प्रोटेस्ट सम्बन्धी समस्याओं के लिए प्रभावी होम्योपैथिक उपचार      Publish Date : 29/03/2026

प्रोटेस्ट सम्बन्धी समस्याओं के लिए प्रभावी होम्योपैथिक उपचार

                                                                                                    डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा

एक सामान्य एवं स्वस्थ प्रोटेस्ट ग्रन्थि का आकार लगभग अखरोट के बराबर होता है, जिसका वजन लगभग 2 से 25 ग्राम होता है, जबकि यह 15-40 ग्राम तक सामान्य माना जाता है। इस ग्रन्थि का आकार लगभग 4 X 3 X 3 सेंमी (लम्बाई X मोटाई X ऊचाई) तक का होता है। व्यक्ति की आयु बढ़ने के साथ ही धीरे-धीरे इसके आकार में भी वृद्वि होती जाती है, जिसे सामान्य माना जाता है।

प्रोस्टेट के आकार से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्यः

आकारः युवा वयस्कों में यह वजन में लगभग 15-20 ग्राम का होता है, जो 30-45 वर्ष की उम्र तक 20 ग्राम पर स्थिर बना रहता है।

वृद्धिः बढ़ती उम्र (विशेषकर 50 वर्ष की आयु के बाद) में प्रोस्टेट का आकार बढ़ सकता है, जो सौम्य प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया BPH (Benign Prostatic Hyperplasia) का संकेत हो सकता है।

बढ़ा हुआ आकारः यदि प्रोस्टेट का वजन 80 ग्राम से अधिक हो जाता है, तो सामान्य से तीन गुना से भी अधिक बड़ी ग्रंथि मानी जाती है।

लक्षणः बढ़ी हुई प्रोस्टेट (बड़ी प्रोस्टेट) व्यक्ति के पेशाब के मार्ग को अवरुद्ध कर सकती है, जिससे पेशाब करने के दौरान कुछ कठिनाई हो सकती है।

  • PSA की नॉर्मल वैल्यू 4.0 mg/ml से कम होती है।

नोटः यदि आपको पेशाब में कोई समस्या (जैसे- बार-बार पेशाब आना या रुक-रुक कर आना) महसूस हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।

बढ़े हुए प्रोस्टेट के लिए श्रेष्ठ हैं होम्योपैथिक उपचारः

जब प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार सौम्य रूप से बढ़ जाता है, तो इससे मूत्रमार्ग पर दबाव पड़ता है और मूत्र प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है, तो चिकित्सकीय भाषा में इसे सौम्य प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया (बीपीएच) कहा जाता है। प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से पेशाब संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिनमें पेशाब करने में कठिनाई, बार-बार पेशाब आना और पेशाब की धार का कमजोर होना आदि शामिल हैं। 30 सीसी से अधिक प्रोस्टेट ग्रंथि आमतौर पर सौम्य प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया (बीपीएच) का संकेत देती है।

होम्योपैथी में एक गैर-आक्रामक और समग्र उपचार द्वारा इसका उवित प्रबंधन करने में सहायक है। होम्योपैथिक दवाएं न केवल प्रोस्टेट ग्रंथि के आकार में और वृद्धि को रोकती हैं, बल्कि लक्षणों को भी अच्छी तरह से नियंत्रित करती हैं। यदि निर्धारित उपचार विधि का पालन किया जाए, तो बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने की तीव्र इच्छा, पेशाब की धार का रुकना, पेशाब करने में जोर लगाना और असंतोषजनक पेशाब जैसे लक्षणों में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। शीघ्र उपचार से सामान्य मूत्र प्रवाह बहाल करने में मदद मिलती है, साथ ही प्रोस्टेट का आकार भी कम हो जाता है और भविष्य में होने वाली जटिलताओं को भी सौम्य तरीके से रोका जा सकता है।

पारंपरिक बनाम होम्योपैथी उपचारः

पारंपरिक उपचार में फिनास्टेराइड और टैम्सुलोसिन जैसी दवाएँ शामिल होती हैं, जो लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। हालाँकि, लंबे समय तक इन दवाओं का उपयोग करने से चक्कर आना, वीर्य की मात्रा कम होना, स्खलन में समस्या, यौन कमजोरी (इरेक्टाइल डिस्फंक्शन) और कामेच्छा में कमी जैसे दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। इन दवाओं का लंबे समय तक उपयोग करने से व्यक्ति इन पर निर्भर हो सकता है और जब इन दवाओं का सेवन बंद किया जाता है, तो लक्षण वापस आ जाते हैं जो कभी-कभी तो पहले से भी ज़्यादा तीव्रता के साथ वापस आते है।

इसके विपरीत, होम्योपैथी में हानिरहित, सौम्य, गैर-विषाक्त और आदत न डालने वाली दवाओं का उपयोग किया जाता है, जो बिना किसी दुष्प्रभाव के BPH का प्राकृतिक रूप से उपचार करती हैं। वांछित परिणाम प्राप्त होने के बाद, प्रभावित व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होम्योपैथिक दवाओं का सेवन करना बंद कर सकता है, हालांकि, ऐसा केवल तभी किया जाना चाहिए जब कोई योग्य होम्योपैथ ऐसा करने की सलाह दे।

बढ़े हुए प्रोस्टेट के लक्षणः

  • बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना, विशेष रूप से रात के समय में।
  • पेशाब करने की बहुत तेज़ ज़रूरत महसूस होना।
  • पेशाब शुरू करते समय ज़ोर लगाना पड़ता है।
  • पेशाब की धार कमज़ोर हो जाना।
  • पेशाब करने के बाद भी पेशाब की बूंदों का टपकना।
  • पेशाब का रुक-रुक कर आना।
  • मूत्राशय (Bladder) का पूरी तरह खाली न होने का अहसास होना।
  • यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) होने पर, पेशाब करते समय दर्द और जलन होना।

प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया के कारण

बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया (BPH) का कोई सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है।

उम्र से संबंधितः पुरूषों में 50 से 60 वर्ष की उम्र के बीच प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने की संभावना 50 प्रतिशत से भी अधिक होती है।

उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों के हार्मोन में असंतुलनः पुरुष टेस्टोस्टेरोन (पुरुष हार्मोन) और थोड़ी मात्रा में एस्ट्रोजन (महिला हार्मोन) बनाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ, खून में सक्रिय टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है, जिससे एस्ट्रोजन का स्तर अपेक्षाकृत कुछ अधिक रह जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, यह हार्मोनल बदलाव कुछ खास पदार्थों की गतिविधि को बढ़ाकर प्रोस्टेट कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा भी दे सकते हैं। एक और सिद्धांत के अनुसार, डाइहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (DHT) का बढ़ा हुआ स्तर प्रोस्टेट कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा दे सकता है।

पारिवारिक इतिहासः जिन पुरुषों के परिवार में BPH का इतिहास रहा हो (जैसे पिता या भाई को यह समस्या रही हो), उन्हें बढ़े हुए प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा अधिक होता है।

मोटापाः मोटापे से BPH का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

कुछ खास चिकित्सीय स्थितियां: जैसे मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोग जैसी स्थितियां BPH का खतरा बढ़ा सकती हैं।

BPH की जटिलताएं-

BPH के कुछ मामलों में कुछ जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, हालांकि, प्रत्येक मामले में ऐसा नहीं होता। प्रोटेस्ट से सम्बन्धित जटिलताएं कुछ इस प्रकार हैं:

1. पेशाब रुक जाना (Urine Retention) – BPH के कुछ मामलों में, पेशाब रुकने की समस्या हो सकती है। पेशाब का पूरी तरह रुक जाना (Acute Urinary Retention) एक चिकित्सीय आपात स्थिति है। ऐसे मामलों में पेशाब निकालने के लिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार कैथीटेराइजेशन या सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है।

2. UTI (यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) - BPH के मामलों में, मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने के कारण UTI होने की संभावना बढ़ जाती है।

3. मूत्राशय में पथरी (Bladder Stones)

4. मूत्राशय या गुर्दे को नुकसान

यह BPH है, इसकी पुष्टि कैसे करें?

BPH का क्लिनिकल डायग्नोसिस लक्षणों और डिजिटल रेक्टल एग्ज़ामिनेशन (इसमें डॉक्टर प्रोस्टेट ग्लैंड का साइज़ चेक करने के लिए रेक्टम में उंगली डालते हैं) के आधार पर किया जा सकता है। बढ़े हुए प्रोस्टेट की पुष्टि करने के लिए सबसे आम डायग्नोस्टिक टेस्ट प्रोस्टेट ग्लैंड का अल्ट्रासाउंड है। इसके बाद PSA (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) टेस्ट की सलाह दी जाती है। PSA एक ब्लड टेस्ट है जिसका उपयोग प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए एक टूल के तौर पर किया जाता है। PSA की नॉर्मल वैल्यू 4.0 mg/ml से कम होती है। अगर PSA की वैल्यू नॉर्मल से अधिक है, तो इसके कारण का पता लगाने के लिए और टेस्ट की आवश्यकता होती है।

होम्योपैथी को क्यों चुनें?

सौम्य, आदत न डालने वाली दवाएँ: होम्योपैथिक दवाएँ प्राकृतिक पदार्थों से प्राप्त की जाती हैं और पारंपरिक दवाओं के विपरीत, ये आदत नहीं डालतीं। एक बार जब वांछित परिणाम प्राप्त हो जाते हैं, तो चिकित्सक के मार्गदर्शन में दवाओं का सेवन धीरे-धीरे बंद किया जा सकता है।

स्थायी प्रभावशीलताः चूँकि होम्योपैथिक उपचार पद्धति का उद्देश्य BPH के मूल कारण का प्रबन्धन करना होता है, इसलिए यह लंबे समय में रोग की पुनरावृत्ति और किसी भी प्रकार की जटिलता को रोकने में मदद करती है।

बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया (BPH) के लिए कुछ शीर्ष होम्योपैथिक दवाएँ:

                              

BPH के उपचार के लिए कुछ सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवाएँ इस प्रकार से हैं:- सबल सेरुलाटा, कोनियम मैकुलेटम, लाइकोपोडियम क्लैवेटम, बैराइटा कार्ब, चिमाफिला अम्बेलाटा, स्टैफिसैग्रिया, थूजा ऑक्सीडेंटलिस, क्लेमाटिस इरेक्टा और सारसापरिला ऑफिसिनैलिस आदि।

सबल सेरुलाटा - BPH के लिए सबसे अच्छी दवा

सबल सेरुलाटा, बिनाइन प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया (BPH) के उपचार हेतु होम्योपैथी की सबसे अच्छी होम्योपैथिक दवाओं में से एक है। होम्योपैथी की इस दवा को ’सॉ पाल्मेटो’(Saw Palmetto) पौधे की ताज़ी बेरीज़ से बनाया जाता है, इसलिए यह एक प्राकृतिक उपचार है। इसका उपयोग बढ़े हुए प्रोस्टेट के लगभग सभी लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, और BPH के मामलों में इसके बहुत अच्छे क्लिनिकल परिणाम भी देखने को मिलते हैं। पेशाब करने की बार-बार इच्छा का होना (विशेष रूप रात के समय), पेशाब की धार शुरू करने में दिक्कत, रुक-रुककर पेशाब आना, और पेशाब का टपकना (धीरे-धीरे, रुक-रुककर बूंदों के रूप में आना)- जैसे लक्षणों को इस दवा की मदद से बहुत अच्छे से नियंत्रित किया जा सकता है। प्रोस्टेटिक हाइपरट्रॉफी के साथ सिस्टाइटिस (मूत्राशय की सूजन) होने पर भी इस दवा का उपयोग करने की सलाह दी जाती है और आखिर में, सबल सेरुलाटा बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण होने वाले इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (यौन संबंध बनाने के लिए ज़रूरी कड़ापन हासिल न कर पाना या उसे बनाए न रख पाना) का भी प्रभावी ढंग से उपचार करती है।

सबल सेरुलाटा का उपयोग कब करें?

पेशाब करने की आवृत्ति (बारंबारता) का बढ़ना और पेशाब की धार शुरू करने में दिक्कत होना- ये सबल सेरुलाटा के उपयोग के मुख्य लक्षण हैं।

सबल सेरुलाटा का प्रयोग कैसे करें?

जब इसे ’मदर टिंचर’ (Q) के रूप में उपयोग किया जाता है, तो इसके सबसे अच्छे नतीजे मिलते हैं।

लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, दिन में दो या तीन बार, आधे कप पानी में 8 से 10 बूंदें लें।

कोनियम मैकुलेटम (Conium Maculatum) – BPH में पेशाब के अनियमित बहाव के लिए

कोनियम मैकुलेटम बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण पेशाब के रुक-रुककर आने की समस्या में एक बहुत ही असरदार दवा है। पेशाब पूरी तरह से बाहर निकलने से पहले कई बार शुरू होता है और फिर रुक जाता है। पेशाब करने के बाद, मूत्रमार्ग (urethra) में जलन या चुभन जैसा महसूस हो सकता है। पेशाब टपकने (Dribbling) की समस्या भी हो सकती है।

कोनियम मैकुलेटम का उपयोग कब करें?

जब बढ़े हुए प्रोस्टेट के कारण पेशाब का बहाव रुक-रुककर आता हो।

कोनियम मैकुलेटम का उपयोग कैसे करें?

अच्छे नतीजों के लिए, 30C पोटेंसी दिन में दो बार लें। लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, दवा की पोटेंसी बढ़ाई जा सकती है।

लाइकोपोडियम क्लैवेटम (Lycopodium Clavatum) – रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या के लिए

लाइकोपोडियम क्लैवेटम एक अच्छी होम्योपैथिक दवा है जिसे ’क्लब मॉस’(Club Moss) पौधे से तैयार किया जाता है। BPH के कारण बार-बार पेशाब आने की समस्या में यह दवा बहुत ही चमत्कारिक रूप से काम करती है। पेशाब शुरू होने में समय लगता है और काफी ज़ोर लगाना पड़ता है। प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं के कारण होने वाले इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) को ठीक करने में भी लाइकोपोडियम एक बहुत ही लाभकारी दवा है।

लाइकोपोडियम क्लैवेटम का उपयोग कब करें?

BPH के मामलों में, जब बार-बार पेशाब आता हो (खासकर रात के समय) और पेशाब शुरू करने में मुश्किल होती हो।

प्रोस्टेट बढ़ने के कारण होने वाले इरेक्टाइल डिस्फंक्शन को ठीक करने के लिए भी इस दवा के सेवन करने की सलाह दी जाती है।

लाइकोपोडियम क्लैवेटम का प्रयोग कैसे करें?

Lycopodium 30C पोटेंसी दिन में एक या दो बार ली जा सकती है।

यह दवा न्यून और उच्च, दोनों तरह की पोटेंसी में ही अच्छा काम करती है। हालांकि शुरुआती दिनों में कम पोटेंसी से ही इसकी शुरूआत करनी चाहिए।

Baryta Carb – पेशाब करने की अचानक तेज़ इच्छा होने पर कारगर

यह दवा पेशाब करने की अचानक तेज़ इच्छा होने की समस्या का असरदार इलाज करती है, जो BPH में एक आम समस्या है। जिन पुरुषों को इस दवा की ज़रूरत होती है, उन्हें अक्सर तुरंत पेशाब करने की ज़रूरत महसूस होती है और वे इसे कंट्रोल नहीं कर पाते। पेशाब करते समय जलन और पेशाब करने के बाद बूंद-बूंद टपकना (Dribbling) भी हो सकता है, जिससे पेशाब करने की फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है।

Baryta Carb का प्रयोग कब करें?

जब मरीज़ को अचानक पेशाब करने की तेज़ इच्छा हो और उसे तुरंत पेशाब करने के लिए जाने की आवश्यकता महसूस होती है।

Baryta Carb का उपयोग कैसे करें?

Baryta Carb 30C पोटेंसी में सबसे अधिक प्रभावकारी होती है।

पेशाब करने की इच्छा को कंट्रोल करने के लिए इसे दिन में दो बार दिया जा सकता है।

पेशाब करने की अचानक तेज़ इच्छा होने पर इसे मदर टिंचर के रूप में लेना सबसे अच्छा माना जाता है।

इसकी सुझाई गई खुराक हैः आधे कप पानी में 5 से 7 बूंदें, दिन में दो बार।

Chimaphila Umbellata – जब पेशाब शुरू करने में दिक्कत हो

Chimaphila Umbellata तब दी जाती है, जब किसी व्यक्ति को पेशाब का बहाव शुरू करने के लिए बहुत ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है। गंभीर मामलों में, पेशाब आगे की ओर झुककर ज़ोर लगाकर किया जाता है। पेशाब कम मात्रा में होता है और उसमें से बदबू भी आ सकती है। पेशाब करते समय जलन (तेज़ जलन) भी हो सकती है।

Chimaphila Umbellata का उपयोग कब करें?

BPH के मामलों में पेशाब शुरू करने के लिए बहुत ज़्यादा ज़ोर लगाना पड़े।

Chimaphila Umbellata का उपयोग कैसे करें?

Chimaphila Umbellata 30CH पोटेंसी दिन में एक या दो बार ली जा सकती है।

यह दवा न्यून और उच्च, दोनों तरह की पोटेंसी में अच्छा काम करती है। हालांकि, शुरुआती दिनों में कम पोटेंसी से शुरू करें।

स्टैफिसैग्रिया - मूत्राशय (Bladder) पूरी तरह खाली न होने पर

स्टैफिसैग्रिया मूत्राशय के पूरी तरह खाली न होने की समस्या को ठीक करने के लिए एक बहुत ही असरदार दवा है। इसके मरीज को ऐसा महसूस होता है कि पेशाब की नली से पेशाब बूंद-बूंद करके बाहर निकल रहा है। मूत्राशय पर दबाव महसूस होता है और बार-बार पेशाब करने की तीव्र इच्छा होती है। पेशाब करते समय पेशाब की नली में जलन भी महसूस हो सकती है। हैरानी की बात यह है कि इसके बावजूद पेशाब की एक भी बूंद बाहर नहीं आ पाती है।

स्टैफिसैग्रिया का उपयोग कब करें?

पेशाब करने की आवृत्ति (Frequency) का बढ़ जाना और पेशाब की धार शुरू करने में कठिनाई होना, स्टैफिसैग्रिया का उपयोग करने के मुख्य लक्षण हैं।

स्टैफिसैग्रिया का उपयोग कैसे करें?

मदर टिंचर (Q) के रूप में उपयोग करने पर यह सबसे अच्छे नतीजे देती है।

लक्षणों की गंभीरता के आधार पर, आधे कप पानी में 8 से 10 बूंदें, दिन में दो या तीन बार लें।

Thuja Occidentalis – BPH में पेशाब की कमज़ोर और दो-मुँही धार के लिए

Thuja occidentalis, BPH के उन लक्षणों को ठीक करने के लिए सबसे असरदार दवा है, जिनमें पेशाब की धार कमज़ोर, बँटी हुई या दो-मुँही होती है। इसके साथ ही, पेशाब करने के बाद गुदगुदी जैसा एहसास भी होता है। पेशाब बार-बार आता है और इसके साथ तेज़ दर्द भी होता है। पेशाब करने की इच्छा अचानक और बहुत ज़ोर से हो सकती है, जिसे रोकना मुश्किल होता है। पेशाब से बदबू आती है और वह धुंधला या मटमैला हो जाता है।

Thuja Occidentalis का उपयोग कब करें?

BPH के उन मामलों में यह सबसे अच्छी दवा है, जिनमें पेशाब की धार कमज़ोर, बँटी हुई और दो-मुँही होती है।

पेशाब करने के बाद तेज़, चुभने वाला दर्द होता है, और साथ ही पेशाब करने की अचानक और बेकाबू इच्छा होती है।

Thuja Occidentalis का उपयोग कैसे करें?

यह 30C पोटेंसी में बहुत अच्छा काम करती है।

अच्छे नतीजों के लिए इसे दिन में दो बार लिया जा सकता है।

Clematis Erecta – पेशाब के रुक-रुककर आने और बाद में टपकने के लिए

Clematis Erecta एक प्राकृतिक होम्योपैथिक दवा है, जो “Virgin’s bower” पौधे से बनाई जाती है। यह दवा तब सबसे अधिक असरदार होती है, जब पेशाब की धार रुक-रुककर आती है और पेशाब करने के बाद कुछ समय तक मूत्रमार्ग (Urethra) में झनझनाहट जैसा एहसास होता रहता है। पेशाब करने के बाद भी पेशाब टपकता रहता है और लिंग के सिरे पर जलन होती है। मूत्रमार्ग सिकुड़ा हुआ महसूस होता है, और पेशाब बूँद-बूँद करके निकलता है, जिससे ऐसा लगता है कि मूत्राशय (Bladder) पूरी तरह से खाली नहीं हुआ है।

Clematis Erecta का उपयोग कब करें?

यह तब फ़ायदेमंद होता है जब किसी व्यक्ति को पेशाब का बहाव रुक-रुककर आता है और पेशाब करने के बाद भी बूंदें टपकती रहती हैं। Clematis Erecta का उपयोग कैसे करें?

यह दवा 30C पोटेंसी में लेने की सलाह दी जाती है और इसे दिन में दो बार लिया जा सकता है।

Sarsaparilla Officinalis - पेशाब करने के बाद होने वाली समस्याओं के लिए

Sarsaparilla Officinalis सबसे उत्तम होम्योपैथिक दवा है, अगर पेशाब करने के बाद आपको कोई तकलीफ़ होती है। पेशाब कम मात्रा में आता है और उसमें खून भी हो सकता है (हेमट्यूरिया)। पेशाब खत्म होते समय बहुत ज़्यादा दर्द होता है। बैठे हुए भी पेशाब की बूंदें टपक सकती हैं। पेट के निचले हिस्से में कोमलता या दर्द महसूस होता है; पेशाब की धार पतली और कमज़ोर होती है।

Sarsaparilla Officinalis का उपयोग कब करें?

यह दवा तब लेना सबसे अच्छा होता है जब पेशाब करने के बाद जलन महसूस हो। पेशाब की धार कमज़ोर हो सकती है और बैठे हुए भी पेशाब की बूंदें टपकने की संभावना हो सकती है।

Sarsaparilla Officinalis का उपयोग कैसे करें?

समस्या की गंभीरता के आधार पर इसे अलग-अलग पोटेंसी में उपयोग किया जा सकता है। BPH के मामलों में, Sarsaparilla Officinalis 30C लेने की आमतौर पर सलाह दी जाती है। अच्छे नतीजों के लिए इसे दिन में दो बार लिया जा सकता है।

लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।

डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।