
बोरॉन में आम की फसल और उपज के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व Publish Date : 07/02/2026
बोरॉन में आम की फसल और उपज के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर अन्य
बोरॉन एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसकी सामान्यतः मिट्टी में 0.5 से 2.0 मिलीग्राम/किलोग्राम की सांद्रता में आवश्यकता होती है। हालांकि यह नाइट्रोजन जैसे वृहद पोषक तत्वों के लिए आवश्यक मात्रा से काफी कम है, फिर भी पादप शरीरक्रिया विज्ञान में बोरॉन की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह कई प्रमुख प्रक्रियाओं में शामिल होता है। बोरॉन पौधों को कोशिका भित्ति बनाने में मदद करता है। कोशिका भित्ति का निर्माण किसी भी प्रकार की वृद्धि के लिए आवश्यक है। यदि कोशिका भित्ति बनाने की क्षमता बाधित हो जाती है, तो पौधे सामान्य रूप से विकसित होना बंद कर देते हैं। इसका पौधे के भीतर कई प्रक्रियाओं पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
नए अंकुर और जड़ें अविकसित रह जाती हैं, पत्तियों के सिरे पीले या भूरे हो जाते हैं। शर्करा का परिवहन ठीक से नहीं हो पाता और बढ़ते हुए पौधों के भागों को ऊर्जा की कमी हो जाती है। पराग नलिका ठीक से विकसित नहीं हो पाती, जिसका अर्थ है कि परागण अक्सर अधूरा रह जाता है और फल/बीज नहीं बनते। इन सभी के परिणामस्वरूप पैदावार कम हो जाती है और फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है। भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और यह हमारी कृषि अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है।

आम की अच्छी फसल पाने के लिए केवल पानी, खाद और कीटनाशक ही काफी नहीं होते – पौधों को सूक्ष्म पोषक तत्वों की भी जरूरत होती है। उन्हीं में से एक है बोरॉन (Boron)। यह एक ऐसा सूक्ष्म पोषक तत्व है जो आम की गुणवत्ता, उत्पादन और पौधों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
आम की खेती में बोरॉन की भूमिका
फूल और फल बनने में सहायक: बोरॉन, फूलों के सही विकास और परागण (pollination) में मदद करता है। इससे फल बनने की प्रक्रिया सुधरती है और फल झड़ने की समस्या कम होती है।
फल की गुणवत्ता में सुधार: बोरॉन की पर्याप्त मात्रा होने से आम का आकार बेहतर होता है, गूदा (pulp) गाढ़ा और मीठा होता है, और फल लंबे समय तक टिकते है।
कोशिका भित्ति (Cell Wall) को मजबूत बनाना: बोरॉन पौधों की कोशिकाओं को मजबूती देता है, जिससे पौधा स्वस्थ रहता है और रोगों का प्रतिरोध करता है।
फलों में फटने की समस्या से बचाव: बोरॉन की कमी से आम के फल फट सकते है या विकृत हो सकते है। इसकी पूर्ति से यह समस्या कम होती है।
बोरॉन की कमी के लक्षण
- नई पत्तियाँ छोटी और विकृत हो जाती है।
- फल छोटे रह जाते है या असामान्य आकार के होते है।
- फल झड़ने की दर बढ़ जाती है।
- फूल कम आते है या परागण सही से नहीं होता।
बोरॉन का प्रयोग कैसे करें?
स्प्रे के रूप में: मोज़ेक मैग्ना बोरॉन 1 मिली / प्रति लीटर पानी की दर से हम स्प्रे कर सकते है।
मिट्टी में: बोरॉन युक्त उर्वरक (जैसे कि बोरैक्स) को 1 से 2 किलोग्राम / प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिलाया जा सकता है।
अन्य उर्वरकों के साथ: बोरॉन को एन.पी.के. या अन्य उर्वरकों के साथ संतुलित मात्रा में देना चाहिए, ताकि उसका पूरा लाभ मिले।
ध्यान रखने योग्य बातें:
बोरॉन की अधिकता भी हानिकारक हो सकती है। इसलिए मिट्टी की जांच के बाद ही उचित मात्रा में प्रयोग करें।
वर्ष में 1 से 2 बार बोरॉन देना पर्याप्त होता है।
निष्कर्ष
यदि आप आम की फसल से अच्छी उपज और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करना चाहते है, तो बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व की अनदेखी ना करें। यह छोटा-सा पोषक तत्व आपकी फसल की सेहत और आपकी कमाई – दोनों में बड़ा फर्क ला सकता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
