
बसंत पंचमी पर विशेष Publish Date : 24/01/2026
बसंत पंचमी पर विशेष
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
जीवन एक पतंग
पापा, पापा पतंग उड़वा दो,
नीली, पीली सब कटवा दो।
पापा वो कितनी ऊँची,
आँखें भी मैने थोड़ी भींची।
मुझे भी ऊँची उड़वा दो,
वो काली से आगे पहुँचा दो।
पापा देखो,
सब कितनी सुन्दर, प्यारी,
इक झाड़ियों में फंसी बेचारी।
बेटा,
अच्छा अब बातों में न लगाओ,
चरखड़ी सम्भालो, पतंग उड़वाओ।
चरखड़ी ठीक से पकड़नी होगी,
हाँ, थोड़ी ढील भी देनी होगी।
बरना ध्यान भटकते ही गोता खाएगी,
तुम्हारी पीली पतंग कट जाएगी।
न-न पापा ऐसा न करना, फिर मूड खराब होगा वरना।
पापा क्या,
फिर हम हार जाएंगे,
अपनी पतंग को कैसे बचाएंगे।
पापा बोले,
बेटा आगे-पीछे का कैसा खेल,
समझो इसको जैसे रेल।
चलते जाओ छुक-छुक-छुक,
जीवना सफर में बस कभी न रूक।

प्रस्तुतिः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
