
अंगूर के बीज में छिपा है 150 साल जीने का राज Publish Date : 01/01/2026
अंगूर के बीज में छिपा है 150 साल जीने का राज
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
कुछ समय पहले, चीन के सरकारी टेलीविजन पर एक बातचीत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके रूसी समकक्ष को यह चर्चा करते सुना गया कि इन्सान 150 वर्ष या उससे अधिक समय तक जीवित रह सकता है। इस बातचीत को सुनकर भले ही कई लोगों को हैरत हो, लेकिन, चीन के शेन्जेन स्थित लॉनवी बायोसाइंसेज़ की प्रयोगशाला के लिए यह कोई आश्चर्य की बात नहीं थी।
कंपनी के सीटीओ ल्यू किंगहुआ का मानना है कि 150 साल तकं जीना अब ख्वाब नहीं, भविष्य की हकीकत है। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच से दस वर्षों में किसी को भी कैंसर नहीं होगा।
लॉनवी ने अंगूर के बीजों के अर्क में पाए जाने वाले तत्व प्रोस्यानिडिन 'सी1 (पीसीसी-1) पर आधारित एंटी-एजिंग गोलियां विकसित की हैं, जो कोशिकाओं को स्वस्थ रखती हैं। उनका दावा है कि ये गोलियां इन्सान की उम्र 100 से 120 वर्ष तक बढ़ा सकती हैं। कंपनी के सीईओ जिको का कहना है कि यह सिर्फ एक गोली नहीं, बल्कि जीवन का अमृत है।

वर्ष 2021 में नेचर मेटाबोलिज्म में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि पीसीसी-1 का जिन चूहों पर प्रयोग किया गया, उनकी उम्र 9.4 फीसदी और उपचार शुरू होने के बाद उनका जीवनकाल 64.2 प्रतिशत तक बढ़ गया। हालांकि, बाद में डाटा में कुछ त्रुटियों की बात सामने आई, पर कई अन्य अध्ययनों ने इस खोज का समर्थन किया।
अमेरिकी विशेषज्ञ डेविड बार्जिलाई के अनुसार, 'जो चूहों पर काम करता है, जरूरी नहीं कि वह हमेशा इन्सानों पर भी असर करे'। चीन अब दीर्घायु शोध को संस्थागत और नीतिगत स्तर पर गंभीरता से ले रहा है। हार्वर्ड, मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर वदीम ग्लैडिशेव के अनुसार, 'कुछ वर्ष पहले तक चीन इस क्षेत्र में बहुत पीछे था, पर अब उसने जबर्दस्त प्रगति की है।

चीन की सरकार ने भी इस क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी है। पीपुल्स डेली के मुताबिक, चीन की औसत आयु अब 79 वर्ष हो गई है, जो वैश्विक औसत से पांच वर्ष अधिक है, हालांकि यह अभी भी जापान से पीछे है। टाइम पाई के सह-संस्थापक गान यू कहते हैं कि पहले दीर्घायु की चर्चा सिर्फ अमीर अमेरिकियों में होती थी, लेकिन अब चीनी भी इसमें निवेश कर रहे हैं। जीवन के अमृत की खोज, जिसे आज पीटर थील जैसे अमेरिकी अरबपति आगे बढ़ा रहे हैं, चीन में दो हजार साल पुरानी परंपरा है, जिसकी शुरुआत सम्राट किन शी हुआंग ने की थी। चीन अब इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
