दिनांक

डॉग बाइट

15 जनवरी

147

14 जनवरी

80

13 जनवरी

138

12 जनवरी

120

(नोट: आंकड़ों में डॉग बाइट के पहली, दूसरी और तीसरी डोज के मरीज भी शामिल हैं।)

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।