
रिटायर्ड फौजी ने सीप से मोती उगाकर किसानों को दी नई दिशा Publish Date : 28/01/2026
रिटायर्ड फौजी ने सीप से मोती उगाकर किसानों को दी नई दिशा
प्रोफेसर आर. एस. सेगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
देश की सीमा पर सुरक्षा के बाद घर पर आए किसान ने मोती (पर्ल) उत्पादन कर किसानों को नई दिशा दी है। आलू और धान की परंपरागत खेती को छोड़कर उन्होंने नया प्रयोग किया है, जो किसानों में कौतूहल का विषय बन गया है। ओडिशा से प्रशिक्षण लेकर रिटायर्ड फौजी ने मोती उत्पादन के लिए दो तालाब बनाए हैं, जिनमें मसल्स (बीज) डाला गया है। कुछ माह बाद मोती उत्पादन शुरू हो जाएगा।
छिबरामऊ विकास क्षेत्र की ग्राम पंचायत मिघौली के मजरा मनिकापुर में रिटायर्ड फौजी हरेंद्र सिंह राजपूत ने एक बीघा खेत में कृत्रिम तालाब बनाकर मोती उत्पादन शुरू कर जिले में एक नई परंपरा का सूत्रपात किया है। बताया जा रहा है कि इसमें घाटे की संभावना कम रहती है। 24 साल तक भारतीय सेना मेंरहकर देश की रक्षा की। रिटायर होकर जब घर आए और कुछ नया करने की ठानी। फिर ओडिशा जाकर भुवनेश्वर में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेश वाटर एक्वाकल्चर (सिफा) मेंमोती उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। मनिकापुर में एक बीघा में तालाब बनवाया तो मैनपुरी के नबीगंज में प्लॉट में तालाब बनवाकर मोती उत्पादन शुरू किया।
100 से 250 रुपये में बिकता है एक मोती

एक सीप के अंदर दो मोती तैयार होते हैं, जिसमें 18 से 24 माह तक का समय लगता है। बाजार में एक मोती की कीमत 100 से 250 रुपये तक होती है। हरेंद्र के मुताबिक अभी उन्होंने गोरखपुर से लाकर चार हजार सीप तालाब में डाली है। निकट भविष्य में 20 हजार सीप से 40 हजार मोती उत्पादन का लक्ष्य है।
इस तरह हो रहा मोती का उत्पादन: किसान हरेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि तालाब में सीपों और मसल्स को डालने के बाद उनमें अमोनिया बनने की प्रक्रिया कुछ माह में ही शुरू हो जाती है। दो साल के अंदर अमोनिया ठोस होकर छह से आठ मिली की गोलाई में मोती तैयार करती है। सीप के अंदर मोती बनने के बाद उसे तालाब से बाहर निकाल कर बेच दिया जाता है। फैक्टरी के अंदर मशीनों की सहायता से चमकदार मोती निकाले जाते हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग है। उन्होंने बताया कि मोती उत्पादन को वह वृहद स्तर पर ले जाएंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
