कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने के लक्षण      Publish Date : 06/02/2026

               कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने के लक्षण

                                                                                                                                       डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

  • अगर शरीर में दिखने लगें ये छोटे-छोटे संकेत तो समझ लीजिए कि बढ़ गया है कोलेस्ट्रॉल लेवल, इसे न करें नजरअंदाज

  • जब एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल ब्लड वेसेल्स में मौजूद होता है, तो यह ब्लड फ्लो को ब्लॉक कर देता है, जिसके कारण हार्ट अटैक आता

खून में कोलेस्ट्रॉल का हाई लेवल (खराब LDL) शारीरिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा होता है। कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा पदार्थ होता है, जो आमतौर पर सेल मेंब्रेन और हार्मोन (जैसे एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन) के निर्माण के लिए जरूरी होता है। यह विटामिन D के synthesis और पित्त अम्लों (bile acids) के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो वसा के पाचन में मदद करते हैं।

हालांकि, ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का बहुत ज्यादा लेवल ब्लड वेसेल्स को संकीर्ण कर सकता है, जिससे हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर शुरुआती फेज में कोई लक्षण नहीं दिखाता है। बहुत से लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें हाई कोलेस्ट्रॉल है। हालांकि, कुछ चेतावनी संकेतों को पहचानने से इस खतरे को जल्दी पहचानने में मदद मिल सकती है। कई शोध से पता चला है कि लाइफस्टाइल, जेनेटिक इफेक्ट और अन्य हेल्थ कंडीशन कोलेस्ट्रॉल के लेवल को निर्धारित करती हैं। आइए शरीर में हाई कोलेस्ट्रॉल के 5 मुख्य लक्षणों पर गौर करें-

हाई कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती लक्षण

                                                         

  • सीने में दर्द (एनजाइना)- हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण एथेरोस्क्लेरोसिस हो सकता है। एथेरोस्क्लेरोसिस, धमनियों में फैट, कोलेस्ट्रॉल, और अन्य पदार्थों का जमा होना है। इसे धमनियों का सख्त होना भी कहते हैं। यह एक हार्ट डिजीज है, लेकिन इससे पूरे शरीर की धमनियां प्रभावित हो सकती हैं।
  • सांस की तकलीफ- हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण लो ब्लड फ्लो हो सकता है, जो फेफड़ों में ऑक्सीजन की सप्लाई को सीमित कर सकता है, फिजिकल एक्टिविटी के दौरान या सपाट लेटने पर सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।
  • लगातार थकान और सांस फूलना- हाई कोलेस्ट्रॉल धमनियों को संकुचित कर देता है, जिससे मांसपेशियों और अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है। इस प्रकार, दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकान और सांस फूलने जैसी गंभीर समस्याएं होती हैं। इसे नजरअंदाज करने से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
  • हाथ-पैरों में सुन्नपन, झुनझुनी या दर्द- कोलेस्ट्रॉल प्लाक पैरों की ब्लड वेसल्स को भी ब्लॉक कर सकता है। इस स्थिति को परिधीय धमनी रोग (पीएडी) कहा जाता है। चलते या एक्सरसाइज करते समय आपको पैरों में भारीपन या जलन महसूस हो सकती है। आराम करने के बाद दर्द आमतौर पर कम हो जाता है, लेकिन अगर समस्या बढ़ जाती है, तो आपको खड़े होने पर भी दर्द हो सकता है। इस प्रकार का दर्द शरीर के अन्य भागों में धमनी संबंधी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। धमनियों में कोलेस्ट्रॉल का जमाव हाथों और पैरों में रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है, जिससे सुन्नता, झुनझुनी या दर्द हो सकता है।
  • जैथोमास- ये स्किन के नीचे फैट का जमाव होते हैं, जो अक्सर कोहनी, घुटनों या नितंबों पर पीले रंग की गांठ या उभार के रूप में दिखाई देते हैं।
  • जैथेलास्मा- आंखों के आस-पास कोलेस्ट्रॉल का जमाव, पलकों पर पीले रंग के धब्बे के रूप में दिखाई देना, हाई कोलेस्ट्रॉल का संकेत भी हो सकता है।
  • हार्ट अटैक और स्ट्रोक- गंभीर मामलों में, हाई कोलेस्ट्रॉल एथेरोस्क्लेरोसिस का कारण बन सकता है, जिससे खून के थक्के बन सकते हैं और धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं, जिससे दिल का दौरा या स्ट्रोक हो सकता है।
  • स्ट्रोक के लक्षण- इनमें चेहरे, हाथ या पैरों में अचानक सुन्नता या कमजोरी, भ्रम, बोलने या भाषण को समझने में परेशानी और दृष्टि संबंधी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण

अनहेल्दी डाइट

सैचुरेटेड और ट्रांस फैट से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे मांस, फूल फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट्स, तले हुए फूड, मीठे बेकरी प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड स्नैक्स एलडीएल या खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। ऐसे में मछली, मेवे, जैतून का तेल आदि जैसे हेल्दी फैट का सेवन कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।

व्यायाम की कमी

एक्सरसाइज एचडीएल या अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है, जिससे खून में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद मिलती है। हालांकि, व्यायाम की कमी एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को कम करती है और खराब कोलेस्ट्रॉल के जमाव को बढ़ाती है। इसलिए, पैदल चलना, तैरना या साइकिल चलाना जैसे व्यायाम रोजाना करने से हाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल किया जा सकता है।

जेनेटिक इफेक्ट

कुछ मामलों में, कोलेस्ट्रॉल जेनेटिक होता है। पारिवारिक हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (FH) एक जेनेटिक कंडीशन है जिसमें जन्म से ही LDL कोलेस्ट्रॉल का लेवल हाई होता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं

सीने में दर्द, जिसे एनजाइना भी कहा जाता है। अगर दिल को ब्लड सप्लाइ करने वाली धमनियां प्रभावित होती हैं, तो इससे सीने में दर्द हो सकता है, जिससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो सकता है।

दिल का दौरा- अगर प्लाक फट जाए या टूट जाए, तो खून का थक्का बन सकता है। थक्का उस जगह पर ब्लड फ्लो को रोक सकता है जहां से वह टूटा था, या यह पूरी तरह से टूटकर दूर की आर्टरी को ब्लॉक कर सकता है। अगर दिल के किसी हिस्से में खून का बहाव रुक जाता है, तो दिल का दौरा पड़ता है। दिल का दौरा एक इमरजेंसी कंडीशन है जिसका तुरंत इलाज किया जाना चाहिए।

स्ट्रोक- स्ट्रोक तब होता है जब खून का थक्का ब्रेन के किसी हिस्से में खून के बहाव को ब्लॉक कर देता है। यह भी एक इमरजेंसी कंडीशन है जिसका तुरंत इलाज किया जाना चाहिए।

ध्यान देने वाली बात

स्मोकिंग और शराब- स्मोकिंग एचडीएल को कम करता है और एलडीएल को बढ़ाता है। ज्यादा शराब का सेवन कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को भी बढ़ाता है। हाई कोलेस्ट्रॉल क्रोनिक हेल्थ कंडीशन बढ़ाता है। डाइट में बदलाव, रेगुलर एक्सरसाइज, स्मोकिंग और शराब का सेवन कम करने और अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेगुलर टेस्ट करवाकर इस खतरे को नियंत्रित किया जा सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।