स्पर्माटोरिया (धातु रोग) का होम्योपैथिक उपचार      Publish Date : 02/07/2026

स्पर्माटोरिया (धातु रोग) का होम्योपैथिक उपचा

                                                                                                 डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा

स्पर्माटोरिया (Spermatorrhea), जिसे सामान्य बोलचाल में धातु रोग या धात गिरना कहा जाता है, पुरुषों में बिना किसी यौन उत्तेजना या इच्छा के अनैच्छिक रूप से वीर्य का रिसाव होना है। होम्योपैथी में इस समस्या का उपचार समस्या से प्रभावित व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक लक्षणों (Constitutional Treatment) के आधार पर किया जाता है।

आज के हमारे प्रस्तुत लेख में इस समस्या के लिए सबसे अधिक प्रभावी और और इस समस्या के समाधान के लिए कुछ मुख्य होम्योपैथिक दवाओं की सूची दी जा रही है:-

                                  

समस्या के समाधान के लिए मुख्य होम्योपैथिक दवाएं (Key Homeopathic Remedies):

Selenium (सेलेनियम): यह अनैच्छिक वीर्यपात के लिए होम्योपैथी की सबसे प्रमुख दवा मानी जाती है। यदि मल त्याग करते समय, पेशाब के दौरान या सोते समय अपने आप वीर्य निकल जाता है, और व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करता है, तो यह अत्यधिक असरदार काम करती है।

Acid Phos/Phosphoric Acid (फॉस्फोरिक एसिड): अत्यधिक वीर्यपात के कारण जब शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी आ जाती है, आंखें धंस जाती हैं, याददाश्त कमजोर होने लगती है और चेहरे की रौनक चली जाती है, तब होम्योपैथी की इस दवा का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

Agnus Castus (एग्नस कास्टस): होम्योपैथी की यह दवा उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनमें अत्यधिक यौन गतिविधियों या गलत आदतों के कारण जननांगों में ढीलापन (शीथिलता) आ जाता है और उनकी यौन इच्छा पूरी तरह से खत्म हो जाती है।

Staphysagria (स्टैफिसाग्रिया): मानसिक रूप से लगातार कामुक विचारों में डूबे रहने या हस्तमैथुन की अत्यधिक आदत के कारण होने वाले वीर्य रिसाव और उसके बाद पैदा होने वाले पश्चाताप या हीनभावना के मामलों में होम्योपैथी की यह दवा बेहद असरदार है।

Caladium (कैलेडियम): यदि प्रभावित व्यक्ति के लिंग में तनाव (erection) बिल्कुल न हो, लेकिन सोते समय बिना किसी सपने के ही अनैच्छिक रूप से वीर्य निकल जाता हो, तो होम्योपैथी की यह दवा ऐसे लोगों को दवा बहुत अधिक लाभ प्रदान करती है।

Nux Vomica (नक्स वोमिका): ऐसे लोग जो शारीरिक श्रम कम करते हैं, मसालेदार भोजन या शराब का अधिक सेवन करते हैं, और जिन्हें कब्ज के साथ सुबह के समय वीर्यपात की समस्या होती है, ऐसे लोगों के लिए होम्योपैथी की यह दवाई अति उत्तम मानी जाती है।

जीवनशैली और आहार में जरूरी बदलाव

                                

होम्योपैथिक उपचार के साथ-साथ इन आदतों को अपनाने से समस्या से शीघ्र छुटकारा मिलता है:

  • सोने से पहले की आदतें: रात को सोने से ठीक पहले पानी का अधिक सेवन करने से बचें और हमेशा पेशाब करके ही सोएं ताकि प्रोस्टेट ग्रंथि पर दबाव न पड़े।
  • आहार: अत्यधिक मिर्च-मसालेदार, तला-भुना भोजन, फास्ट फूड और शराब/कैफीन के सेवन से पूरी तरह से परहेज करें।
  • मानसिक स्वास्थ्य: कामुक विचारों, अश्लील साहित्य या फिल्मों से दूरी बनाएं और मन को शांत रखने के लिए नियमित रूप से योग व ध्यान करें।
  • व्यायाम: पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises) या हल्की सैर करें।

महत्वपूर्ण सुझाव: होम्योपैथी में दवाओं की पोटेंसी (जैसे 30C, 200C या मदर टिंचर) और खुराक पूरी तरह से मरीज के व्यक्तिगत लक्षणों पर निर्भर करती है। इसलिए, स्वयं से किसी भी दवा दवा का सेवन करने से पहले किसी कुशल होम्योपैथिक डॉक्टर (Homeopathic Physician) से परामर्श आवश्यक रूप से करना चाहिए, क्योंकि वह आपके लक्षणों के अनुसार आपके लिए सर्वश्रेष्ठ दवाई का चयन करेंगे।

लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।

डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।