सफलता हो तो ऐसी      Publish Date : 29/10/2025

                                सफलता हो तो ऐसी

                                                                                                                                                                                प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

‘‘राहुल गर्ग ने शून्य से शुरुआत की स्टार्टअप की और आज सफलता की नई मिसाल पेश कर बने करोड़पति’’-

राहुल गर्ग की यह कहानी लोगों को स्टार्टअप शुरू करके करोड़ों डॉलर का व्यापार करने की प्रेरणा देती है। राहुल गर्ग ने अमेरिका तक का सफर तय किया और वहां की एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी की। उसके पास पद, प्रतिष्ठा, सम्मान और अच्छी सैलरी लगभग सब कुछ था, जो कि एक अच्छा जीवन यापन करने के लिए चाहिए। ऐसे में राहुल ने चमक दमक और आराम का जीवन त्याग कर शून्य से शुरुआत करने का साहसिक किंतु जोखिम भरा फैसला लिया।

सुख सुविधाओं वाली नौकरी को छोड़कर उसने एक कारोबार शुरू किया। राहुल के सामने बड़ी प्रतिस्पर्धा, संसाधनों की कमी और जोखिम जैसी कई चुनौतियां थी। लेकिन मेहनत, धैर्य, दूरदर्शिता तथा अधिक विश्वास के साथ हर बाधा को पार करते हुए उसने महज 30 साल की उम्र में ही अपनी शख्सियत को एक नई पहचान दी।

हम बात कर रहे हैं लगभग 70 करोड डॉलर की कंपनी में डीलक्स के संस्थापक राहुल गर्ग की, जो उद्योग जगत में अपनी एक अलग पहचान बना चुके हैं। आज मैगलक्ष सिर्फ एक कंपनी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवा उद्योगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहते हैं।

कैसा रहा शुरुआती सफर

वर्ष 1981 में हरियाणा के फरीदाबाद में जन्मे राहुल गर्ग, एक मध्यवर्गीय परिवार में पले बढ़े जहां अनुशासन, ईमानदारी और कड़ी मेहनत को हमेशा प्राथमिकता दी जाती थी। बचपन से ही वह बेहद जिज्ञासु सोच के थे। घर के उपकरणों को खोलकर उनकी कार्य प्रणाली को समझना उनका रोज का शौक बन गया था। स्कूल के दिनों में ही वह बैडमिंटन और बास्केटबॉल टीम की कप्तानी करके अपने नेतृत्व कौशल का प्रमाण दे चुके थे। प्रारंभिक शिक्षा फरीदाबाद से ही पूरी करने के बाद राहुल ने आईआईटी कानपुर में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया और इसके बाद बेंगलुरु में इंटर्नशिप सिस्टम से अपने करियर की शुरुआत की।

राहुल ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस आईएसबी हैदराबाद से कोर्स भी किया और वर्ष 2010 में गूगल में शामिल हो गए। उन्होंने लगभग 5 सालों तक गूगल में नौकरी की, लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा करने का सपना था। इसी वजह से उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया कंपनी ने इसे स्वीकार तो कर लिया, लेकिन शर्त रखी कि वह किसी दूसरे संस्थान में काम नहीं कर सकते।

कंपनी को जब मिला पहला आर्डर

मोगिलक्स की सफलता की कहानी तब शुरू हुई जब उसे अपना पहला बड़ा ऑटोमोबाइल क्लाइंट मिला। इससे मोगिलक्स के प्रति लोगों का भरोसा बढा। राहुल टाटा और एक्सिस पार्टनर्स जैसे नामचीन मशीन निवेशकों ने भी निवेश जुटाने में सफल रहे। बेशक कंपनी की शुरुआत भारत में हुई थी, लेकिन अब यह एशिया, महत्वपूर्ण यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्से में भी कारोबार करती है।

एक छोटे से ऑफिस और एक सामान्य विचार से शुरू होकर आज मोगिलक्स लाखों कंपनियों की भरोसे बंद एवं सहयोगी बन चुकी है। मार्च 2025 के आंकड़ों के अनुसार मोगिलक्स का राजस्व लगभग 70 करोड डॉलर के करीब पहुंच चुका है।

पैसे की कमी और अनुभवहीनता बनी चुनौती

वर्ष 2015 में भारत वापस आकर राहुल ने मोगिलक्स की शुरुआत की पहली पीढ़ी के एंटरप्रेन्योर होने के नाते उनके पास ना कोई बड़ी टीम थी और ना ही कोई खास अनुभव था। उन्होंने बस कुछ भरोसे बंद दोस्तों, तकनीकी विशेषज्ञों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के कामकाज से वाकिफ लोगों के साथ स्टार्टअप शुरू किया। उन्हें वित्तीय सुरक्षा लंबे समय तक काम करने व जोखिम भरे फैसले लेने के तनाव का सामना भी करना पड़ा।

शुरुआत में उनके नए विचार पर किसी को भरोसा नहीं था। फैक्ट्री मालिक पुराने तरीकों से ही व्यापार करने के बड़े थे। राहुल और उनकी टीम को कई बार उनकी अस्वीकृति का सामना करना पड़ा।

लेजिस्लेटिव भी एक बड़ी चुनौती थी। कई ऐसे मौके भी आए, जब राहुल खुद ही बक्से पैक करते और डिलीवरी भी करते ताकि ग्राहकों को समय पर सामान मिल सके। पैसे की कमी एक बड़ी समस्या थी। कंपनी के शुरुआती दौर में कमाई बहुत कम थी, हालांकि राहुल अक्सर पहले कर्मचारी और आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान करते उसके बाद खुद के लिए पैसे रखते थे।

युवाओं को मिलती है सीख

  • प्रारंभ में जो रास्ते मुसीबत भरे होते हैं अक्सर वही मंजिल तक पहुंचाते हैं।
  • संघर्ष के बिना कोई भी सफलता पूरी नहीं होती।
  • जिंदगी में जो साहित्यिक कदम उठाते हैं उनकी कहानी सबसे दिलचस्प होती है।
  • कामयाबी केवल भाग से नहीं बल्कि मेहनत और जुझारुपन से मिलती है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।