
सरकारी कार्यक्रमों की सफलता का मंत्र Publish Date : 27/10/2026
सरकारी कार्यक्रमों की सफलता का मंत्र
प्रो0 आर. एस. सेंगर
सरकारी कार्यक्रमों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके क्रियान्वयन के प्रति तंत्र कितना सचेत है, योजना बनती तो है पर धरातल पर फला फल कई बार इसलिए अच्छा नहीं हो पाता क्योंकि लक्षित वर्ग को समय पर उसका लाभ नहीं मिल पाता। ताजा उदाहरण प्रदेश में बाजरा खरीद को लेकर हो रही देरी का है। केवल आगरा जनपद का ही उदाहरण लें तो यहां जिन जगहों पर बाजरा क्रय केंद्र 1 अक्टूबर को खुलने थे वह 22 दिनों बाद तक एक भी केंद्र नहीं खुल सकें हैं।
दो दिन पूर्व 16 में सिर्फ दो जगहों पर बस औपचारिकता पूरी की गई है। इसका नुकसान बाज़ार उत्पादक किसानों को हुआ है। न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रति क्विंटल ₹500 कम पर उन्हें अपनी फसल बेचनी पड़ी है। एक और किसानों की आय दोगुनी करने का उपक्रम होगा। रहा है तो दूसरी ओर मेहनत से बोई काटी गई फसल की यथेष्ट सरकारी खरीद नहीं हो पा रही है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह व्यवस्थागत खामी है।

किसान एक फसल काटता है तो दूसरी को बोने की तैयारी करता है। उसके पास फसल रोक कर रखने का विकल्प नहीं होता है। सरकारी तंत्र को यह भी देखना चाहिए कि फार्मर रजिस्ट्री में लेखपालों के स्तर से भी विलंब क्यों हो रहा है, पूर्व निर्धारित फसल चक्र के बाद भी खरीद की सुस्ती के दोषियों की पहचान आवश्यक है और उनकी पहचान करने को उपरांत उनको सजा मिलनी चाहिए क्योंकि सरकारी योजनाएं समय पर जारी कर दी जाती हैं।
लेकिन उनके क्रियान्वयन को लेकर अधिकारी और कर्मचारी देरी करते हैं जिससे किसानों को लाभ नहीं मिल पाता और बदनामी सरकार की होती है, इसलिए सरकार को चाहिए कि क्रियान्वयन में जिन लोगों ने देरी की है उन पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए जिससे भविष्य में सरकारी योजनाएं समय पर किसानों तक पहुंच सकें और उसका लाभ वो ले सकें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।