
ग्रीन टी पीने से अल्जाइमर रोगियों को मिलती है राहत Publish Date : 19/12/2025
ग्रीन टी पीने से अल्जाइमर रोगियों को मिलती है राहत
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है भूलने की बीमारी लोगों में बढ़ती जाती है इस भूलने की बीमारी को अल्जाइमर रोग कहा जाता है। इसके इलाज की दिशा में काफी बड़ी सफलता मिली है मोहाली स्थित साफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी के विज्ञान को ने ननोपार्टिकल आधारित नई उपचार पद्धति विकसित की है, जिसमें ग्रीन टी में पाई जाने वाले एक प्रोटीन को तीन अन्य प्रोटीन के साथ मिलकर ऐसी दवा बनाई गई है जो अल्जाइमर के कारण उत्पन्न कई समस्याओं को दूर करेगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय इसे बड़ी उपलब्धि बता रहा है। इसकी पेटेंट पक्रिया और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी शुरू हो गई है। शोध टीम का नेतृत्व करने वाली आई एन एस टी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ जीवन ज्योति पांडा बताती है कि नई पद्धति नैनो पार्टिकल्स पर आधारित है। इसमें ग्रीन टी में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट को मूड और तंत्र का संचार से जुड़े न्यूरोट्रांसमीटर ड्रॉप में और अमीनो एसिड्स ट्राइप्टोफैन के साथ जोड़ा गया है।
सभी तीन प्रोटीन के मिलने से एग-इन टेप्टोफोन नैनो पार्टिकल्स बना, इन नैनो परत किस पर ब्रेन ड्राइव न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर को भी जोड़ा गया जिससे एक उन्नत ननोपार्टिकल तैयार हुआ यह न केवल मस्तिष्क में जमा विषैला एल्डिहाइड बेटा प्रोटीन को साफ करता है बल्कि न्यूरॉन्स के पुनर्जन्म और उनकी कर क्षमता को भी बढ़ा देता है।

शोध में रायबरेली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के डॉक्टर अशोक कुमार और गांधीनगर स्थित गुजरात बायोटेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी की डॉक्टर निशा सिंह ने भी योगदान दिया है। डॉ अशोक ने बताया कि प्रयोगशाला परीक्षण और चूहा पर ट्रायल में याददाश्त और सीखने की क्षमता में सुधार देखा गया है।
अल्जाइमर ग्रस्त मस्तिष्क में सूजन कम हुई और कोशिकाओं के अंदर संतुलन बहाल हुआ। इस निष्कर्ष के आधार पर कहा जा सकता है कि आने वाले समय में ग्रीन टी अल्जाइमर रोगियों के लिए वरदान साबित हो सकती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
