
मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ: स्वस्थ मिट्टी और स्वस्थ फसलों की नींव Publish Date : 29/08/2026
मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ: स्वस्थ मिट्टी और स्वस्थ फसलों की नींव
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 वीरेन्द्र सिंह गहलान
स्वस्थ मिट्टी का अर्थ केवल रेत, सिल्ट, चिकनी मिट्टी और खनिजों का मिश्रण नहीं है। मिट्टी एक जीवित पारिस्थितिकी तंत्र है, जहाँ कार्बनिक पदार्थ, सूक्ष्म जीव, जड़ें, पानी, पोषक तत्व और मिट्टी के कण लगातार एक-दूसरे के साथ संवाद करते रहते हैं।
निर्माण — मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ कैसे बनते हैं?
मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ विभिन्न तरीकों से आते हैं:
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फ़सलों के अवशेष और पशुओं से प्राप्त अवशेष
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जीवित जड़ों से निकलने वाले रूट एक्स्यूडेट्स (Root Exudates)
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मृत जड़ें और फ़सल के अवशेष
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सूक्ष्म जीवों के अवशेष व बायोमास
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कवक, जीवाणु, केंचुए और मिट्टी के अन्य जीव
यह सभी पदार्थ मिट्टी के जीवों के लिए भोजन और ऊर्जा का स्रोत होते हैं। सूक्ष्म जीव इन कार्बनिक अवशेषों का अपघटन (विघटन) करके इनके एक हिस्से को अधिक स्थिर रूप वाले सॉइल ऑर्गेनिक मैटर (SOM) में बदल देते हैं।
स्थिरता — कार्बनिक पदार्थों का संरक्षण
मिट्टी के सभी कार्बनिक पदार्थ तुरंत विघटित नहीं होते हैं। सूक्ष्म जीवों की क्रियाशीलता से बनने वाले विभिन्न यौगिक मिट्टी के कणों को आपस में बांधने में मदद करते हैं। कार्बनिक पदार्थ मिट्टी के खनिजों से जुड़ जाते हैं और कुछ हद तक मिट्टी के एग्रीगेट्स (Aggregates) के भीतर सुरक्षित रहते हैं।
इससे निम्नलिखित लाभ होते हैं:
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मिट्टी की संरचना में सुधार होता है।
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मिट्टी के कण बेहतर एग्रीगेट्स में बंधते हैं।
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मिट्टी में रिक्त स्थान (पोरसिटी) और हवा की मात्रा में सुधार होता है।
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कार्बनिक कार्बन के संरक्षण में मदद मिलती है।
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मिट्टी की जैविक खाद्य श्रृंखला सक्रिय रहती है।
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पोषक तत्वों का चक्र अधिक प्रभावी होता है।
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मजबूत और स्थिर मिट्टी के एग्रीगेट्स कार्बनिक पदार्थों को तेजी से विघटित होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्य — कार्बनिक पदार्थ मिट्टी के लिए क्या करते हैं?
एक बार जब मिट्टी में उचित मात्रा में कार्बनिक पदार्थ बन जाते हैं और सक्रिय रहते हैं, तो इससे कई लाभ मिलते हैं:
जल धारण क्षमता: मिट्टी की पानी को रोककर रखने और फसल की जड़ों को उपलब्ध कराने की क्षमता में सुधार होता है।
जड़ों का विकास: जड़ों के लिए हवा, पानी और पोषक तत्वों का संतुलित वातावरण तैयार होने में मदद मिलती है।
पोषक तत्वों का संचयन व चक्रण: कार्बनिक पदार्थ कुछ पोषक तत्वों को रोककर रखते हैं और धीरे-धीरे उपलब्ध कराते हैं, जिससे पोषक तत्वों के नुकसान का जोखिम कम होता है।
सूक्ष्म जीवों का विकास: जीवाणु और कवक जैसे उपयोगी सूक्ष्म जीवों को ऊर्जा और आवास मिलता है।
मिट्टी की संरचना: एग्रीगेशन, पोरसिटी, वातन (Aeration) और पानी के रिसने की क्षमता में सुधार होता है।
पोषक तत्वों का चक्रण: नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), गंधक (S), पोटेशियम (K), कैल्शियम (Ca) और लोहा (Fe) जैसे तत्वों के चक्रण में मिट्टी की जैविक क्रियाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी होती है।
मिट्टी की खाद्य श्रृंखला — सॉइल फूड वेब
जीवाणु, कवक, केंचुए, माइट्स, स्प्रिंगटेल्स और अन्य जीव केवल मिट्टी में रहते नहीं हैं; वे मिट्टी की कई प्रक्रियाओं को सक्रिय रूप से संचालित करते हैं।
वे कार्बनिक अवशेषों का अपघटन करते हैं, पोषक तत्वों को बदलते हैं, मिट्टी के एग्रीगेट्स बनाने में मदद करते हैं और स्थिर कार्बनिक पदार्थ तैयार करने की प्रक्रिया में योगदान देते हैं।
मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए किसानों को क्या करना चाहिए?
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फ़सलों के अवशेषों को यथासंभव ज़मीन में वापस देना चाहिए।
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उचित तरीके से तैयार किए गए खाद व कार्बनिक पदार्थों का उपयोग करना चाहिए।
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संभव हो तब ज़मीन में जीवित जड़ों को लंबे समय तक रखना चाहिए।
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उपयुक्त स्थानों पर कवर क्रॉप्स (Cover Crops) लगानी चाहिए।
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अनावश्यक जुताई और मशागत को कम करना चाहिए।
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विभिन्न फ़सलों की फेरबदल (फसल चक्र) और विविधता बढ़ानी चाहिए।
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केंचुओं और उपयोगी सूक्ष्म जीवों का संरक्षण करना चाहिए।
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मिट्टी की जैविक क्रियाशीलता को अनावश्यक नुकसान पहुँचाने वाली पद्धतियों से बचना चाहिए।
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पानी का उचित प्रबंधन करना चाहिए; लंबे समय तक जलभराव या अत्यधिक सूखी स्थिति से बचना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात:
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स्वस्थ मिट्टी
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सक्रिय सूक्ष्म जीव स्थिर मिट्टी के एग्रीगेट्स
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बेहतर पानी व पोषक तत्व प्रबंधन
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मजबूत जड़ें
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अच्छी फसल की वृद्धि
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मिट्टी की उर्वरता का अर्थ केवल खादों का उपयोग करना नहीं है।
मिट्टी में पोषक तत्वों को संचित करने, उनके चक्रण करने और सही समय पर फसलों को उपलब्ध कराने की क्षमता विकसित करना ही, असल मायनों में मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
यदि मिट्टी स्वस्थ होगी तभी मजबूत जड़ें तैयार होंगी, मजबूत जड़ें होंगी तभी स्वस्थ फसल खड़ी होगी।
स्वस्थ मिट्टी = लहलहाती फसल = शाश्वत खेती
लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
