
नैनो कण बैक्टीरिया को खत्म करने में कारगर Publish Date : 27/10/2025
नैनो कण बैक्टीरिया को खत्म करने में कारगर
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
इन नैनो कणों के चारों ओर बनने वाली फाइटोकालोन नामक परत, इन्हें स्थिर बनाने के साथ उनके प्रभाव को लंबे समय तक बनाएं रखती है। नैनो कणों के विभिन्न परीक्षणों में पाया गया है कि गेंदा के फूल से बने नैनो कण पारंपरिक तरीके से तैयार नैनो कणों की तुलना में लगभग दोगुनी अधिक प्रभावित होते हैं। यह नैनो कण बैक्टीरिया की कोशिका झिल्ली को भेद कर उसमें रासायनिक अणु छोड़ते हैं, जिससे बैक्टीरिया की जीवन प्रक्रिया बाधित होती है और वह समाप्त हो जाते हैं।
नैनो कण बैक्टीरिया को समाप्त करने में होते हैं सक्षम

दुनिया में एंटीबायोटिक दवाओं के बहुत से उपयोग और उनके प्रभावों में निरंतर आ रही कीम के चलते अब कुछ बैक्टीरिया कितने ताकतवर हो गए हैं कि उन पर यह दवाइयां बेसर हो जाती हैं। ऐसे बैक्टीरिया को सुपर बैक्टीरिया कहा जाता है, जो गंभीर बीमारियों को भी और भी अधिक खतरनाक बना देते हैं। इन बैक्टीरियाज पर काबू पाने के लिए ही औषधीय पौधों के अर्क से बेहद छोटे कण अर्थात नैनो कण बनाए गए हैं।
यह नैनो कण ऐसे बैक्टीरियाज को पूरी तरह से समाप्त करने में कारगर साबित होते हैं। यह स्वदेशी तकनीक न केवल सस्ती और असरदार है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित है। इस शोध का उद्देश्य ऐसे एंटीबायोटिक विरोधी बैक्टीरिया पैदा करने वाले पदार्थ बनाना है, जिनका उपयोग अस्पतालों, खाद्य उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षित रूप से किया जा सके। नीट राउरकेला के विद्यार्थियों का यह शोध अंतरराष्ट्रीय जनरल सर फेंसेस एंड इंटरफेसेस में भी प्रकाशित किया गया है।
इस तकनीक से संक्रमण नियंत्रण में होगा क्रांतिकारी बदलाव

औषधीय पौधों के अर्थ के माध्यम से एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने की यह पहल न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से अभिनव है, बल्कि सतत विकास और आत्मनिर्भर भारत की भावना की अनुरूप भी है। यह गंभीर रोगियों के उपचार में विशेष कर संक्रमण को खत्म करने में यह बेहद मददगार साबित होगी। भविष्य में इस तकनीक से बैक्टीरिया संक्रमण के नियंत्रण में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग में भी इसे कमी आएगी और इस तकनीक से रोगियों की सघन चिकित्सा में भी पर्याप्त रूप मदद मिलने के साथ ही उपचार में आने वाले खर्चे में भी प्रभावी कमी आ सकेगी।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
