सावधानी रख कर अपने दिल को बनाए रखें सुरक्षित      Publish Date : 16/11/2025

          सावधानी रख कर अपने दिल को बनाए रखें सुरक्षित

                                                                                                                                                                            डॉ दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

हृदय रोग अब पुरानी पीढ़ी की समस्या नहीं है। धमनी की कठोरता और उसके चलते हार्ट-अटैक की शिकार युवा पीढ़ी, यहां तक कि किशोर भी हो रहे हैं। हार्टअटैक सेहोने वाली मौतें आए दिन चर्चा में रहती हैं। हमें समझना होगा किये समस्याएं अचानक नहीं आतीं, यह सेहत के प्रति वर्षों की हमारी लापरवाही, गलत आहार और खराब जीवनशैली का परिणाम है। हर समय फौन के नोटिफिकेशन पर नजर रखने वाली आज की पीढ़ी वर्षों-वर्ष अनियंत्रित रक्तचाप और उससे पनप रही बीमारी को लेकर बेखबर रहती है।

रक्तचाप और मधुमेह हदय ही नहीं, किडनी, लिवर जैसे कई अन्य अंगों को भी प्रभावित कर रहे होते हैं। इसलिए, सही आहार, स्वस्थ दिनचर्या के साथ-साथ निवमित स्वास्थ्य की जांच के महत्व को हमें समझना होगा।

युवा पीढ़ी में क्यों बढ़ रहे हैं दिल के दौरे:

युवाओं में हार्ट की समस्या बढ़‌ने के पीछे सबसे बड़ा कारण ही है अव्यवस्थित जीवनशैली। लोग व्यायाम, कसरत से दूर हो रहे हैं, चलने-फिरने जैसी सामान्य शारीरिक गतिविधियां भी कम हो रही हैं। लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ रहा है। यही कारण है कि 40 वर्ष की आयु में पहुंचने से पहले ही लोगों को मोटापा और मधुमेह घेर रहा है। लोगों के खानपान का तरीका बदल चुका है। भोजन में पौष्टिकता की जगह रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स, ट्रांस फैट्स, शक्कर और प्रसंस्करित खाद्य पदार्थों ने ली है।

धूमपान, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से धमनियों को नुकसान हो रहा है। ये सभी कारण मिलकर हृदय की कार्यप्रणाली को बाधित करते हैं, जिससे मौत की आशंका बढ़ती है।

अन्य कारण भी हैं जिम्मेदार:

तनाव आज की जीवनशैली का एक अवांछित हिस्सा है, जिससे लोग अच्छी और पर्याप्त नींद से वंचित हो रहे हैं। काम के लेट घंटे और अनियमित समय के चलते लोगों को शारीरिक और मानसिक आराम नहीं मिल पाता। इसका नकारात्मक असर सेहत परहो रहा है। कुछ अनुवांशिक कारणों से भी हृदय रोग की आशंका रहती है। स्टेरायड के प्रयोग, हद प्रोटीना एनर्जी ड्रिंक्स से भी आज कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।

महिलाओं को लेकर बढ़ानी होगी सतर्कता:

                                                                   

रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं को एस्ट्रोजन की सुरक्षा समाप्त हो जाती है। महिलाएं अक्सर धकान, सांस फूलने, अपय और सोने में दर्द जैसी समस्याओं को लंबे समय तक छिपाकर रखती हैं, जिससे उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पाता। इससे समस्या गंभीर, कई बार तो लाइलाज हो जाती है।

स्वस्थ हृदय के लिए ब्लडप्रेशर और डायबिटीज पर रखें नियंत्रण

उच्च रक्तचाप:

उच्च रक्तचाप अवसर बिना लक्षणों के होता है. लेकिन लगातार धमनियों को नुकसान पहुंचाता है।

कैसे नुकसान करता है:

यह रक्त वाहिनियों की दीवार को मोटा और कठोर बना देता है। यह एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों मै प्लाक जमा होना) का खतरा बढ़ाता है। हृदय की मांसपेशियों को मोटा कर देता है, जिससे हार्टफल, स्ट्रोक और किडनी की बीमारी की आशंका बढ़ती है।

भारत में स्थिति:

लगभग हर चौथा वयस्क उच्च रक्तचाप से ग्रस्त है। लगभग 60 प्रतिशत रोगियों को पता ही नहीं चलता और जिनकी पता बलता है उनमें से 15 प्रतिशत से भी कम का पर्याप्त नियंत्रण हो पाता है। तनाव, नमक से भरपूर आहार, प्रदूषण और शिथिल जीवनशैली से दूर होना होगा।

मधुमेह:

शुगर की अधिकता से रक्त वाहिनियों की भीतरी परत को नुकसान होता है और प्लाक जल्दी जमता है।

डायविटिक हिसतिपिडिमिया:

इसमे ट्राइग्लिसराइड्स अधिक और एचडीएल कम होने से हृदयाघात का खतरा बढ़ता है। मधुमेह के रोगियों में अवसर बिना दर्द वाला हृदयाघात होता है। डायबिटीज ग्रस्त लोगों में दिल के दौरे की आशंका अधिक होती है।

भारत में स्थिति:

भारत में 23 करोड़ से अधिक मधुमेह ग्रस्त लोग है। मोटापा, अस्वस्थ भोजन, शारीरिक निष्क्रियता के चलते युवा अवस्था में डायबिटीज की समस्या गंभीर रूप ले रही है।

दिल है तो कल है:

                                                                                   

इसकी देखभाल आज से शुरू करें। हृदय रोग को रोका जा सकता है यदि हम समय पर जांच कराए, जीवनगौली सुधारें और ओखिम कारकों को नियंत्रित करें। देखभाल ही असली इलाज है।

समय रहते समझें चेतावनी संकेत

  • सीने में भारीपन, सामान्य कामकाज के दौराने सांस फूलने, थकान, धड़कन तेज होने, बार-बार अपच होने पर चिकित्सक से मिलना जरूरी है।
  • आवश्यकता होने पर ईसीजी करवाएं। समय पर दवा (क्लाट-बस्टिंग ड्रग्स) या एंजियोप्लास्टी जीवन बचा सकती है।
  • जोखिम कारकों पर नजर रखने के साथ नियमित कालो-अप आवश्यक है।
  • आनुवंशिक कारणों से 20-30 की उम्र से ही स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

पहचानें हृदय रोग के जोखिम कारक

नियमित स्वास्थ्य जांच:

रक्तबाएं, शुगर, कोलेस्ट्राल, बढ़ते वजन और कमर के बढ़ते धेरै पर नजर रखें। नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराते रहे।

मेडिकल जांच:

उच्च जोखिम वालों को ईसीजी, इकोकार्डियोग्राम, ट्रेडमिल टेस्ट अवश्य कराना चाहिए।

रक्त जांच (ब्लड मार्कर, जैसे लिपिड प्रोफाइल):

एवएस-सीआरपी, लिपोप्रोटीन (ए)। फैमिली हिस्ट्री: अगर माता-पिता /भाई-बहनों में से किसी दिल के दौरे पड़ चुके है, तो अपनी भी जांच अवश्य कराएं।

बचाएंगी ये आदतें

संतुलित आहार:

ताजे फलों, सब्जियों, साबुत अनाज, मिलेट्स, सूखे मेवे, मछली आदि का सेवन करें।

व्यायाम:

प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाले व्यायाम अवश्य करें। योग/ध्यान के लिए समय निकाले।

वजन पर नियंत्रण:

अगर आपका बीएमआइ और कमर का आकार कम रहता है, तो बीमार होने की आशंका कम रहती है।

सही आदतों का विकास:

धूमपान और शराब से दूरी बनाएं। तंबाकू छोड़ने से दिल के दौरे का खतरा 50 प्रतिशत तक कम होता है।

समुदायिक स्वर पर उपाय:

जागरूकता कार्यक्रम, स्कूल कालेज में सीपीआर प्रशिक्षण, सार्वजनिक स्थानों पर पईडी की उपलब्धता आवश्यक है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।