
बच्चों में बढ़ते कैंसर पर ध्यान देना होगा Publish Date : 10/03/2026
बच्चों में बढ़ते कैंसर पर ध्यान देना होगा
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
अंतरराष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस प्रतिवर्ष 15 फरवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्यं कैंसर पीड़ित बच्चों, किशोरों और उनके परिजनों के प्रति समर्थन, जागरूकता और एकजुटता प्रदर्शित करना है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी है कि उनको प्रारंभिक निदान, उचित उपचार और एक समान स्वास्थ्य देखभाल मिल सके। बावजूद इसके बाल कैंसर पर हमें और अधिक ध्यान देना होगा। अध्ययन बताते हैं कि दुनिया भर में हर दिन 1,000 से ज्यादा बच्चों में कैंसर का पता चलता है। इस तरह, हर साल 20 वर्ष से कम उम्र के करीब 4,00,000 बच्चे कैंसर से पीड़ित होते हैं।

15 वर्ष से कम आयु वर्ग में प्रति एक लाख बच्चों में 17.14 कैंसर के मामले सामने आते हैं। इसी तरह, 15 से 39 वर्ष की आयु के किशोरों, युवाओं व वयस्कों में प्रति एक लाख पर 74.9 मामले सामने आते हैं। हालांकि, बच्चों और किशोरों में तुलनात्मक रूप से कैंसर कम दिखता है, फिर भी अमेरिका जैसे विकसित देशों में शैशवावस्था के बाद बच्चों में बीमारी से होने वाली मौतों का यह एक प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि कैंसर पीड़ित बच्चों में जीवित रहने की दर उच्च आय वाले देशों में 80 प्रतिशत तक और निम्न मध्यम आय वाले देशों में केवल 20 प्रतिशत तक होती है। जाहिर है, भारत जैसे देशों में चिंता गहरी है।
बच्चों में होने वाले अधिकांश कैंसर, वयस्कों में होने वाले कैंसर की तरह ही जीन में होने वाले परिवर्तनों के कारण होते हैं, जिससे कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि होती है। कुछ आनुवंशिक परिवर्तन, जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होते हैं, वे भी कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़े होते हैं। कैंसर का कारण बनने वाले आनुवंशिक परिवर्तन विकास के दौरान कोशिकाओं में स्वतः भी हो सकते हैं।बच्चों में होने वाले सभी कैंसरों में से लगभग आठ से 10 प्रतिशत मामलों में जीन में वंशानुगत रोगजनक भिन्न होता है, हालांकि यह प्रतिशत कैंसर के प्रकारों के अनुसार अलग-अलग होता है।
वास्तव में, बाल कैंसर के 12 से अधिक प्रमुख प्रकार और 100 से अधिक उप-प्रकार होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2030 तक कैंसर से पीड़ित बच्चों के लिए कम से कम 60 प्रतिशत जीवित रहने की दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसे शत-प्रतिशत सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है। कैंसर पीड़ितों के जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए प्रारंभिक निदान, विशेषज्ञ देखभाल और सस्ती दवाओं तक पहुंच बढ़ाना आवश्यक है। इस दिशा में गंभीरता से काम करना होगा, अन्यथा इस तरह के लक्ष्य मात्र कागजों की शोभा बढ़ाएंगे।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
