
अमरूद और नींबू में कम फूल एवं फल की समस्या Publish Date : 05/04/2026
अमरूद और नींबू में कम फूल एवं फल की समस्या
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
-
“सतर्क किसान - समृद्ध बागवानी”
“अमरूद और नींबू के पेड़ में कम फूल, कम फल? कहाँ हो रही है गलती”?
अमरूद और नींबू भारत की प्रमुख फल फसलें हैं, जिनका पोषण, औषधीय तथा आर्थिक महत्व अत्यंत अधिक है। विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों में इनकी खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। किन्तु अक्सर बागवानों को यह समस्या होती है कि पेड़ों में फूल नहीं आते या फूल आने के बाद फल नहीं बनते अथवा फल समय से पहले ही झड़ जाते हैं। यह समस्या केवल एक कारण से नहीं बल्कि कई जैविक (Biotic) और अजैविक (Abiotic) कारकों के संयुक्त प्रभाव से उत्पन्न होती है। सही कारण की पहचान और वैज्ञानिक प्रबंधन से इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव हो सकता है।
फूल एवं फल न आने के प्रमुख कारणः

1. अनुचित किस्म एवं आनुवंशिक विशेषताएँ
कुछ पारंपरिक किस्मों में प्राकृतिक रूप से कम फूलन एवं फलन की प्रवृत्ति होती है। वहीं उन्नत एवं संकर किस्में अधिक उत्पादन देने में सक्षम होती हैं। यदि स्थानीय जलवायु के अनुकूल किस्म का चयन नहीं किया गया है, तो इससे फल का उत्पादन प्रभावित होता है।
2. पौधों की आयु एवं शारीरिक अवस्था
बहुत कम उम्र (1-2 वर्ष) के पौधों में फूल नहीं आते। वहीं अधिक उम्र के पेड़ों में यदि नियमित छंटाई नहीं की गई हो, तो भी नई फलदार शाखाएँ नहीं बन पाती हैं, नतीजन इससे फलों का उत्पादन कम हो जाता है।
3. असंतुलित पोषण प्रबंधन
- नाइट्रोजन की अधिकता → अधिक पत्तियाँ, कम फूल कम संख्या में बनते हैं।
- फॉस्फोरस व पोटाश की कमी → फूल बनने में बाधा उत्पन्न होती है।
- सूक्ष्म पोषक तत्व (जिंक, बोरॉन, आयरन) आदि की कमी → फूल झड़ना, फल का खराब विकास का कारण बनती है। आजकल मृदा में सूक्ष्म तत्वों की कमी एक उभरती समस्या है, विशेषकर लगातार रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के कारण।
4. जल प्रबंधन में त्रुटियाँ
- अधिक सिंचाई → जड़ों में सड़न, फूल झड़ना आदि की समस्याएं।
- कम सिंचाई → पौधे में तनाव इससे फूलन रुक जाता है।
5. अनुचित प्रूनिंग (छंटाई)
फलदार शाखाएँ सामान्यतः नई वृद्धि होने पर बनती हैं। यदि समय पर हल्की छंटाई न की जाए, तो फूलों की संख्या कम हो जाती है।
6. कीट एवं रोगों का प्रकोप
- थ्रिप्स, माहू, मिलीबग, फल मक्खी आदि फूलों और कलियों को नुकसान पहुँचाते हैं।
- फफूंद, जीवाणु एवं वायरस जनित रोग भी फूलन की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।
7. जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरणीय तनाव
अत्यधिक तापमान, अनियमित वर्षा, सूखा या तेज हवाएँ फूलों के गिरने का प्रमुख कारण बनती हैं। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण यह समस्या और अधिक बढ़ रही है।
समस्या का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान:

1. उपयुक्त किस्म का चयन करना-
अमरूदः इलाहाबादी सफेदा, लखनऊ-49 और लालित आदि।
नींबूः कागजी नींबू, स्थानीय उन्नत किस्में. स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय से प्रमाणित पौध सामग्री लेना अधिक लाभकारी होता है।
2. संतुलित पोषण प्रबंधन (Integrated Nutrient Management):
अमरूद के लिए- (8 से 10 साल के पेड़ के लिए)
- गोबर खादः 10-15 किग्रा/पेड़/वर्ष।
- नाइट्रोजनः 200-250 ग्राम/पेड़/वर्ष।
- फॉस्फोरसः 100-150 ग्राम/पेड़/वर्ष।
- पोटाशः 200-250 ग्राम/पेड़/वर्ष।
नींबू के लिए- (8 से 10 साल के पेड़ के लिए)
- गोबर खादः 10-20 किग्रा/पेड़/वर्ष।
- नाइट्रोजनः 300-400 ग्राम/पेड़/वर्ष।
- फॉस्फोरसः 150-200 ग्राम/पेड़/वर्ष।
- पोटाशः 200-250 ग्राम/पेड़/वर्ष।
ऐसे में यदि आपका अमरूद या नींबू का पेड़ 10 वर्ष से छोटा है तो उपरोक्त डोज को 10 से भाग दे दीजिए एवं जो आयेगा उसे पेड़ की उम्र से गुणा कर दे वही उसकी उपयुक्त डोज होगी।
सूक्ष्म पोषक तत्व (Foliar Spray):
- जिंक सल्फेट 0.5 प्रतिशत तक।
- बोरॉन 0.2 प्रतिशत तक।
- आयरन (Fe & EDTA) 0.5 प्रतिशत तक।
नवीन तकनीकः
- फर्टिगेशन (ड्रिप के साथ उर्वरक) देना।
- बायोफर्टिलाइज़र (PSB, Azotobacter) का उपयोग करना।
3. उन्नत जल प्रबंधन
- ड्रिप सिंचाई अपनाएँ इससे 30-40 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है।
- फूल बनने के समय हल्की लेकिन नियमित सिंचाई करते रहें। साथ ही जल के जमाव से भी बचें।
4. वैज्ञानिक तरीके से छंटाई (Scietific Pruning Management):
- फरवरी-मार्च के महीनों में हल्की छंटाई करें।
- सूखी, रोगग्रस्त शाखाएँ हटाएँ।
- नई वृद्धि को प्रोत्साहित करें।
5. एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM):
जैविक उपाय
- नीम के तेल का 5 प्रतिशत का छिड़काव।
- ट्राइकोडर्मा से मृदा का उपचार करें।
रासायनिक उपाय (आवश्यकता अनुसार)
- इमिडाक्लोप्रिड / थायमेथोक्साम
- कॉपर ऑक्सीक्लोराइड / बोर्डा मिश्रण
फूल आने के समय अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे परागण क्रिया प्रभावित होती है।
6. परागण प्रबंधन (Pollination Management):
नवीन शोध बताते हैं कि मधुमक्खियों की उपस्थिति फलन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाग में मधुमक्खी बक्से (Bee Boxes) लगाने से 20-30 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ सकता है।
7. मल्चिंग एवं जलवायु प्रबंधन
- पुआल, सूखी पत्तियाँ या प्लास्टिक मल्च का उपयोग करना चाहिए।
- यह मृदा में नमी का उचित स्तर बनाए रखने में सहायक होता है।
- यह मृदा के तापमान को भी संतुलित बनाए रखता है।
8. मृदा परीक्षण का महत्व:
प्रत्येक 2 से 3 वर्ष में मृदा परीक्षण अवश्य कराएँ। (Soil Health Card) योजना का पूर्ण लाभ प्राप्त करें। ऐसा करने से उर्वरकों की सही मात्रा निर्धारित की जा सकती है।
और अंत में-
अमरूद और नींबू में फूल एवं फल न आने की समस्या जटिल जरूर है, लेकिन इसका समाधान पूरी तरह संभव है। सही किस्म का चयन, संतुलित पोषण, वैज्ञानिक सिंचाई, समय पर छंटाई तथा कीट-रोग प्रबंधन अपनाकर किसान उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
आज के बदलते जलवायु परिदृश्य में आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन, जैविक खेती और परागण प्रबंधन को अपनाना समय की आवश्यकता है।
यदि किसान इन वैज्ञानिक उपायों को नियमित रूप से अपनाएँ, तो न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि फलों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जिससे बाजार में अच्छा मूल्य प्राप्त होगा।
महत्वपूर्ण सलाह
अधिक जानकारी हेतु निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विशेषज्ञ से संपर्क करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
