हाईटेक और ऑर्गेनिक खेती के द्वारा बढ़यी आमदनी      Publish Date : 27/10/2025

          हाईटेक और ऑर्गेनिक खेती के द्वारा बढ़यी आमदनी

                                                                                                                                                                       प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

मीरजापूर के गाँव कैलाहट के रहने वाले एक किसान नागेश कुमार, जो परम्परागत लीक की खेती से हटकर खेती कर रहे हैं। खेती की इस प्रक्रिया में किसान नागेश ने ग्राफ्टेड मिर्च, रंगीन गोभी, स्वीटकॉर्न और रागी जैसी फसलों के प्रयोग से खेती को एक नया रूप प्रदान किया है। पशु-पालन और ऑगेर्निक खाद के माध्यम से खेत की मृदा की गुणवत्त्ता में सुधार किया, जिसके चलते आज वह औसत उपज के स्थान पर 2 से 3 गुणा तक अधिक आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त वह बाढ़ एवं सुखे के जैसी आपदाओं से निपटने के लिए मटर और गेहूँ की फसल को एक साथ लगाते हैं और इस विधि के माध्यम से वह कम लागत से अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहें हैं।

टिकाऊ खेती का शानदार मॉडल

                                                          

किसान नागेश कुमार, ऑर्गेनिक खाद और पशु-पालन के माध्यम से देश खेती का एक शुद्व मॉडल पेश किया है। इसके साथ ही वह गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन आदि सहायक व्यवसाय भी कर रहें हैं। किसान नागेश अपने खेतों में पशुओं के गोबर की खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट का अधिकतम प्रयोग करते हैं। खेतों में इनका प्रयोग करने से खेतों की मिट्टी की उर्वर शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है।

इसके साथ ही किसान नागेश ने करीब 50 छोटे पैमाने के किसान समूह बनाकर किसनों को जैविक और रसायन-मुक्त खेती का प्रशिक्षण भी प्रदान किया है, जिससे क्षेत्र के अन्य किसानों को भी लाभ प्राप्त हुआ और उनकी आय में बढ़ोत्तरी हुई है।

कृषि उत्पादों के मिलते हैं बाजार में अच्छे दाम

फसलों की विविधता और नई तकनीकों के माध्यम से उनका फसल उत्पाद भी उच्च गुणवत्ता से युक्त होते है, जिसके चलते उन्हें अपने उत्पाद के बाजार में अच्छे दाम भी मिलते हैं। किसान नागेश के द्वारा खेती करने के इस नए मॉडल में रंगीन गोभी, ब्रैमेटो (बैंगन और टमाटर का (ग्राफ्ट किया गया पौधा), रागी के साथ ही अन्य श्री अन्न की फसलें भी शामिल हैं।

हालांकि उनके द्वारा तैयार किया गया यह खेती का मॉडल केवल आय बढ़ाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि यह किसानों को नई तकनीक सीखने और प्राकृतिक खेती के साथ अधिक प्रयोग करने का अवसर भी प्रदान करता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।