
स्वास्थ्य सेवाओं को पंगु बनाने का खेल Publish Date : 28/02/2026
स्वास्थ्य सेवाओं को पंगु बनाने का खेल
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
किसी भी राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए आम नागरिकों को प्रदान की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का निपुण चिकित्सकों द्वारा संचालित किया जाना अपेक्षित होता है। अक्षम और अयोग्य चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाओं को नहीं छोड़ा जा सकता। चिकित्सकों को विशेष रोगों का विशेषज्ञ बनने के लिए एमडी व एमएस पाठ्यक्रम पूरा करना अनिवार्य है, जिसके लिए उनको नीट परीक्षा पास करनी पड़ती है। पीजी में प्रवेश के लिए अर्हता के मापदंड पूर्व-निर्धारित हैं, जिनके अनुसारं अनारक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए पचास प्रतिशत और आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए चालीस प्रतिशत अंक अनिवार्य बनाया गया था।

हालांकि, इस बार पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु हजारों सीटें अभ्यर्थियों द्वारा न्यूनतम अर्हता पूरी न कर पाने के कारण खाली रह जाने की आशंकाथी, जिसके चलते स्वास्थ्य मंत्रालय ने सामान्य वर्ग के लिए पसेंटाइल पचास प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए चालीस प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय भले ही पसेंटाइल में इस कमी को उचित ठहराए, मगर सामान्य समझ का कोई भी व्यक्ति इस निर्णय को तर्कसंगत करार नहीं दे सकता। स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता, फिर सात प्रतिशत या शून्य पसेंटाइल पर पीजी में प्रवेश को तर्कसंगत कैसे ठहराया जा सकता है ? विचारणीय बिंदु यह भी है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आवश्यक जन-उपयोगी सेवाओं में निपुणता के मानक पूरे किए जाने चाहिए। ऐसे में, नई कवायद से इन सेवाओं के पंगु बनने का खतरा बढ़ जाएगा।

यदि एक बार इस प्रकार की छूट देकर बिना उचित अर्हता के अभ्यर्थियों कोपीजी में प्रवेश दिया जाएगा, तो मुमकिन है कि भविष्य में अक्षम चिकित्सक लोगों का उपचार करते दिखें। विडंबना है कि कहीं शून्य अंक प्राप्त करने वाले व्यक्ति को विषय विशेषज्ञ बताकर शिक्षक बनाया जा रहा है, तो कहीं चिकित्सा जैसे जीवन से जुड़े गंभीर विषय का मखौल उड़ाने से भी परहेज नहीं किया जा रहा। ऐसे मे, जरूरी है कि देश के स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर गुणवत्ता को लेकर कोई समझौता न किया जाए।
नीट- पीजी की परीक्षा में न्यूनतम अर्हता प्राप्त न करने वाले अभ्यर्थियों को पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश देने के लिए दी गई इस छूट पर पुनर्विचार आवश्यक है।" स्वास्थ्य मंत्रालय का यह निर्णय घातक सिद्ध हो सकता है। सरकार को इस मुद्दे पर संजीदगी दिखानी चाहिए, ताकि योग्य डॉक्टर ही सेवा में आ सकें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
