
जेनेटिक स्विच, जो इनफर्टिलिटी और मिसकैरेज की समस्या में है कारगर Publish Date : 05/12/2025
जेनेटिक स्विच, जो इनफर्टिलिटी और मिसकैरेज की समस्या में है कारगर
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
महिलाओं के गर्भ के भीतर होता है एक जेनेटिक स्विच, जो इनफर्टिलिटी और मिसकैरेज के उपचार में सहायता कर सकता है। भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा की एक नई खोज के अनुसार, जेनेटिक स्विच से भ्रूण यूट्रस लाइनिंग में सफलतापूर्वक इम्प्लांट किया जा सकता है, जिससे प्रेग्नेंसी शुरू होती है।
हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा प्रेग्नेंसी के प्रोसेस में एक क्रांतिकारी खोज की गई है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने एक बेसिक ‘जेनेटिक स्विच’ की खोज की है जो एम्ब्रियो को यूट्रस की लाइनिंग में सफलतापूर्वक इम्प्लांट होने में सहारा देकर प्रेग्नेंसी को शुरू करने में सहायता करता है।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो, इस रिसर्च के माध्यम से भारतीय वैज्ञानिकों ने पाया है कि यूटेराइन की दीवार में एक ‘‘जेनेटिक स्विच’’ होता है, जो यह तय करता है कि एम्ब्रियो यूटेराइन की दीवार से जुड़ पाएगा अथवा नहीं, और इस प्रकार से प्रेग्नेंसी शुरू हो जाती है।

अभी तक, वैज्ञानिकों को यह ज्ञात नहीं था कि यह मुश्किल काम शरीर के अंदर किस प्रकार से होता है। इसलिए यह प्रोसेस अभी तक एक बड़ा रहस्य बना हुआ था। लेकिन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), मुंबई में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और बैंगलोर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के जॉइंट रिसर्च के एक्सपर्ट्स को इस रिसर्च से एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस खोज से इनफर्टिलिटी और बार-बार होने वाले मिसकैरेज की समस्या के समाधान के लिए नए रास्ते खुलेंगे, और IVF ट्रीटमेंट का सक्सेस रेट भी बढ़ेगा। इंटरनेशनल साइंटिफिक जर्नल ‘सेल डेथ डिस्कवरी’ में छपी इस खोज को भारतीय साइंस सेक्टर के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
क्या है जेनेटिक स्विच?
वास्तव में यह ‘‘जेनेटिक स्विच’ एक बायोलॉजिकल मैकेनिज्म है जो जीन को ऑन या ऑफ करने के लिए रेगुलेटरी एलिमेंट्स का उपयोग करता है। यह जीन एक्सप्रेशन को कंट्रोल करता है, जिससे जीन को अलग-अलग टिशू में एक्टिवेट या डीएक्टिवेट किया जा सकता है। यह स्विच प्रोटीन या दूसरे मॉलिक्यूल्स से जुड़कर काम करते हैं और ट्रांसक्रिप्शन प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं जो DNA को मैसेंजर RNA (mRNA) में कॉपी करता है।
उदाहरण के लिए, एक ‘स्विच’ एम्ब्रियोनिक डेवलपमेंट या प्रेग्नेंसी जैसे प्रोसेस को कंट्रोल कर सकता है। इस स्टडी में यह साफ किया गया है कि दो विशेष जीन, HOXA10 और DHATKH2, यूट्रस की दीवार में एक छोटे से गेट को सही समय पर खोलते या बंद करते हैं।
जेनेटिक ‘स्विच‘ कैसे काम करता है?
ज्ञात हो कि प्रेग्नेंसी के लिए, एम्ब्रियो (सेमिनल वेसिकल) को मां के यूट्रस की दीवार से जुड़ना जरूरी होता है। यूट्रस की अंदर की दीवार आम तौर पर मजबूत और बंद होती है, जैसे किसी किले की दीवारें होती हैं। लेकिन, जैसे ही एम्ब्रियो आता है, तो जीन KJDA10 कुछ समय के लिए बंद हो जाता है और DHATKH2 एक्टिवेट हो जाता है। जब DHATKH2 एक्टिवेट होता है, तो किसी महिला के यूट्रस के सेल्स नरम और लचीले हो जाते हैं, जिससे वे थोड़ा हिल पाते हैं और इस दौरान एम्ब्रियो इसके अंदर जा सकता है।
बैलेंस करना है जरूरी

इस प्रोसेस में बैलेंस बहुत आवश्यक होता है क्योंकि अगर यूटेराइन की दीवार अच्छी तरह खुली नहीं होती है, तब एम्ब्रियो यूटेराइन की दीवार से जुड़ नहीं सकता, और अगर दीवार बहुत ज्यादा खुली है, तो प्रेग्नेंसी नहीं बच सकती। प्रेग्नेंसी की सफलता जीन Kzd10 और Dthkd2 के बैलेंस पर ही निर्भर करती है। रिसर्चर्स का कहना है कि इस खोज से IVF ट्रीटमेंट का सक्सेस रेट बढ़ सकता है और बार-बार प्रेग्नेंसी फेल होने के कारणों को ठीक करने के नए तरीके मिल सकते हैं।
सभी स्तनधारियों में पाई जाने वाली प्रक्रिया
यह जेनेटिक स्विच चूहों से लेकर बंदरों, हैम्स्टर और इंसानों तक के सेल्स में पाया गया है. इसलिए, रिसर्चर्स का कहना है कि यह प्रोसेस एवोल्यूशनरी रूप से पुराना है और सभी मैमल्स के लिए आवश्यक है।
महिलाओं की हेल्थ के लिए आशा की एक नई किरण
इस सम्बन्ध में ICMR-NIRRCH की डायरेक्टर डॉ. गीता सचदेव ने कहा कि यह खोज शुरुआती प्रेग्नेंसी फेलियर, बार-बार होने वाले मिसकैरेज और इनफर्टिलिटी जैसी समस्याओं के लिए नए सॉल्यूशन दे सकती है। इसके अलावा, उनका कहना है कि इस जेनेटिक ‘स्विच’ का उपयोग प्रेग्नेंसी को और सफल बनाने और भविष्य में IVF ट्रीटमेंट को और अधिक बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
