वायु प्रदूषण के कारण बढ़ेगी सांस की समस्या      Publish Date : 31/10/2025

               वायु प्रदूषण के कारण बढ़ेगी सांस की समस्या

                                                                                                                                                                डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

जिस प्रकार लगातार वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है अब उससे सतर्क रहने की आवश्यकता है। सांस और फेफड़ों से संबंधित समस्याओं से पीड़ितों के लिए यह जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि इन दिनों वायु प्रदूषण का स्तर आम दिनों की अपेक्षा काफी बढ़ रहा है। ठंड और धुंध के कारण भी इस समय सेहत को लेकर चुनौतियां थोड़ी अधिक होती है। हवा में फैला प्रदूषण सांस के रोगियो के लिए मुश्किल में पैदा कर देता है।

हवा की गुणवत्ता का स्तर 50 से 60 के बीच होना चाहिए, जो कि अचानक 300 से 700 तक पहुंच जाता है। ऐसे में अगर आप भी सांसों से जुड़ी किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि संभव हो तो कुछ बातों को ध्यान में रखकर आप इस बढ़ते हुए प्रदूषण से अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं-

इन बातों पर रखें ध्यान

                                                                

प्रदूषण के कारण कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, क्रोमियम और पोटेशियम आदि के सहित अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन बढ़ा है। हवा प्रदूषण होने से दम घुटना, सांस फूलना और सांस लेने में परेशानी आदि की समस्या काफी हद तक बढ़ गई है। खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और पुराने सांस रोगियों में समस्या अधिक हो सकती है इसलिए ऐसे लोगों को सलाह है कि वह प्रदूषण से अपने को बचा कर रखें।

इन दोनों दमा के अटैक के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। ऐसे में दमा के मरजों को सावधान रहने की जरूरत है। सांस के रोगी तत्काल आराम करने वाले इनहेलर की डोज बढ़ा सकते हैं। जल्दी सुबह घूमने जाने से बचें। वातावरण में वायु प्रदूषण के चलते धुंध छायी रहेगी तो सांस रोगों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे लोग अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें और गरम पेय पदार्थ जैसे सूप, गुनगुना पानी का सेवन करें और प्रोटीन युक्त डाइट लें जिससे आप स्वस्थ बने रहेंगे।

यदि आप सांस लेने की समस्या से पहले से ही पीड़ित है तो आपको घर में ही रहकर व्यायाम या वर्कआउट करना चाहिए।

आपको अपने हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए फास्ट फूड कोल्ड ड्रिंक और फ्रिज के ठंडे पानी से परहेज करें।

खाने में हरी ताजी सब्जियों फलों को अपने दैनिक आहार में शामिल करें कोशिश करें कि सुपाच्य व पौष्टिक आहार ही ग्रहण करें।

एक्सरसाइज तथा ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से फेफड़ों की कर क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। कार्डियो एक्सरसाइज भी फेफड़ों की मजबूती बढ़ाने में कारगर होती है इसलिए ऐसी एक्ससाइज करते रहें।

जो सांस के मरीज इनलर लेते हो वह डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

प्रदूषण के सम्बन्ध में इन बातों को भी जाने

                                                               

प्रदूषित हवा में पाए जाने वाले सूक्ष्म कण पीएम 2.5 श्वसन प्रक्रिया के माध्यम से फेफड़े और रक्त प्रभाव में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे शरीर के अंदर महीन नलिकाओं में सूजन हो सकती है और धीरे-धीरे क्षति होने लगती है। प्रदूषण का हृदय और किडनी पर भी बुरा असर पड़ता है इसलिए सावधान रहने की जरूरत होती है।

बीपी शुगर के मरीज सेहत बिगड़ने पर रखें ध्यान

शुगर और बीपी के मरीज परहेज न करने से यह समस्या खड़ी हो जाती है और इन दोनों का स्तर काफी बढ़ जाता है। अचानक शुगर लेवल और बीपी बढ़ने से घबराहट के साथ मरीज ओपीडी में दिखाने के लिए पहुंचते हैं। काफी मरीज को धुएं से एलर्जी की समस्या और गले में खराश हो जाती है।

बीपी बढ़ने से दिल की समस्या भी बढ़ती है तो हर समय मीठा और नमकीन के अधिक सेवन से समस्या बढ़ती है। मौसम का बदलाव के चलते प्रदूषित हवा के कारण सुबह शाम धुंध की स्थिति बनी रहती है यह स्थिति बीपी शुगर और दिल के मरीजों को परेशान कर सकती है।

ब्लड प्रेशर एवं शुगर के मरीजों में घबराहट कमजोरी चक्कर आने पेट दर्द खांसी के साथ उल्टी आने की शिकायत भी हो सकती है, तो इसे नजर नजरअंदाज ना करें और तत्काल अपने चिकित्सक को दिखाएं। प्रदूषित हवा में सांस लेने पर ऐसी ही लक्षण सामने आते हैं।

इन दिनों ब्लड प्रेशर एवं शुगर के मरीज बचाव के लिए अपनी डाइट और दवा के बारे में चिकित्सकों से सलाह अवश्य लें, क्योंकि दावाओं की डोज बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। समय से दवा लेने, मीठा, नमकीन से परहेज करें। साथ ही कोशिश करें कि ज्यादातर गुनगुने पानी का ही सेवन करें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।