
गुणों का भंड़ार है काला तिल Publish Date : 04/11/2025
गुणों का भंड़ार है काला तिल
हमारे रसोईघरों में विभिन्न प्रकार के ऐसे मसाले उपलब्ध रहते हैं, जो कि न केवल खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि वह हमारी सेहत का भी भरपूर समर्थन करते हैं। भारतीय रसोई में मौजूद एक ऐसा ही मसाला है काला तिल जो हमें विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करते हैं। काले तिल के औषधीय गुणों के सम्बन्ध में हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ विस्तार से बता रहें हैं-
डॉ0 शर्मा कहते हैं कि तिल, चाहे काला हो अथवा सफेद दोनों प्रकार के तिल हमारी सेहत को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं। इनमें काले तिल में एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा उपलब्ध होती है। इसके साथ ही काले तिल में एंटीबक्टीरियल एवं एंटीइम्फ्लेमेंटरी गुण भी उपलब्ध होते हैं। साथ ही यह तिल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्वि करते हैं।
काले तिल में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सेसामिनल कम्पाउण्ड भी पाया जाता है, जिसके द्वारा उच्च रक्तचाफप को नियंत्रित करने में सहायता प्राप्त होती है। काले तिल का सेवन करने से स्ट्रॉक, हार्ट अटैक आदि का खतरा काफी हद ते कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त काले तिल में पाया जाने वाला कैल्शियम जोड़ों के दर्द अथवा सूजन को कम कर हमारी अस्थियों को मजबूती प्रदान करता है। काले तिल में मैग्नीशियम के अलावा अन्य पोषक तत्व भी उपलब्ध होते हैं, जो कि हाइपर सेंसिटिव डायबिटीज के मरीजों में प्लाज्मा ग्लूकोज के स्तर को भी संतुलित करता है।

इसके अतिरिक्त, काले तिल में फाइबर उच्च मात्रा में उपलब्ध होता है जो हमारे पाचन तंत्र को सुचारू बनाकर हमारी पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है। काले तिल को सेवन करने से कब्ज एवं अपच के जैसी समस्याओं का समाधान होता है। काले तिल में मौजूद फाइबर हमारे रक्त में जमे प्युरीन को शरीर से बाहर निकालने में सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा काले तिल में पाए जाने वाले एंटी इम्फ्लेमेंटरी गुणों के चलते यूरिक एसिड के चलते होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में भी सहायता प्रदान करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि काले तिल को भूनकर लड्डू बनाकर अथवा गुड़ के साथ सेवन करना सबसे उचित मार्ग होता है।
इसके साथ ही तिल के साथ, मांस-मछली, दही या अत्याधिक तैलीय व्यंजनों का सेवन करने से बचें। ऐसा करने से त्वचा अथवा पित्त सम्बन्धित किारों की सम्भावना बढ़ जाती है।
