खजूर की खेतीः एक पेड़ से 200 किलोग्राम तक उत्पादन      Publish Date : 01/01/2026

         खजूर की खेतीः एक पेड़ से 200 किलोग्राम तक उत्पादन

                                                                                                                                                                 प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

वर्तमान समय में खजूर की खेती भारत के कई राज्यों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह फल न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। खजूर में कार्बोहाइड्रेट (प्राकृतिक शर्करा), आहार फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम और आयरन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से हड्डियां मजबूत, हृदय और मस्तिष्क का स्वास्थ्य भी सुधरता है।

किसान अगर खजूर की खेती के लिए सही मिट्टी, अनुकूल जलवायु और आधुनिक तकनीक अपनाते हैं, तो कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।

खेत की तैयारीः

खजूर के पौधों के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उचित मानी जाती है, जिसमें जल निकास की सुविधा अच्छी हो। इसके अलावा खेत की मिट्टी का पी.एच. स्तर 7 से 8 के बीच होना चाहिए। खेत की तैयारी करते समय किसान जैविक खाद और गोबर की खाद का ही इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पौधों की बढ़वार मजबूत होती है और वे जल्दी तैयार होकर फल देना शुरू कर देते हैं।

टिश्यू कल्चर तकनीक से जल्दी उत्पादन

                                                                   

खजूर की खेती में टिश्यू कल्चर तकनीक अपनाने से किसानों को अधिक लाभ मिलता है। इस तकनीक से पौधे चार साल के बजाय तीन साल में फल देने लगते हैं, जिससे निवेश की भरपाई जल्दी होती है और किसानों को पहले रिटर्न मिलने लगता है।

खजूर की खेती से उत्पादनः

सही देखभाल और प्रबंधन के साथ खजूर का पेड़ लंबे समय तक उत्पादन देता है।

  • पहले 10 साल में एक पेड़ से लगभग 80 किलो फल प्राप्त किया जा सकता है।
  • 15 साल के भीतर, एक पेड़ से 100 से 200 किलो तक खजूर उत्पादन संभव है।

यानी समय-समय पर पेड़ों की देखभाल करने से पैदावार और आय दोनों में बढ़ोत्तरी होती है।

देश के किन राज्यों में खजूर की फसल देगी बंपर पैदावार

गुजरातः कच्छ जिला खजूर पैदावार में अग्रणी है और यहां की खजूर को जीआई टैग भी प्राप्त है।

राजस्थानः बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और चूरू जिलों में बड़े पैमाने पर खजूर की खेती की जाती है।

पंजाब और हरियाणाः इन क्षेत्रों में भी किसान खजूर की खेती कर सकते हैं।

दक्षिण भारत और अन्य क्षेत्रः तमिलनाडु, महाराष्ट्र के सोलापुर और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में भी यह फसल किसानों को अच्छी पैदावार देती है।

खजूर की खेती से किसान की आमदनः

खजूर की खेती से किसानों की आमदनी आकर्षक होती है। एक पेड़ से करीब 20,000 से 50,000 सालाना तक की आय संभव है। एक एकड़ में (लगभग 70 पेड़), 6 लाख से 12 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है। यानी उचित देखभाल और खेती तकनीक अपनाने पर खजूर किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल बन सकती है। खजूर की खेती स्वास्थ्य और आर्थिक दोनों दृष्टियों से लाभकारी है।

सही मिट्टी, जलवायु, टिश्यू कल्चर तकनीक और जैविक खाद का इस्तेमाल करके किसान कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। देश के विभिन्न राज्यों में इस फसल की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे किसान अपनी आय को स्थायी और मजबूत बना सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।