
कीवी फल की खेती करने की वैज्ञानिक विधि Publish Date : 03/06/2026
कीवी फल की खेती करने की वैज्ञानिक विधि
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
हमारे देश भारत में कीवी की व्यावसायिक खेती मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, केरल और उत्तर प्रदेश राज्य के भी कुछ क्षेत्रों में की जा रही है।
आजकल हमारे देश में पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बागवानी फसलों की और भी किसानों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। बागवानी की इन्हीं फसलों में कीवी फल की खेती भी शामिल है जो पिछले कुछ वर्षों से किसानों के लिए कमाई का अच्छा ऑप्शन बन कर सामने आई है। बाजार में कीवी की लगातार बढ़ती मांग और अच्छी कीमत मिलने के कारण अब कई किसान अपने अपने फार्म हाउस पर बागानों में भी कीवी की खेती कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सही तरीके और तकनीक और शुरुआती वर्ष में सही देखभाल के साथ कीवी की खेती की जाए तो यह किसानों को लंबे समय तक अच्छा मुनाफा दे सकती है। आज के अपने इस लेख में हम आपको बताने जा रहे हैं कि अपने फार्म हाउस पर आप कीवी की खेती किस प्रकार से कर अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।
देश के इन राज्यों में तेजी से बढ़ रहा है कीवी की खेती का चलन

भारत में कीवी की व्यावसायिक खेती मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय, केरल और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में की जा रही है। पहाड़ी और ठंडी जलवायु वाले क्षेत्र में इसकी खेती को अधिक सफल माना जाता है। इसके चलते ही उत्तराखंड में भी किसानों के बीच इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में किसान कलमी पौधों को लगाने में अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि इनमें अपेक्षाकृत जल्दी उत्पादन शुरू हो जाता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ग्रीन फ्लैश वैरायटी की खेती सबसे ज्यादा की जा रही है, जबकि गोल्डन और रेड फ्लैश किस्मों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
कीवी की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी
कीवी की खेती के लिए ठंडी जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है। सामान्य तौर पर समुद्र तल से 1000 से 2000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र कीवी की खेती के लिए बेहतर माने जाते हैं। कीवी के अच्छे उत्पादन के लिए पौधारोपण के समय तापमान लगभग 15 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, जबकि गर्मियों में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए। इसी प्रकार यदि मिट्टी की बात करें तो गहरी उपजाऊ और ज्यादा जल निकासी वाली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
कीवी की पौध तैयार करने का तरीका

कीवी का पौध तैयार करने के लिए बडिंग, ग्राफ्टिंग और लेयरिंग जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। हालांकि कीवी की व्यवसायिक खेती के लिए अधिकांश किसान नर्सरी से तैयार हाई क्वालिटी वाले पौधे खरीदना पसंद करते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है की अच्छी क्वालिटी वाले पौध ही फ्यूचर में अच्छा उत्पादन देने में सक्षम होते हैं।
ड्रिप सिंचाई से होता है लाभ
हालांकि कीवी की फसल को अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन शुरुआती अवस्था में नियमित सिंचाई करना आवश्यक होता है। वहीं एक्सपर्ट्स कीवर में सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सिस्टम अपनाने की सलाह देते हैं, क्योंकि इससे पानी की बचत भी होती है और पौधों को आवश्यक मात्रा में नमी मिलती रहती है। गर्मी के मौसम में समय पर सिंचाई करना जरूरी होता है। वहीं खेती में जल भराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों में सड़न और दूसरी फफूंदी जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जिससे किसान को आर्थिक हानि का समाना करना पड़ सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
