
ट्रेमर यानी हाथ, पैर या पूरे शरीर में कंपन के लिए सुरक्षित होम्योपैथिक उपचार Publish Date : 26/07/2026
ट्रेमर यानी हाथ, पैर या पूरे शरीर में कंपन के लिए सुरक्षित होम्योपैथिक उपचार
डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा
वर्तमान के आधुनिक समय में ट्रेमर की समस्या बहुत ही कॉमन समस्या होती जा रही है। यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसके लक्षण आपके हाथों से शुरू होकर शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकते हैं। इस समस्या की सबसे विशेष बात यह है कि जब आप अपने हाथों का किसी काम को करने के लिए प्रयोग करते हैं तभी आपके हाथ कांपते हैं, इसी समस्या को चिकित्सीय भाषा में असेन्शियल ट्रेमर्स कहते हैं।

होम्योपैथी चिकित्सा पद्वति में शरीर के किसी हिस्से अथवा पूरे शरीर में कंपन (ट्रेमर) की समस्या के प्रबंधन के लिए लक्षणों के आधार पर उचित दवा का उपयोग किया जा सकता है। परन्तु इस समस्या के समाधान के लिए कुछ सामान्य होम्योपैथिक दवाओं जिनमें अगेरीकस मस्कक्यूरियस (Agaricus Muscarius), जेलसेमियम (Gelsemium), ऑर्जेंटम नाइट्रिकम (Argentum Nitricum) और कॉस्टिकम (Causticum) आदि दवाओं के नाम शामिल हैं। समस्या के लिए उचित दवा का चयन कंपन की समस्या के अंतर्निहित कारण और प्रकार आदि कारकों पर निर्भर करता है।
ट्रेमर की समस्या के समाधान के लिए कुछ प्रमुख होम्योपैथिक दवाएं-

एगारिकस मस्केरियस (Agaricus Muscarius): एगारिकस मस्केरियस नामक दवा लिखते समय हाथों में कंपन, मांसपेशियों में ऐंठन और सिर के कांपने की स्थिति में उपयोगी सिद्व होती है।
लोलियम टेमुलेंटम (Lolium Temulentum): हाथों और उंगलियों के उस कंपन के लिए उपयोगी है जो किसी वस्तु को पकड़ने या लिखने जैसे दैनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है।
अम्ब्रा ग्रिसिया (Ambra Grisea): विशेष रूप से बुजुर्गों (वृद्ध रोगियों) में अधिक आयु से संबंधित हाथों और भुजाओं के कंपन के समाधान के लिए एक बहुत प्रभावी दवा है।
प्लम्बम मेटालिकम (Plumbum Metallicum): मांसपेशियों की कमजोरी और अकड़न के साथ होने वाले कंपन को कम करने में काफी मदद करती है।
जेलसेमियम (Gelsemium): होम्योपैथी में जेलसेमियम नामक दवा का उपयोग अक्सर मांसपेशियों की कमजोरी, अत्यधिक घबराहट, कमजोरी, आलस और मांसपेशियों के ढीलेपन के कारण होने वाले कंपन के समाधान के लिए किया जाता है।
अर्जेंटम नाइट्रिकम (Argentum Nitricum): होम्योपैथी की यह दवा अत्यधिक तनाव, हड़बड़ाहट और मांसपेशियों की कमजोरी के कारण होने वाले कंपन का बेहतर ढंग से उपचार करती है।
कॉस्टिकम (Causticum): यह दवा पार्किंसंस या मांसपेशियों की अकड़न से जुड़े दीर्घकालिक कंपनों का दुष्प्रभाव रहित उपचार करने के लिए जानी जाती है।
अपेक्षित सावधानियाँ: ट्रेमर कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों (जैसे पार्किंसंस रोग या मल्टीपल स्केलेरोसिस) आदि से सम्बन्धित लक्षण भी हो सकते हैं। किसी भी समस्या के लिए होम्योपैथिक उपचार शुरू करने से पहले किसी योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श करना अनिवार्य होता है, वह आपके लक्षणों का सही मूल्यांकन आपके सर्वाधिक उपयुक्त दवा का चयन कर आपको प्रभावी उपचार प्रदान कर सकते हैं।

लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।
डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।
