मलेरियाः सुरक्षा ही बचाव      Publish Date : 11/07/2025

                     मलेरियाः सुरक्षा ही बचाव

                                                                                                                                          डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा

मलेरिया के परजीवी को केवल सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है ऐसे में अगर आपको मलेरिया है तो आपके रक्त की एक बूंद में ही सैकड़ो परजीवों को देखा जा सकता है। प्रतिवर्ष भारी संख्या में लोग मलेरिया से पीड़ित होते हैं और आंकड़ों के अनुसार दुनिया में लगभग 20 लाख लोग प्रतिवर्ष मलेरिया की चपेट में और कभी-कभी तो इससे भी अधिक संख्या हो जाती है और इनमें से कई लोगों की मृत्यु भी हो सकती है।

हालांकि यह भी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में मलेरिया का जड़ से सफाया किया जा सकता है और इसके लिए हमारे देश में प्रयास किया जा रहा है। डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर, मेडिकल ऑफिसर जिला अस्पताल मेरठ, ने बताया कि इन दिनों बारिश का मौसम (मानसून का समय) चल रहा है और बारिश के मौसम में पानी का अधिक भराव होने के कारण मच्छरों की संख्या भी काफी बढ़ जाती है। इसलिए मलेरिया होने की संभावना अधिक रहती है, उन्होंने बताया मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए अभी तक जो भी प्रयास किए गए हैं या किया जा रहे हैं वह इस रोग के प्रसार को रोकने में काफी हद तक सफल भी हुए हैं।

लेकिन इसके बावजूद अभी भी मलेरिया काफी तेजी से फैल जाता है। तभी तो भारत समेत अन्य विकासशील देशों में इस रोग पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसका कारण तब और अब के मध्य फर्क है, अतीत में एक दौर था जब मलेरिया सामान्य दवाओं के माध्यम से ही ठीक हो जाता था, लेकिन अब मलेरिया पैदा करने वाले परजीवी प्लाज्मोडियम के अंदर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाने से इस रोग की साधारण दवाएं बेकार हो जाती है।

इसलिए अब इस रोग के इलाज के लिए नई दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि अब दवाओं में एक ऐसा तत्व होता है, जिसका इस्तेमाल मलेरिया की नवीनतम दवाओं में किया जा रहा है। इस तत्व से बनी दवाओं का प्रयोग करने से मलेरिया ठीक हो जाता है और इस रोग की जटिलताएं भी काफी कम हो जाती है।

मलेरिया के प्रसार का कारण

                                                   

प्लाज्मोडियम नामक परजीवी, मादा मच्छर एनाफिलीज के शरीर के अंदर पनपता है और यह परजीवी मादा मच्छर एनाफिलीज के काटने से फैलता है। जब यह मादा मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तब इसका परजीवी रक्त प्रवाह के माध्यम से प्रभावित व्यक्ति के   यकृत में पहुंचकर अपनी संख्या को बढ़ाने लगता है। यह स्थिति लाल रक्त कोशिकाओं पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है, क्योंकि मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में पाए जाते हैं।

इसलिए यह मलेरिया से संक्रमित व्यक्ति के द्वारा ब्लड ट्रांसफ्यूजन के द्वारा दूसरे व्यक्तियों में भी सप्रेषित हो सकते हैं। इसके अलावा यह अंग प्रतिरोपण और एक ही सीरिंज का एक से अधिक व्यक्तियों में इस्तेमाल किये से भी यह रोग फैल सकता है।

मलेरिया के प्रमुख लक्षणः

  • बुखार आना।
  • ठंड महसूस होने से कांपना।
  • सरदर्द की शिकायत होना।
  • मांसपेशियों में दर्द होना।
  • जी मिचलाना, उल्टी होना या डायरिया की शिकायत हो जाना।

मलेरिया से सम्बन्धित जटिलताएं:

                                                                  

मलेरिया खून की कमी और पीलिया का कारण भी बन सकता है। रोग के गंभीर मामलों में यह किडनी फेलियर और सांस संबंधी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। मलेरिया का सुचित उपचार न होने पर पीड़ित की मौत भी संभव है।

कैसे हो मलेरिया की रोकथाम:

एनाफिलीज मच्छर सामान्यतः शाम को अंधेरा होते समय या फिर सुबह के समय काटते हैं इसलिए सोते समय मच्छरदानी लगाएं, पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहने और मच्छर भगाने वाली वस्तुओं का उपयोग करें। फिलहाल मलेरिया के उपचार के संदर्भ में दो समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ रहा है जिनमें से पहली समस्या यह है कि आमतौर पर मच्छरों पर अब कीटनाशकों वस्तुओं का कोई भी असर नहीं हो पा रहा है तो वहीं दूसरी समस्या यह है कि मलेरिया के परजीवी को बेअसर करने के लिए अब जिन दवाओं का प्रयोग किया जा रहा है उनमें से कई अब निश्चित रूप से प्रभावी साबित हो रही है।

इसलिए पहली बात तो यह है कि हमें मच्छरों को पनपने से रोकना है और वही स्वयं को मच्छरों से कटने से भी बचाना है। जब किसी व्यक्ति में मलेरिया के लक्षण प्रकट हो तब उसे शीघ्र ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। घर में रोगी को पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए। इसे साथ ही पीड़ित व्यक्ति के बुखार को उतारने के लिए डॉक्टर के परामर्श से पेरासिटामोल युक्त दवा दें और साथ ही बुखार को कम करने के लिए शरीर पर पानी की स्पंजिंग भी कर सकते हैं।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।