बागवानी में पेन्टेड बग व आरा मक्खी का प्रकोप      Publish Date : 05/06/2026

बागवानी में पेन्टेड बग व आरा मक्खी का प्रकोप

                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य

आरा मक्खी पौधों को प्रारम्भिक अवस्था में नुकसान पहुँचाती है। इस कीट की रोकथाम हेतु 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 1.5 प्रतिशत क्यूनालफास चूर्ण का भुरकाव करें।

उग्र प्रकोप के समय डाइमिथोएट घुलनशील द्रव्य की 1 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दुबारा छिड़काव करना चाहिए।

रोग प्रबंधन:

सफेद रोली, झुलसा व तुलासिता-

  • रोगों के लक्षण दिखाई देते ही मेटालैक्सिल 6 ग्राम या मैन्कोजेब 2.5 प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करें।
  • फसल के रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) या रिडोमिल एम.जेड. 72 डब्लू.पी. फफूँदनाशी का 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अन्तर पर करके सफेद रतुआ को नियंत्रित किया जा सकता है। 

पौधे और प्राणी

फसल की कटाई-

जब फसल के पत्ते झड़ जायें और फलियां पीली पड़ने लगे तो फसल काटने का उपयुक्त समय होता है।  कटाई में देरी होने पर दाने खेत में झड़ने लग जाते है। फसल में दानों का बिखराव रोकने के लिए फसल की कटाई सुबह के समय करनी चाहिए क्योंकि रात की ओस से सुबह के समय फलियाँ नम रहती है तथा बीज का बिखराव कम होता है।

उपज-

साधारणतया उपज मौसम और फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है। आधुनिक तकनीकीं से खेती करके 12 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

आर्गेनिक अनाज फल सब्जियॉ सेहत के साथ किसान की बढ़ाएंगी आयः

सोमवार को गौरी गॉव में नमामि गंगे योजनान्तर्गत द्वितीय वर्ष के जैविक मेले का आयोजन ग्रीनरी एग्रीबिजनेस प्राव. लि. द्वारा किया गया।सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक डाक्टर शिवमंगल सिंह ने नीम के प्रयोग कर जैविक कीटनाशक, जैविक खाद व अनाज भण्डारण का तरीका बताया। कृषि प्रशिक्षक रमाकांत तिवारी ने किसानों को गौ आधारित जैविक खेती की उपयोगी जानकारी दी। औषधीय व सगन्ध खेती के बारे में कृषि सलाहकार व प्रगतिशील किसान, कृषि उद्यमी अमित कुमार ने किसानों को केचुआ खाद, जड़ी बूटियों की खेती और बाजार की जानकारी दी। एस एम एस खागा संभाग विनय कुमार ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री, किसान सम्मान निधि सहित अन्य विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।

                                                                                                                                

मास्टर ट्रेनर बीरेन्द्र कुमार यादव ने किसानों को गृह वाटिका से बिषमुक्त खेती करने, फेरोमेन ट्रैप,फल मक्खी ट्रैप, ग्लू ट्रैप आदि को कम खर्च में तैयार कर उपयोग के तरीके बताए। उन्होंने किसानों को बिषमुक्त आहार उत्पादन से सेहत और अधिक कमाई का तरीका भी बताया। इस मौके पर क्लस्टर में अच्छी जैविक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया।

वहीं आलोक गौड़ व शिवसिंह सागर सिंह ने संयुक्त रूप से मंच संचालन किया। सहयोगी संस्था ग्रीनरी एग्रीबिजनेस प्राईवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर रमेश कुमार और समस्त टीम राहुल सिंह (सीनियर Executive), अनुपम चौहान, बृजेश सिंह, विकास कुमार, स्टॉल में बैठे हुए प्रगतिशील कृषकों व अन्य ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।