फलों पपीता केला अमरूद पर बढा सर्दी का खतरा      Publish Date : 09/01/2026

       फलों: पपीता, केला, अमरूद पर बढा सर्दी का खतरा

                                                                                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में लगातार तापमान गिरने एवं पाली के कारण सदाबहार फलों खासतौर से केला, पपीता, आम, लीची, नींबू वर्गीय फल, कटहल और अमरूद की पैदावार को हानि होती है जिसमें पौधों की पत्तियां पतली नई टहनियां या शाखाएं फूल व फल मर जाते हैं।

फल वाले वृक्षों में सर्दी से हुई हानि को कैसे पहचाने

इस साल में जिन पौधों को रोपा गया है उन पर सर्दी अथवा पाले का असर अधिक हो सकता है। फलों की खेती को बचाने के लिए कई उपाय हैं जिनका यदि समय पर अपनाया जाएगा तो अपने फलों की फसल को बचाया जा सकता है। मौसम में तेजी से होने वाले बदलाव के दौरान जब तापमान में कमी आती है तो फलों के पौधों या पेड़ों की शाखा वर्तनी का केंद्रीय भाग काला होकर मर जाता है और पौधा धीरे-धीरे सूख जाता है।

बहुत साल के पौधों में यह प्रभाव सबसे अधिक दिखता है जिन पौधों को लगाया जा चुका है, उनमें भी जड़ के करीब और तने में जहां से शाखाएं फूट रही हैं वहां चल चटक जाती है।

अपने फल वाले पेड़ों एवं फसल को कैसे बचाएं

                                                    

जहां पर पाला अधिक पड़ता है वहां फलों के ऐसे पौधों का चयन करें जो पाले को सहन कर सकते हो। सदाबहार पौधों में कैनन, लोकाट, आम और अमरूद उन फलों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक सहनशील होते हैं। इसी प्रकार नींबू वर्गीय फलों में मंडारिन हुआ मीठी नंगी की फसल कम तापमान के दौरान कागजी नींबू से अधिक सहनशील होती है। पाला पड़ने के संभावित दिनों में सिंचाई करने से भूमि का तापमान 1 से 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है। इसलिए समय-समय पर उद्यान की हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए।

जब तापमान बहुत अधिक गिरने लगे तो उन दिनों में उद्यान में स्थान स्थान पर लड़कियां या घास जलाकर उसे पर जला हुआ मूवी मिल तेल डाल देते हैं। इससे बगीचे में फलों के खेत में गाढा धुआ बन जाता है जो मिट्टी द्वारा दिन में सोखे गए ताप को कम विकरित होने देता है। फलस्वरुप तापमान में कम गिरावट आती है। छोटे नवरोपित पौधों को फूस या टाट से आच्छादित करने से पाले का प्रभाव कम होता है और इस प्रकार आप अपने पौधों को सर्दी और पाले से बचा सकते हैं।

घरों की छत पर रखे पौधों को भी पाले से बचाए

गार्डनिंग के शौकीन लोगों की छतों पर इन दोनों काफी पौधे गमले में लगे हुए रखे रहते हैं। ऐसे में यदि इनको खुले में ही रखा गया तो अधिकतर पौधे मुरझा जाएंगे। ऐसे में चाहिए कि उनको नेट हाउस या छत पर ऐसी जगह पर रखें जहां पर सीधा वातावरण के संपर्क में पौधे न आए, इन बातों का ध्यान रखें।

पौधों को छायादार जगह पर रखें

पौधों को किसी कपड़े नेट या किसी अन्य चीज कर ढक कर रखें।

पौधों में नियमित हल्की मात्रा में सिंचाई करते रहें।
पौधों के आसपास या गमले में पलवार बिछाए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।