
HIV के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण Publish Date : 04/12/2025
HIV के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
नई थेरेपी से, मरीजों को इलाज के बाद एक साल से अधिक समय तक प्रतिदिन दवा लेने की आवश्यकता नहीं होगी, वैज्ञानिकों ने की है एक नई थेरेपी की खोज की है।
HIV एक जानलेवा इन्फेक्शन है जो AIDS का कारण बनता है, यह शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। इलाज के बिना, HIV शरीर को इन्फेक्शन और कुछ कैंसर से लड़ने में असमर्थ बना देता है। हालांकि, सही इलाज से इसे कंट्रोल किया जा सकता है और AIDS को बढ़ने से भी रोका जा सकता है। HIV से पीड़ित मरीजों को रोज दवा लेनी पड़ती है। अगर दवा छूट जाती है, तो HIV वायरस पूरे शरीर में फैलने लगता है, जिसके चलते मरीज को विभिन्न समस्याओं का समाना करना पड़ता है।
लेकिन अब, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साइंटिस्ट्स ने इसका हल खोज लिया है, उन्होंने कई दवाओं को मिलाकर एक नई थेरेपी बनाई है, जिसे एक बार देने के बाद, मरीजों को एक साल से ज्यादा समय तक प्रतिदिन दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साइंटिस्ट्स को इस थेरेपी के ट्रायल्स में काफी सफलता मिली है।
वैज्ञानिकों के नए अध्ययन परीक्षण में मिली सफलता

रिपोर्ट्स के अनुसार, सैन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के साइंटिस्ट्स ने यह स्टडी की है। हालांकि, यह एक छोटा ट्रायल था, लेकिन इसके परिणाम उम्मीद जगाने वाले रहे थे। साइंटिस्ट्स ने इस इम्यूनोथेरेपी को 10 HIV पॉजिटिव मरीजों पर टेस्ट किया। इस दौरान, मरीजों की रेगुलर एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी बंद कर दी गई थी। साइंटिस्ट्स ने इन मरीजों को एक कॉम्बिनेशन ट्रीटमेंट दिया, जिसका उद्देश्य HIV के खिलाफ शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करना था। इस कॉम्बिनेशन थेरेपी में एक वैक्सीन, इम्यून-एक्टिवेटिंग ड्रग्स और मोटेतौर पर न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज शामिल थी।. यह थेरेपी देने के बाद, साइंटिस्ट्स ने मरीजों का रेगुलर टेस्ट किया। कई महीनों तक इंतजार करने के बाद, नतीजे जबरदस्त थे। 10 में से सात पार्टिसिपेंट्स में वायरस का लेवल बहुत कम था, इतना कम कि इससे कोई नुकसान होने की उम्मीद नहीं थी। एक मामले में, नतीजे हैरान करने वाले थे, जिसमें वायरस 18 महीने तक अप्रभावी बना रहा।
इलाज बंद करने के बाद क्या हुआ?
नतीजों ने रिसर्चर्स को भी हैरान कर दियाः जैसे कि-
- ART बंद करने के बाद भी 10 में से सात मरीज वायरस को कंट्रोल में रख पाने में सफल रहे।
- एंटीबॉडीज के ब्लडस्ट्रीम से निकल जाने के बाद भी, उनके HIV लेवल महीनों तक कम ही बने रहे।
- जब वायरस ने वापस आने की कोशिश की, तो इन लोगों में सेल्स (एक तरह का इम्यून सेल जो इन्फेक्टेड सेल्स को मारता है) में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी गई।
वायरस पर कंट्रोल खो चुके तीन मरीजों से मिली जानकारी से रिसर्चर्स को यह समझने में मदद मिलेगी कि यह इलाज कुछ लोगों के लिए काम क्यों करता है और दूसरों के लिए नही। यह सफलता दिखाती है कि इम्यूनोथेरेपी और एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) को मिलाकर HIV का इलाज किया जा सकता है, जिससे प्रतिदिन दवा के बिना वायरस को लंबे समय तक कंट्रोल किया जा सकता है। यह रिसर्च साइंटिस्ट्स को यह समझने में मदद करती है कि कौन से तरीके अधिक असरदार हैं, ताकि भविष्य में इसके और भी बेहतर उपचार डेवलप किए जा सकें। एक कॉम्बिनेशन थेरेपी जिसमें वैक्सीन, इम्यून-बूस्टिंग ड्रग्स और एंटीबॉडीज शामिल हैं।

कॉम्बिनेशन थेरेपी में तीन मुख्य चीजें शामिल थीं:
- एक खास वैक्सीन।
- इम्यून-एक्टिवेटिंग ड्रग्स।
- ब्रॉडली न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडीज (BNAbs)।
इसका उद्देश्य शरीर के इम्यून सिस्टम को इतना मजबूत करना था कि वह HIV वायरस को सही तरीके से ही दबा सके।
फ्यूचर में डेली दवा लेना बंद हो जाएगा
अगर आगे की रिसर्च से यह थेरेपी सफल और सुरक्षित साबित होती है, तोः
- मरीजों को डेली दवा लेने की जरूरत नहीं होगी।
- जिंदगी की क्वालिटी अधिक बेहतर होगी।
- लंबे समय तक चलने वाले साइड इफेक्ट कम होंगे।
- इलाज का खर्च कम होगा।
- दुनिया भर के हेल्थ सिस्टम पर दबाव भी कम होगा।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
