बवासीर की समस्या के लिए होम्योपैथिक उपचार      Publish Date : 29/01/2026

        बवासीर की समस्या के लिए होम्योपैथिक उपचार

                                                                                                                                                  डॉ0 राजीव सिंह एवं मुकेश शर्मा

होम्योपैथी बिना सर्जरी के बवासीर की समस्या का प्राकृतिक रूप से समाधान करती है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है, नसों के जमाव से राहत मिलती है और रोग की पुनरावृत्ति से भी बचाव होता है। बवासीर के लिए सबसे प्रभावी होम्योपैथिक उपचार लक्षणों की समानता के सिद्धांत पर चुना जाता है। अधिकतर प्रयोग की जाने वाली होम्योपैथी की कुछ दवाएँ-

                                                         

एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम

प्राप्त लाभः

  • यह तीव्र पीठ दर्द के साथ दर्दनाक बवासीर के लिए बहुत अच्छा उपाय है।
  • लगातार सूखापन, जलन और मलाशय की परिपूर्णता से राहत देता है।

कब करें उपयोगः

  • बवासीर और पीठ के निचले हिस्से में दर्द से पीड़ित रोगियों के लिए प्रयोग करना सबसे उपयुक्त रहता है।

इसका उपयोग कैसे करें

आमतौर पर 30C शक्ति में, प्रतिदिन दिन में दो या तीन बार (डॉक्टर की सलाह अनुसार) निर्धारित किया जाता है।

नक्स वोमिका 

प्राप्त लाभः

  • नक्स वोमका, एक गतिहीन जीवन, अत्यधिक शराब पीने या शराब के कारण होने वाली बवासीर के लिए सबसे अच्छे होम्योपैथिक उपचारों में से एक।
  • यह कब्ज, ऐंठन और खूनी बवासीर से राहत देता है।

कब करें उपयोगः

  • पशुचिकित्सीय, पाचन संबंधी सहयोगी और चिड़चिड़ापन वाले समुद्री मील के लिए सबसे उपयुक्त उपचार।

कैसे करें उपयोग

  • आमतौर पर किसी होम्योपैथ की सलाह के अनुसार, इसे 30 शक्ति की मात्रा में, दिन में एक बार दिया जाता है।

हैमामेलिस वर्जिनियाना

प्राप्त लाभः

  • खूनी बवासरीर के बेहतरीन होम्योपैथिक उपचार के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • मलाशय में शिराओं की भीड, दर्द और भारीपन की समस्या से राहत प्रदान करती है।

कब करें उपयोगः

  • ट्रॉमा, प्लास्टिक अवशेष और चोट के दर्द से पीड़ित इलाके के लिए सबसे उपयुक्त होम्योपैथिक उपाय।

कैसे करें उपयोगः

आमतौर पर इसे क्यू (मदर टिंचर) या 30C शक्ति में उपयोग किया जाता है और दिन में एक या दो बार निर्धारित किया जाता है।

एलो सोकोट्रिना 

प्राप्त लाभः

  • श्लैष्मिक स्राव के साथ उभरी हुई नसों के लिए बहुत अच्छा उपाय है।
  • इसके साथ ही यह मरीज की गुदा की जलन, खुजली और मलाश्य में मलाशय मल स्टोर की भावना को भी कम करती है।

कब करें उपयोगः

  • यह संगठित मल के बाद कब्जे वाले क्षेत्र के लिए उपयुक्त दवाई है।

कैसे करें उपयोगः

  • आमतौर पर रोगी की गम्भीरता के आधार पर 30C शक्ति में, दिन में 1-2 बार सेवन करने के लिए दिया जाता है।

होम्योपैथिक औषधियों अपनाई जाने वाली सावधानियाँ-

  • अत्याधिक गर्म, वसायुक्त और जंक फूड का सेवन न करें।
  • शराब और कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से देर रहें।
  • मल त्याग की आवश्यकता को रोके नहीं।
  • लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने की व्यवस्था से बचें और नियमित रूप से हल्का व्यायाम करते रहें।

बवासीर की समस्या में होम्योपैथी से प्राप्त होने वाले लाभः

                                                          

  • सर्जरी के बिना रोग का पूर्ण उपचार।
  • कब्ज से राहत मिलती है और पाचन क्रियाओं को सुचारू किया जाता है।
  • रोग के कारण का उपचार।
  • सुरक्षित एवं विच्छेदन से मुक्त।

लेखक: मुकेश शर्मा होम्योपैथी के एक अच्छे जानकार हैं जो पिछले लगभग 25 वर्षों से इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हे। होम्योपैथी के उपचार के दौरान रोग के कारणों को दूर कर रोगी को ठीक किया जाता है। इसलिए होम्योपैथी में प्रत्येक रोगी की दवाए, दवा की पोटेंसी तथा उसकी डोज आदि का निर्धारण रोगी की शारीरिक और उसकी मानसिक अवस्था के अनुसार अलग-अलग होती है। अतः बिना किसी होम्योपैथी के एक्सपर्ट की सलाह के बिना किसी भी दवा सेवन कदापि न करें। अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी एवं उपचार के लिए फोन नं0 9897702775 पर सम्पर्क करें।

डिसक्लेमरः प्रस्तुत लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के अपने विचार हैं।