
मोटापे से उत्पन्न बाँझपन की समस्या का होम्योपैथिक समाधान Publish Date : 27/04/2026
मोटापे से उत्पन्न बाँझपन की समस्या का होम्योपैथिक समाधान
डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा
मोटापा (Obesity) के कारण से होने वाली बांझपन (Infertility) की समस्या के लिए होम्योपैथी उपचार पद्वति में “संवैधानिक उपचार” (Constitutional Treatment) प्रणाली को प्राथमिकता प्रदान की जाती है, जिसमें व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर उपयुक्त दवा का चुनाव किया जाता है।
वर्तमान समय में हमारे समाज के अन्दर मोटापा एक महामारी के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। मोटापा अनेक शारीरिक व्याधियों का जन्मदाता माना जाता है। इसी मोटापे के चलते आज के समय में महिला एवं पुरूष दोनों ही लिंगों में बांझपन की समस्या एक वैश्विक परेशानी बनकर सामने आई है और दुनिया में बहुत से जोड़े संतान के सुख से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में होम्योपैथी चिकित्सा पद्वति एक वरदान के रूप में काम कर सकती है और संतान सुख से वंचित जोड़ों के लिए एक आशा का संचार करती है।
इस प्रकार से होम्योपैथी मोटापे और बांझपन दोनों ही समस्याओं को लक्षित का एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है। इस प्रकार से मोटापे और बांझपन दोनों ही समस्याओं को लक्षित करने वाली कुछ प्रमुख होम्योपैथिक दवाएं इस प्रकार से हो सकती हैं, हालांकि, सबसे अधिक उपयुक्त दवाई का चयन मरीज का विस्तृत अध्ययन करने बाद ही सम्भव हो सकता है।
इस समस्या के लिए सबसे अधिक प्रयोग की जाने वाली कुछ दवाओं का विवरण इस प्रकार से हो सकता हैः-

कैल्केरिया कार्बोनिका (Calcarea Carbonica): होम्योपैथी की यह दवा ऐसी महिलाओं के लिए सबसे प्रभावी मानी जाती है जिनका वजन अधिक है, मेटाबॉलिज्म धीमा है, और जिन्हें पीरियड्स के दौरान भारी रक्तस्राव या पीरियड्स में देरी की समस्या होती है। होम्योपैथी की यह दवा हार्मोनल असंतुलन को संतुलित करने में भी सहायक सिद्व होती है।
फाइटोलैक्का बेरी (Phytolacca Berry): होम्योपैथी की इस दवाई का मुख्य रूप से शरीर की अतिरिक्त वसा को कम करने और चयापचय को नियंत्रित करने के लिए बहुधा प्रयोग किया जाता है।
नेट्रम म्यूर (Natrum Mur): यदि मरीज के वजन का बढ़ना उसके भावनात्मक तनाव या अवसाद (Depression) आदि के कारण से होता है, तो मरीज को यह दवा दी जाती है। यह दवाई मासिक धर्म की अनियमितताओं और तनाव संबंधी बांझपन का उपचार करने में भी उपयोगी सिद्व होती है।
पल्सेटिला निग्रिकेन्स (Pulsatilla Nigricans): होम्योपैथी की यह दवाई ऐसी महिलाओं के लिए अनुशंसित की जाती है जिनके पीरियड्स कम या देरी से आते हैं और जिनका स्वभाव काफी कोमल या संवेदनशील होता है।
सीपिया (Sepia): किसी महिला मरीज को यह दवा तब दी जाती है जब उस महिला मरीज में बांझपन के साथ-साथ हार्मोनल असंतुलन, यौन इच्छा में कमी, और मासिक धर्म में अनियमितता जैसे लक्षण भी होते हैं।
थायरॉइडिनम (Thyroidinum): यदि आपके वजन के बढ़ने का कारण थायराइड की समस्या (Hypothyroidism) है, तो यह दवा आपके चयापचय को सुचारू करने में आपकी बहुत अधिक मदद करती है।
फ्यूकस वेसिकुलोसस (Fucus Vesiculosus): यह दवाई थायराइड संबंधी मोटापे को नियंत्रित करने और शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में बहुत अधिक सहायक सिद्व होती है।

लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।
डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।
