
जागरूकता से संभव है बचाव Publish Date : 14/01/2026
जागरूकता से संभव है बचाव
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल सबसे गंभीर कैंसर है। समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में इससे असामयिक मौतें हो रही हैं। क्या है इससे बचाव सर्वाइकल यानी गर्भाशय ग्रीवा, कैंसर। यह ग्रीवा की कोशिकाओं के अनियंत्रित रूप से बदलने के कारण होता है। इसका सबसे सामान्य कारण है एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस।
आमतौर पर यह वायरस से संक्रमित व्यक्ति के यौन संपर्क से फैलता है। पुरुष से महिला और महिला से पुरुष में यह फैल सकता है। 90 प्रतिशत महिलाओं में यह शांत बना रहता है। यह अवधि 10-15 वर्ष या इससे भी अधिक हो सकती है। यदि समय पर जांच कराएं तो कैंसर से बचने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

समय पूर्व जांच जरूरीः कैंसर को एक असाध्य रोग माना गया है। हालांकि इसके उपचार में काफी सकारात्मक कार्य हुए हैं। महिलाओं को हर तीन साल में पेप्समीयर व एचपीवी जांच अवश्य करानी चाहिए। इससे समय पूर्व कैंसर की पहचान की जा सकती है। चूंकि शुरुआती स्टेज में लक्षण नहीं दिखते, इसलिए ज्यादातर महिलाएं चिकित्सक से संपर्क नहीं करतीं। जबकि दूसरी-तीसरी स्टेज में काफी देर हो चुकी होती है।
धूमपान है बड़ा जोखिमः अगर महिलाएं धूमपान करती हैं तो यह एचपीवी संक्रमण का खतरा और बढ़ा देता है। कैंसर जानित कोशिकाएं अधिक सक्रिय हो सकती हैं। इसलिए प्रयास करें कि आप धूमपान या धूमपान करने वालों के संपर्क में आने से बचें।
लड़कों को भी वैक्सीनः सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए लड़कों को भी वैक्सीन लगवाएं, ताकि उनमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो और वे इस वायरस के प्रवाहक न बनें। बता दें कि लड़के अधिकांशतः इस कैंसर के वाहक होते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान

- मासिक धर्म से संबंधित समस्या हो तो दवाइयां ही लेकर न आएं, एक बार जांच जरूर करा लें।
- 9 से 15 साल की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाएं। कम उम्र में वैक्सीन लगाने से संक्रमण के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता अच्छी तरह विकसित हो जाती है।
- 26 साल की उम्र तक सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी वैक्सीन जरूर लगवा लें। इसके बाद 45-50 की उम्र तक चिकित्सक से परामर्श के बाद वैक्सीन लगवा सकती हैं।
समझें गंभीरता
- 1,27,000 सर्वाइकल कैंसर के नए मामले दर्ज हुए भारत में 2022 में। प्रति सात-आठ मिनट में एक महिला की इससे हो रही है मौत।
- दो प्रतिशत है स्क्रीनिंग रेट यानी सी में से दो महिलाएं ही करा रही है इस कैंसर की जांच। यूएस में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
