एंजेलमैन सिंड्रोम का पारम्पारिक उपचार      Publish Date : 08/12/2025

                  एंजेलमैन सिंड्रोम का पारम्पारिक उपचार

                                                                                                                                                                      डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

यदि आपके बच्चे में विकास से सम्बन्धित देरी दिखाई दे रही है, यानी वह कम बोलता है या बिल्कुल नहीं बोल पाता है, या इसी प्रकार के कुछ अन्य लक्षण भी प्रदर्षित कर रहा हैं, तो आपके बच्चे के लिए उसके स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को एंजेलमैन सिंड्रोम होने का संदेह भी हो सकता है।

इसके प्रमुख लक्षणों में दौरे पड़ना, गति और संतुलन करने में परेशानी होना या सिर के आकार का छोटा होना भी शामिल हो सकता है।

एंजेलमैन सिंड्रोम का निदान करना अपने आप में कठिन हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण अन्य प्रकार के सिंड्रोमों से मिलते-जुलते भी हो सकते हैं।

परीक्षण

                                                                 

रक्त परीक्षण से हमेशा एंजेलमैन सिंड्रोम का एक सही निदान हो सकता है। इस जीन परीक्षण के माध्यम से बच्चे के गुणसूत्रों में एंजेलमैन सिंड्रोम के संकेत देने वाले परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है।

जीन परीक्षणों का यह मिश्रण एंजेलमैन सिंड्रोम से जुड़े परिवर्तनों को दर्शा सकता है। यह परीक्षण निम्नलिखित स्थितियों की समीक्षा कर सकते हैं:

माता-पिता का डी.एन.ए पैटर्न- यह परीक्षण, जिसे डीएनए मिथाइलेशन परीक्षण के रूप में भी जाना जाता है, एंजेलमैन सिंड्रोम का कारण बनने वाले चार ज्ञात जीन परिवर्तनों में से यह तीन की जांच कर सकता है।

गुणसूत्रों का गायब होना- गुणसूत्रीय माइक्रोएरे (सीएमए) यह दिखा सकता है कि गुणसूत्रों के कुछ भाग गायब हैं या नहीं।

जीन परिवर्तन- एंजेलमैन सिंड्रोम शायद ही कभी तब होता है जब किसी व्यक्ति की मातृ प्रति UBE3A जीन सक्रिय होती है, लेकिन यह बदल जाती है। यदि डीएनए मिथाइलेशन परीक्षण के परिणाम सामान्य हैं, तो आपके बच्चे का स्वास्थ्य सेवा पेशेवर मातृ परिवर्तन की जाँच के लिए UBE3A जीन अनुक्रमण परीक्षण कराने की सलाह दे सकता है।

एंजेलमैन सिंड्रोम और दौरे के बीच संबंध के कारण, एक स्वास्थ्य सेवा पेशेवर इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ईईजी) भी कर सकता है। ईईजी मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि को मापने की एक प्रक्रिया होती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।