जोखिम और चुनौतियां भी हैं ढेर सारी      Publish Date : 04/10/2026

जोखिम और चुनौतियां भी हैं ढेर सारी

प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े जोखिमः कई आईओटी डिवाइस हैकर्स और दूसरे साइबर खतरों के प्रति संवेदनशील होते हैं, जिससे संवेदनशील डाटा की सुरक्षा और प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है। ये खुद बहुत सारा पर्सनल डाटा भी इकट्ठा कर सकते हैं, जिससे प्राइवेसी और डाटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं पैदा होती ही हैं।

इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी तालमेल) की समस्याः डिवाइस अक्सर अलग-अलग स्टैंडर्ड और प्रोटोकाल का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उनके बीच ‘मशीन-टू-मशीन’ कम्यूनिकेशन करना मुश्किल हो सकता है। इससे इंटरऑपरेबिलिटी की समस्या हो सकती है।

डाटा ओवरलोडः आईओटी डिवाइस, जो कि एक बड़ी मात्रा में डाटा बनाती हैं। इसका विश्लेषण और उससे काम की जानकारी निकालना एक बड़ी चुनौती होती है, खासकर उन कंपनियों के लिए जिनके पास जरूरी एनालिटिक्स टूल्स और आवश्यक विशेषज्ञता उपलब्ध नहीं है।

लागत और जटिलताः आईओटी सिस्टम को लागू करना महंगा और जटिल हो सकता है, क्योंकि इसके लिए हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और इन्फ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश की जरूरत होती है। सिस्टम को मैनेज करना और उसका रखरखाव करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिसके लिए खास कौशल और विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

रेगुलेटरी और कानूनी चुनौतियां: वर्तमान समय में जैसे-जैसे इन डिवाइस का उपयोग बढ़ रहा है, उसी के अनुरूप रेगुलेटरी और कानूनी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कंपनियों को डाटा सुरक्षा, प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग नियमों का पालन करना होता है।

तकनीकें, जिन्होंने आईओटी को बनाया कमाल

सेंसर और एक्यूएटरः सेंसर आसपास होने वाले बदलावों, जैसे तापमान, नमी, रोशनी, हलचल या दबाव का पता लगा सकते हैं। वहीं, एक्यूएटर भौतिक बदलाव कर सकते हैं, जैसे वाल्व खोलना या बंद करना या मोटर चालू करना आदि। आटोमेशन तब संभव होता है, जब सेंसर और एक्यूएटर इंसानी दखल के बिना समस्याओं को स्वतः हल कर सकने में सक्षम होता है।

क्लाउड कंप्यूटिंगः क्लाउड में आईओटी डिवाइस से बनने वाले बहुत सारे डाटा को स्टोर, प्रोसेस और एनालाइज किया जाता है। ये इन्फ्रास्ट्रक्चर और टूल उपलब्ध कराते हैं जिनकी जरूरत इस डाटा को स्टोर और एनालाइज करने व आईओटी एप्लीकेशन बनाने और उन्हें डिजाइन करने के लिए होती है।

कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजीः क्लाउड तक डाटा भेजने के लिए, आईओटी डिवाइस का इंटरनेट से कनेक्ट होना जरूरी है। इनमें कई तरह की कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी का प्रयोग होता है, जैसे वाई-फाई, ब्लूटूथ और सेल्युलर आदि।

बिग डाटा एनालिटिक्सः आईओटी डिवाइस के डाटा को समझने के लिए, कंपनियों को जानकारी निकालने और पैटर्न की पहचान करने के लिए एडवांस्ड एनालिटिक्स टूल की जरूरत होती है। इन टूल में मशीन लर्निंग एल्गोरिदम, डाटा विजुअलाइजेशन टूल और प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स मॉडल शामिल होते हैं।

सुरक्षा और प्राइवेसी टेक्नोलॉजीः आईओटी डिवाइस और उनसे बनने वाले डाटा को साइबर खतरों से बचाने के लिए एन्क्रिप्शन, एक्सेस कंट्रोल और घुसपैठ का पता लगाने वाले सिस्टम (इंट्रोजन डिटेक्टशन सिस्टम) जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।