ब्लू माइंड थेरेपी से दूर होगा तनाव      Publish Date : 02/03/2026

        ब्लू माइंड थेरेपी से दूर होगा तनाव

                                                                                       डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

आज हम ज्यादातर समय मोबाइल या स्क्रीन के सामने बिताते हैं। इन स्क्रीन्स से निकलने वाली किरणें इन्सान को मानसिक थकान और तनाव देती हैं। ब्लू माइंड थेरेपी इन समस्याओं से राहत पाने का एक प्रभावी उपाय है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव और चिंता आम उसनाला और चिंतुकी है। सबसे अजीब बात जो देखने को मिलने रही है वह है कि तनाव, एंग्जाइटी की गिरफ्त में सिर्फ बड़े ही नहीं हैं, बल्कि बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं।

                             

मेंटल हेल्थ को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी के चलते लोग इस पर बात करने और एक्सपर्ट की सलाह लेने से हिचकिचाते हैं। मेंटल हेल्थ को लंबे समय तक इग्नोर करना कई तरह की सेहत संबंधी परेशानियों की वजह बन सकता है। ऐसे में मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखना एक चुनौती बन गया है। इन समस्याओं से राहत पाने के लिए एक प्रभावी और प्राकृतिक तरीका है ब्लू माइंड थेरेपी।

ब्लू मांइड थेरेपी की अवधारणा समुद्री जीव वैज्ञानिक वैलेस जे निकोलस ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'ब्लू माइंड' में प्रस्तुत की थी। उनके अनुसार, पानी के संपर्क में आने या पानी के आस-पास समय बिताने से हमारे मस्तिष्क की स्थिति शांत और संतुलित हो जाती है।

क्या है ब्लू मांइड थेरेपी:

ब्लू माइंड, एक ऐसी मानसिक अवस्था है, जिसमें व्यक्ति शांति, संतोष और सकारात्मकता का अनुभव करता है। इसके विपरीत रेड मांइड वह अवस्था है, जिसमें व्यक्ति तनाव, गुस्सा और बेचैनी महसूस करता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी हमें अक्सर रेड माइंड की स्थिति में रखती है।

ब्लू माइंड थेरेपी हमें इस नकारात्मक स्थिति से बाहर निकाल कर मानसिक सुकून की ओर ले जाती है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि पानी के पास रहने से हमारे मस्तिष्क में डोपामाइन और' सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोन का स्तर बढ़ता है। समुद्र की लहरों की आवाज, नदी का बहाव, बारिश की बूंदें या झील का शांत दृश्य, ये सभी हमारे तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं। पानी को देखना या उसकी ध्वनि सुनना हमारे मस्तिष्क की अल्फा वेव्स को सक्रिय करता है, जो ध्यान और रिलैक्सेशन की अवस्था से जुड़ी होती है।

यही कारण है कि समुद्र तट या झील के किनारे बैठकर हमें स्वाभाविक शांति महसूस होती है। ब्लू माइंड थेरेपीअपनाने के लिए किसी विशेष उपकरण या महंगे इलाज की जरूरत नहीं होती। इसे आप अपने दैनिक जीवन में सरल तरीकों से शामिल कर सकते हैं।

प्रकृति के बीच समय बिताएं: यदि आपके आस-पास कोई नदी, झीलया समुद्र है, तो वहां कुछ समय बिताएं। पानी के बहाव को देखें और उसकी आवाज को महसूस करें। तैराकी या वाटर एक्टिविटी करने से न केवल शरीर स्वस्थ रहता है, बल्कि मन भी हल्का और प्रसन्न होता है। पानी में रहने से तनाव कम होता है।

बारिश का आनंद लें: हल्की बारिश में टहलना या खिड़की के पास बैठकर बारिश की बूंदों को देखना भी मानसिक सुकून देता है। इसलिए अगर बारिश हो रही है, तो इसका लाभ जरूर उठाएं।

घर में पानी का तत्व शामिल करें: यदि बाहर जाना संभव न हो, तो घर में छोटा सा फांउटेन लगाएं यां एक्वेरियम रखें। बहते पानी की ध्वनि मन को शांत करती है।

ध्यान और कल्पना: आंख बंद करके समुद्र या झील का शांत दृश्य कल्पना करें। यह भी ब्लू मांइड की अवस्था लाने में मदद करता है।

पानी की ध्वनि से लाभ: आज हम ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं। मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। इससे मानसिक थकान और तनाव बढ़ता है। ऐसे में ब्लू माइंड थेरेपी हमें डिजिटल दुनिया से थोड़ी दूरी बनाकर प्रकृति से जुड़ने का अवसर देती है। शहरी जीवन में भी इस थेरेपी को अपनाया जा सकता है। वीकेंड पर किसी झील या पार्क में जाना, छुट्टियों में समुद्र / तट की यात्रा करना या रोजाना कुछ मिनट पानी की ध्वनि सुनना मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

तनाव और चिंता पर प्रभाव

ब्लू माइंड थेरेपी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह प्राकृतिक और साइड इफेक्ट रहित तरीका है। नियमित रूप से पानी के संपर्क में रहने से हृदय गति सामान्य होती है, रक्तचाप नियंत्रित रहता है, नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है, एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मक विचार कम होते हैं। पानी के आसपास समय बिताने से व्यक्ति वर्तमान क्षण में जीना सीखता है। यह मांइडफुलनेस को बढ़ावा देता है, जिससे चिंता और भविष्य की फिक्र कम होती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।