प्रसव बाद महिलाओं की असहनीय पीड़ा और जान का जोखिम होगा कम      Publish Date : 22/12/2025

प्रसव बाद महिलाओं की असहनीय पीड़ा और जान का जोखिम होगा कम

                                                                                                                                                                     डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

एक लंबे अरसे बाद महिलाओं की असहनीय और जानलेवा पीड़ा को कम करने के लिए शीर्ष स्वास्थ्य एजेंसियों ने गंभीर प्रयास शुरू किए हैं। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्त्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) दुनिया भर में मातृ मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है। हर साल लगभग 45,000 महिलाओं की जान इसी वजह से चली जाती है।

अव विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), अंतरराष्ट्रीय स्त्री रोग महासंघ (फिगो) और अंतरराष्ट्रीय गमिडवाइव्य महासंघ (आईसीएम) ने इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए नई अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन और सिफारिशें जारी की हैं। यह गाइडलाइन उन देशों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई है जहां संसाधनों की कमी है और मातृमृत्यु दर अभी भी ऊंची बनी हुई है। प्रसवोत्तर रक्तस्राव महिलाओं के लिए एक अदृश्य लेकिन बेहद पीड़ादायक और घातक खतरा है।

प्रसवोत्तर रक्तस्त्राव वह स्थिति है जब प्रसव के तुरंत बाद महिला के शरीर से अत्यधिक रक्त निकलता है। यह मातृ मृत्यु का प्रमुख कारण हैं।

                                                                      

नई गाइडलाइन के अनुसार अब प्रसवोत्तर रक्तस्राव की पहचान 300 मिलीलीटर रक्तस्त्राव और असामान्य जीवन चिन्हों के साथ ही की जाएगी जबकि पहले यह सीमा 500 मिली थी। यह सिफारिशें द लैंसेट में प्रकाशित दुनिया के सबसे बड़े अध्ययन पर आधारित है।

रक्तस्राव के सटीक माप के लिए नया उपकरण

डब्ल्यूएचओ और साझेदार संस्थाओं ने डॉक्टरों और मिडवाइव्स को प्रसव के बाद निगरानी के दौरान कैलिब्रेटेड ड्रेप यानी रक्त की मात्रा मापने वाला विशेष कपड़ा इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इससे रक्तस्त्राव का अनुमान, अनुमान के बजाय माप के आधार पर लगेगा।

त्वरित उपचार की एमओटीआईवी पद्धति

  • गाइडलाइन में स्पष्ट आपातकालीन प्रोटोकॉल दिया गया है, जिसे एमओटीआईवी पद्धति कहा गया है।
  • एम-मसाज: बच्चेदानी की मालिश करें।
  • ओ-ऑक्सीटोसिक्स: संकुचन लाने वाली दवाएं दें।
  • टी-ट्रेनेक्सामिक एसिड: रक्तस्राव रोकने की दवा।
  • आई-इंट्रावेनस फ्लुइड्स: तरल पदार्थ चढ़ाना।
  • वी-वेजाइनल एग्जामिनेशन: महिला की योनि व जननांगों की जांच।
  • ई-एस्केलेशन ऑफ केयर: हालत गंभीर हो तो उच्च स्तर की देखभाल।

यदि इन उपायों से भी रक्तस्त्राव नियंत्रित नहीं होता तो तत्काल सर्जरी या रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया अपनाने की सिफारिश की गई है।

रोकथाम के लिए दीर्घकालिक उपाय

                                                                

गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से आयरन और फोलिक एसिड को खुराक दी जानी चाहिए। गंभीर एनीमिया के मामलों में आयरन इंजेक्शन या रक्त चढ़ाने की सलाह दी गई है। प्राकृतिक पेरिनियल मसाज को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। प्रसव के तीसरे चरण में ऑक्सीटोसिन या हीट-स्टेबल कारबेटोसिन का उपयोग करने की सिफारिश की गई है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।