जैविक खेती को बनाया आमदनी का जरिया      Publish Date : 19/01/2026

          जैविक खेती को बनाया आमदनी का जरिया

                                                                                                                                                     प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य

  • जैविक विधि से बाग की स्थापना की और एक पौधे से 50 कि.ग्रा. सेब का उत्पादन

  • भरतपुर के किसान अभी तक सैंकड़ों किसानों को कैमिकल मुक्त खेती का तरीका भी सिखा चुके हैं।

राजस्थान के भरतपुर जिले के नौगाया ग्राम निवासी जगन्नाथ शर्मा पेशे से एक शिक्षक हैं। श्री शर्मा ने सेवानिवृत्ति के बाद आराम करने के स्थान पर जहर मुक्त खेती के लिए अब एक अनूठी पाठशाला खोल ली है। अपने इस अभियान में वह अभी तक सैंकड़ों किसानों को जैविक खेती करना सिखा चुके हैं। वह स्वयं अपने आप भी औषधीय फसलें, मसाला फसलें और अनाज आदि के साथ फलों का उत्पादन भी जैविक तरीके से ही कर रहे हैं। वह बताते हैं कि इस जैविक खेती की यात्रा के पीछे भी एक कारण रहा है।

उनके बड़े बेटे राहुल शर्मा, का जन्म वर्ष 2016 में हुआ था, जो अब बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर है, जन्म के तीन दिन बाद पता चला कि राहुल के दिल में छेद हैं और उसकी धमनियाँ भी सिकुड़ी हुई हैं। उस समय डॉक्टरों ने बताया था कि आजकल खानपीन की चीजों से लेकर माँ के दूध तक में हानिकारक कीटनाशकों की मात्रा पाई जा रही है।

                                                    

बस इसके बाद उन्होंने जैविक खेती करने का फैंसला किया और अपने बेटे की सहायता से एक ऑर्गेनिक संस्था शुरू की। फार्म पर केंचुआ खाद और देशी गाय के गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और नीम की पत्तियों आदि की सहायमा से कीटनाशक बनाना आरम्भ कर दिया। वर्ष 2019 में पहली बार इसी जैविक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग खेतों में किया तो फसल भी अच्छी हुई और रसायन वाले कीटनाशकों पर अने वाले खर्च की भी बचत हुई। धीरे-धीरे हल्दी की खेती, मोरिंगा, ताइवान पिंक अमरूद, कसूरी मैथी, आंवला, काला गेहूँ, सोना मोती गेहूँ और सेब आदि की खेती करना भी शुरू कर दिया।

इससे उन्हें न केवल लाखों रूपए की कमाई होने लगी, बल्कि उनके परिवार के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ। वर्ष 2022 में उत्तराखण्ड़ से पदमश्री किसान हरिमन शर्मा र्मा के यहाँ से गर्म इलाकों में होने वाले सेब के उन्होंने 50 पौधे मंगवाए और वर्ष 2024 से इन पर फल आना शुरू हो गए। इस दौरान पहले वर्ष 5 कि.ग्रा. सेब प्रति पौधा प्राप्त हुए, दूसरे वर्ष 25 कि.ग्रा. और अब 50 कि.ग्रा. सेब प्रति पौधा उत्पादन हो रहा है।

                                        

इसके अतिरिक्त उनके पास अब एक एकड़ हल्दी एवं बेर आदि के पेड़ लगे हैं और मोरिंगा के भी सौ पेड़ लगे हुए हैं। पाँच प्रजाति के बेर के पौधों के बीच वह हल्दी की फसल प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार अमरूद की सात प्रजातियों के पौधों के बीच में उन्होंने जैविक खाद बनाने के लिए बेड लगाए हुए हैं। उन्होंने अपने खेत के चारो और फलदार वृक्ष लगा रखे हैं। फिलहाल वह एक एकड़ जमीन में काले और सोना मोती गेहूँ की खेती कर रहें हैं।

श्री शर्मा ने ब्रजभूमि नाम से एक नर्सरी की स्थापना भी है। इस क्षेत्र में पैदा होने वाले फल एवं सब्जियों के पौधों को वह किसानों को उपलब्ध करा रहे हैं। अब उन्होंने अपने खेत में सोलर ड्रॉयर सिस्टम भी लगवा लिया है, जहाँ वह फल एवं सब्जी को सुखाकर उनकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग भी करा रहे हैं।

इसके साथ ही वह हल्दी पाउडर, मोरिंगा पाउडर, कसूरी मैथी पाउडर और आंवला पाउडर आदि की पैकेजिंग कर वह बाजार में बेच रहे हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।