
माइंडफुलनेस प्रैक्टिस के लाभ Publish Date : 07/09/2025
माइंडफुलनेस प्रैक्टिस के लाभ
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
न्यूरोसाइंस एंड बायो बिहेवियरल रिव्यू में प्रकाशित एक पेपर में उन्होंने कहा, ‘हम सभी चिंता का अनुभव करते हैं, लेकिन यह कई अलग-अलग तरीकों से सामने आती है। इस वजह से इस समस्या का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।’
सभी के लिए एक ही उपाय अपनाने के बजाय, शोधकर्ता सुझाव देते हैं कि अलग-अलग तरह की माइंडफुलनेस प्रैक्टिस चिंता के अलग-अलग प्रकारों से निपटने मेंमददगार हो सकते है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि प्रस्तावित रूपरेखा से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि चिंता से पीड़ित लोगों को अधिक सटीक उपचार कैसे दिया जा सकता है।
मनोवैज्ञानिक और शोध के सह-लेखक प्रोफेसर टॉड ब्रेवर ने कहा कि यह मान्यता बढ़ रही है कि यह प्रैक्टिस मनोविज्ञान के क्षेत्र अविश्वसनीय रूप से उपयोगी हो सकती है।
इससे लोगों को बहुत मदद मिल सकती है, लेकिन हम अभी भी पूरी तरह से इस प्रक्रिया को नहीं समझ पाए हैं जो माइंडफुलनेस के लिए लाभकारी सिद्व हो सकती है।
यहीं पर वैज्ञानिक शोध बहुत मूल्यवान हो सकता है, क्योंकि इससे हमें अधिक सटीक रूप से यह पहचानने में मदद मिलती है कि माइंडफुलनेस में कुछ खास तकनीक और ट्रेनिंग क्यों और कैसे प्रभावी हैं।
जो लोग अत्यधिक सतर्क रहते हैं और चिंता के बहुत से शारीरिक लक्षणों का अनुभव करते हैं, जैसे तेज धड़कन होना, पसीने से तर हथेलियां, सीने में जकड़न, उनको इससे काफी फायदा हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने कहा, ‘इस प्रकार की चिंता या लक्षण में ओपन मॉनिटरिंग नामक ‘माइंडफुलनेस मेडिटेशन’ फायदेमंद साबित हो सकती है।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
