
संस्कृत में ढाल दिए कठिन विषय, पीपीटी तक में प्रयोग Publish Date : 07/12/2025
संस्कृत में ढाल दिए कठिन विषय, पीपीटी तक में प्रयोग
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गए प्रोफेसर गणेश टी. पंडित संस्कृत के दूसरे अध्यापकों की तरह नहीं हैं। उन्होंने साबित किया कि संस्कृत वैज्ञानिक भाषा है। उनके प्रयास से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी, दर्शनशास्त्र व मनोविज्ञान जैसे विषय संस्कृत में पढ़ाए जा रहे हैं। प्रो. गणेश यहीं पदस्थ हैं। उन्होंने कठिन विषयों को संस्कृत में ढाल दिया है।
वह पावरप्वाइंट प्रजेंटेशन भी संस्कृत में तैयार करते हैं। उनके दो छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा पर पीएचडी कर चुके हैं। पांच शोधार्थी अभी उनके साथ जुड़े हुए हैं।
प्रो गणेश मूल रूप से कर्नाटक के हैं। उन्होंने तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से बीएड, एमएड एवं पीएचडी की उपाधियां अर्जित कीं। वे 2005 से 2022 तक श्रृंगेरी स्थित विश्वविद्यालय में सेवारत रहे। पिछले दो वर्षों से दिल्ली में संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक परियोजनाएं व प्रकाशन विभाग) के पद पर कार्यरत हैं। उनके संपादन में दो वर्षों में 50 से अधिक ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं, जिनमें 22 ग्रंथ केवल एक वर्ष में प्रकाशित हुए।
'शिक्षण मंत्र', 'आस्ट्रेलिया आख्यायिका' तथा 'शैक्षिक गुणोत्कर्ष' इनमें प्रमुख हैं। प्रो. गणेश संस्कृत की पहली सरकारी शोधपत्रिका के संपादक हैं, जिसे उन्होंने ओपन-एक्सेस पत्रिका के रूप में स्थापित किया। वह कहते हैं कि जिस तरह योग का प्रचार प्रसार विश्व में हुआ है, उसी तर्ज पर संस्कृत को भी ले जाने की जरूरत है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
