
अब घर बैठे ही होगी मानसिक रोग की पहचान और मिल सकेगा सही उपचार Publish Date : 12/03/2026
अब घर बैठे ही होगी मानसिक रोग की पहचान और मिल सकेगा सही उपचार
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के द्वारा मानसिक रोगों के उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। कृत्रिम बुद्विमतता (एआई) आधारित एक ऐसा उन्नत डिजिटल मनोचिकित्सा तंत्र (एप और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म) का विकास किया गया है, जो न केवल व्यक्ति की मनेावृत्ति एवं मनोस्थिति की समय रहते ही पहचान कर लेगा और साथ ही पीड़ित अपने घर बैठे ही मोबाइल, कम्प्यूटर और लैपटॉप आदि से अपनी मानसिक समस्या हेतु दूर-दराज के विशेशज्ञों से भी बातचीत कर सकेगा।
आईआईटी और आईआईएम के विशेषज्ञों ने साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के प्रो0 डॉ0 कौशिक सिन्हा देब और प्रो0 डॉ0 नंद कुमार कर रहे हैं। एम्स की डिजिटल-साइकाइट्री लैब में इसका ट्रायल भी हो चुका है और अब इसका उपयोग करने की तैयारी की जा रही है।

डॉ0 कौशिक कहते हैं कि हमारा उद्देश्य एआई की सहायता से मानसिक रोगों की पहचान को अधिक सरल और तेज बनाना है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य एक बड़ी समस्या है। अब रोगी को अस्पताल जाने की आवश्कता नहीं होगी और पूरी जानकारी भी गोपनीय रहेगी
प्रो0 डॉ0 कौश्कि सिन्हा देब बताते हैं कि यह डिजिटल मनोचिकित्सा तंत्र मानव व्यवहार, आवाज, चेहरे के हावभाव, मोबाइल और कम्प्यूटर के उपयोग का पैटर्न आदि के माध्यम से ही मानसिक रोगों के शुरूआती संकेतों की पहचान करने में सक्षम है। इस तंत्र में एआई आधारित विभिन्न स्तरों वाली जांच प्रणाली को विकसित किया जा रहा है, जो कि अवसाद, चिंता, बाइपोलर और स्मृति से जुड़े अन्य रोगों की पहचान उसके शुरूआती चरणों में कर लेगी।
एआई इन संकेतों का विश्लेषण कर विशेषज्ञ चिकित्सकों तक पहुँचाएगा। इसके उपरांत विशेषज्ञा चिकित्सक इनका परीक्षण एवं रोग की पहचान कर परामर्श एवं उपचार दे सकेंगे। यह प्रणाली रोगी व्यक्ति की गोपनीयता को भी सुनिश्चित करती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
