सर्दियों के मौसम में अस्थमा अटैक का खतरा अधिक      Publish Date : 26/11/2025

         सर्दियों के मौसम में अस्थमा अटैक का खतरा अधिक

                                                                                                                                                                         डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

अस्थमा के मरीजों में अस्थमा अटैक आने पर क्या लक्षण दिखते हैं? और क्यों होती है यह बीमारी बता रहें हैं हमारे स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ0 दिव्यांशु सेंगर-

मौसम बदलने के साथ अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। अस्थमा से पीड़ित लोगों की समस्या सिर्फ अस्थमा तक ही सीमित नहीं होती है, बल्कि अस्थमा सांस की एक क्रोनिक रेस्पिरेटरी डिजीज है, जिससे सांस की नली में सूजन और सिकुड़न हो जाती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ, खांसी और सीने में जकड़न की समस्या होती है। अस्थमा केवल सर्दियों की ही समस्या नहीं है, बल्कि हर यह बदलते मौसम में भी बढ़ जाती है। यह कंडीशन फेफड़ों तक हवा ले जाने वाली एयरवेज में सूजन के कारण होती है, जिससे हवा का पूरी तरह से अंदर जाना मुश्किल हो जाता है। यह समस्या अधिकतर बच्चों और टीनएजर्स में होती है।

सर्दियों में अस्थमा के लक्षणों में बढ़ोतरी को ‘विंटर अस्थमा’ कहा जाता हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ठंडी, सूखी हवा वायुमार्ग को संकरा कर सकती है और उनमें जलन पैदा कर सकती है। इसके अलावा, घर के अंदर की एलर्जी और सांस के इन्फेक्शन (जैसे सर्दी-ज़ुकाम और फ्लू आदि) भी अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, जिससे अस्थमा अटैक आ सकता है।

अस्थमा के लक्षणः

                                                                   

अस्थमा के लक्षण प्रत्येक मरीज में अलग-अलग होते हैं, लेकिन बड़ों और किशोरों में अस्थमा के सबसे आम लक्षण इस प्रकार है, जैसे कि

  • सांस लेने में परेशानी।
  • गले में घरघराहट।
  • लगातार तेज खांसी।
  • सीने में जकड़न का महसूस होना।
  • सांस लेने में परेशानी (आराम करते समय भी सांस फूलने की समस्या)।

अस्थमा से जुड़ी खांसी कुछ इस प्रकार की हो सकती है-

1.   कुछ विशेष समय पर होने वाली जैसे, रात में, सुबह जल्दी या ठंडे मौसम में खांसी होना।

2.   कुछ विशेष एक्टिविटीज के बाद जैसे एक्सरसाइज करने के बाद होने वाली खांसी।

अस्थमा अटैक के लक्षणः

नेशनल हार्ट लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, अस्थमा अटैक के दौरान ऐसा महसूस हो सकता है कि आपको पूरी हवा नहीं मिल रही है और ऐसा लगता है जैसे आप स्ट्रॉ से सांस ले रहे हैं। ऐसा वायुमार्गों में सूजन, संकुचन और बलगम आदि के कारण होता है, जिससे आपको सांस लेना कठिन हो जाता है। इस दौरान सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट, सीने में जकड़न और खांसी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं।

गंभीर अस्थमा अटैक के दौरान, आपको और भी गंभीर लक्षण महसूस हो सकते हैं, जैसे-

  • बोलने में परेशानी होना।
  • होंठों का नीला पड़ जाना।
  • किसी रिलीवर दवा काम न करना।
  • सांस लेने की कोशिश करते समय अपने आपको बहुत थका हुआ या कमजोर महसूस करना।
  • सांस लेते समय गले या सीने में दर्द का अनुभव होना।
  • नींद में भी परेशानी होना।

                                                                                

अगर आपके लक्षण आमतौर पर हल्के या कंट्रोल में हैं, तो भी आपको अस्थमा अटैक आ सकता है। अगर आपको गंभीर अस्थमा अटैक आता है, तो इसके लिए आप तुरंत मेडिकल मदद प्राप्त करें।

अस्थमा के कारण और बचाव

अस्थमा एनवायरनमेंटल और जेनेटिक कारणों के कॉम्बिनेशन से होता है। यह उन लोगों को भी हो सकता है जिनका वजन अधिक है, जो स्मोकिंग करते हैं, या दूसरे तरह के धुएं के संपर्क में आते रहते हैं. धुएं या दूसरे पॉल्यूटेंट्स के संपर्क में आने से भी अस्थमा हो सकता है, साथ ही काम से जुड़े कारणों, जैसे खेती, हेयर ड्रेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स के संपर्क में आने से भी अस्थमा की समस्या हो सकती है।

आसान शब्दों में कहें तो, अस्थमा को बढ़ावा देने वाली चीजों में एलर्जी, धुआं, कम एक्सरसाइज और स्ट्रेस आदि शामिल हैं। अस्थमा से बचने के लिए, धूल और फफूंदी से बचें, स्मोकिंग छोड़ें और फ्लू का टीका लगवाएं। हेल्दी वजन बनाएं रखना और अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।