
मत्स्य पालन और प्रबन्धन में ड्रोन के उपयोग Publish Date : 30/07/2026
मत्स्य पालन और प्रबन्धन में ड्रोन के उपयोग
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 वी. के सिंह
विश्व में कृषि और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग पर बल दिया गया है। भारत सरकार ने भी 'भारत ड्रोन शक्ति' कार्यक्रम की पहल कृषि और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया है जिसका उद्देश्य ड्रोन का अनुप्रयोग इन क्षेत्रों के प्रबंधन और विकास में करना है।
ड्रोन एक दूरस्थ संचालित मानव रहित विमान प्रणाली (यूएएस) या दूरस्य संचालित जल के भीतर वाहन प्रणाली (आरओयूवी) है। यूएएस या आरओयूवी के रूप में उद्भव ड्रोन ने अनुसंधान और विकास में एक प्रतिमान बदलाव किया है। शुरूआती दौर में ड्रोन का उपयोग केवल रक्षा उद्देश्यों के लिए ही सीमित था लेकिन आजकल इनका उपयोग हवाई फोटोग्राफी, खनन, मीडिया, इत्यादि के साथ कृषि अनुसंधान और विकास में बढ़ रहा है। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में, ड्रोन का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है जो मत्स्य पालन की निगरानी और प्रबंधन में लाभ-लागत अनुपात को अधिकतम करते हुए सहायता प्रदान करते हैं।
विश्व में, मत्स्य और मत्स्य संसाधनों के बेहतर और कुशल प्रबंधन के लिए मात्स्य विज्ञान के क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग और उससे जुड़े अनुप्रयोग बढ़ रहे हैं। मत्स्य पालन और जलीय कृषि में, ड्रोन के उपयोग ने जल के भीतर और सतह परमत्स्य जीवों और उनके प्रवास से जुड़ी कई चुनौतियों को कम किया है। इस प्रकार, ड्रोन मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्रों में एक गेम चेंजर बन गए हैं, जो विभिन्न चुनौतियों के लिए अभिनव समाधान पेश करते हैं। इन क्षेत्रों में उपयोग किए जाने वाले कुछ ड्रोन यहां वर्णित किए गए हैं।
दवाओं या अन्य रसायनों के छिड़काव हेतु ड्रोनः ये ड्रोन बड़े जल निकायों में दवाओं या अन्य रसायनों का छिड़काव करने के लिए छिड़काव प्रणाली से युक्त होते हैं। ये जल की गुणवत्ता बनाए रखने और बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
फिश आहार वितरण हेतु ड्रोनः इस प्रकार के ड्रोन को जलीय कृषि तालाबों या पिंजरों में समान रूप से मछली आहार वितरित करने के लिए बनाया गया है। ये यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी मछलियों को पर्याप्त पोषण मिले, और बेहतर स्वास्थ्य विकास हो।
कार्गो डिलीवरी ड्रोनः ऐसे ड्रोन का उपयोग जीवित मछली, उपकरण या अन्य आपूर्ति को दूरस्य या दुर्गम स्थानों पर ले जाने के लिए किया जाता है। ये काफी दूरी तय कर सकते हैं, जिससे रसद अधिक कुशल हो जाती है।
निगरानी ड्रोनः इस प्रकार के ड्रोन उन्नत संवेदन और कैमरों से युक्त होते हैं। ऐसे ड्रोन का उपयोग मछली की आवादी, जल की गुणवत्ताऔर पर्यावरण परिस्थितियों की निगरानी के लिए किया जाता है। वे वास्तविक समय डेटा प्रदान करते हैं और स्थायी मत्स्य प्रबंधन के लिए सूचित निर्णय लेने में मदद करते हैं।
आवास मानचित्रण ड्रोनः ऐसे ड्रोन जलीय आवासों के विस्तृत मानचित्र बनाने के लिए दूरस्थ संवेदन तकनीक का उपयोग करते हैं। वे जलीय कृषि के लिए उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान करने, आवास स्थान में परिवर्तन की निगरानी करने और मानव गतिविधियों के प्रभाव का आकलन करने में मदद करते हैं।
अनुसंधान और डेटा संग्रह ड्रोनः इस प्रकार के ड्रोन का उपयोग शोधकर्ताओं द्वारा मछली के व्यवहार, प्रवासन पैटर्न और अन्य पारिस्थितिक मापदंडों पर डेटा एकत्र करने के लिए किया जाता है। वे वैज्ञानिक शोध और अध्ययन में योगदान करते हैं तथा बेहतर प्रबंधन प्रथाओं को विकसित करने में मदद करते हैं।
ड्रोन के प्रकार
मत्स्य पालन और जलीय कृषि में जल की सतह और भीतर अनुप्रयोगों के आधार पर ड्रोन के दो वर्ग हैं। प्रथम वर्ग जल के भीतर ड्रोन जिन्हें अक्सरपन डुब्बी रोबोट या स्वायत्त जल अंतर्गत वाहन (एयूवी) भी कहा जाता है और द्वितीय वर्ग जल की सतह के ऊपर के ड्रोन जिसको मानव रहित विमान प्रणाली (यूएएस) कहा जाता है। दोनों वर्ग के ड्रोन मानव रहित वाहन प्रणालियाँ हैं और वे दूर से पायलट द्वारा संचालित होती हैं। दोनों वर्ग के ड्रोन के बारे में संक्षेप में यहां पर चर्चा की गई है।
स्वायत्त जल अंतर्गत वाहन (एयूवी)
स्वायत्त जल अंतर्गत वाहन (एयूवी) या दूरस्थ संचालित जल अंतर्गत वाहन (आरओवी) ड्रोन जल से प्रभावित नहीं होते हैं और कैमरा तथा अन्य संवेदक से युक्त होते हैं। इस प्रकार के ड्रोन दूरस्थ संचालित पनडुब्बी हैं जो मत्स्य संसाधनों जैसे जविक भण्डारण, जल की गुणवत्ता आदि का आकलन करने के लिए छवियों और वीडियो को कैप्चर करती हैं। वे लीथियम-आयन बैटरी से संचालित होती हैं और जल के भीतर निरीक्षण करने के लिए मानव रहित गोताखोरों जैसा कार्य करती हैं, जो कम लागत और बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है। ये गतिशील पानी के नीचे के वातावरण का चार दिशाओं में आकर देकर दृश्य प्रदान कर सकते हैं और जैसे ही वे जल में जाते हैं, उनके संवेदक स्थानिक और समय-श्रृंखला माप कर सकते हैं। आरओवी से जुड़ी कुछ चुनौतियां हैं और वे नी वहन सटीकता, संचार और धीरज हैं। हालांकि, इन चुनौतियों को कम करने के लिए कई तैयार विकल्प हैं और उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं :
- सेंसर माप से मेल खाने के लिए भू-भीतिकीय मानचित्रों का एकीकरण।
- रेडियो संचार और वैश्विक स्थिति प्रणाली पर भरोसा करने के अलावा सोनार प्रणाली का एक जड़त्वीय नेविगेशन इकाई के रूप में उपयोग।
- मौसम और पानी के प्रवाह या दबाव पर कम निर्भरता के साथ निगरानी कार्यों को बेहतर ढंग से करने के लिए विश्वसनीय नेविगेशन ।
मानव रहित विमान प्रणाली या हवाई वाहन (यूएएस)
यूएएस जिसे अक्सर मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) भी कहा जाता है, एक ऐसा मंच है जो हवाई सर्वेक्षण और डेटा संग्रह की सीमाओं को संबोधित करता है। यूएएस में तीन मुख्य घटक यूएवी, ग्राउंड कंट्रोल और संचार डेटा लिंक हैं। मुख्य रूप से दो यूएएस प्लेटफॉर्म उपयोग में हैं, और वे मल्टी-रोटर और फिक्स्ड विंग हैं। प्लेटफॉर्म का प्रकार और चयन मुख्य रूप से सर्वेक्षण किए जाने वाले क्षेत्र पर निर्भर करता है। कोई एकल यूएएस नहीं है जो उपयोगकर्ताओं के सभी उद्देश्यों को पूरा कर सके। सही प्लेटफॉर्म चुनने में पहला कदम यह सुनिश्चित करना है कि हमारे अनुप्रयोग के लिए कौन सा अधिक उपयुक्त है, मल्टी-रोटर या फिक्स्ड-विंगयूएएस। रोटर और फिक्स्ड-विंगयूएएस के बीच प्राथमिक अंतर कवरेज क्षेत्र है। मल्टी-रोटर प्लेटफॉर्म छोटे क्षेत्रों के लिए बेहतर होते हैं क्योंकि उड़ान समय कम होता है, जबकि फिक्स्ड-विंग वाहनों में उड़ान समय लंबा होता है और बड़े क्षेत्रों को कवर करता है। ऐसे ड्रोन से जुड़े संभावित लाभ निम्नलिखित हैं
- कम परिचालन लागत
- उड़ान पथ और छवि अधिग्रहण की स्थिरता
- सर्वेक्षण दोहराव
- अधिग्रहित डेटा की बेहतर भू-स्थानिक सटीकता
- खतरनाक वातावरण में कार्य जो मनुष्यों के लिए दुर्गम है
- लंबी उड़ान अवधि
दोनों प्रकार के ड्रोन लिथियम-आयन बैटरी से युक्त होते हैं और प्रयोग, उपयोगिता, उड़ान समय, कवरेज और अन्य विशिष्टताओं के आधार पर विभिन्न आकारों में उपलब्ध हैं। पेलोड सहित वजन के आधार पर यूएएस को नैनो, माइक्रो और मीडियम ड्रोन श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। ये सभी यूएएस ड्रोन सामान्यतः रेडियो ट्रांसमीटर और रिसीवर, बैटरी, कैमरे, संवेदक और अन्य पेलोड से युक्त होते हैं। आम तौर पर एयूएएस ड्रोन को फिक्स्ड विंग, फिक्स्ड-विंगहाइब्रिड, मल्टी-रोटर और सिंगल रोटर में चिन्हित किया गया है। इनमें मल्टी-रोटर ड्रोन सस्ते और बनाने में आसान हैं। मल्टी-रोटर ड्रोन छोटे पैमाने की परियोजनाओं के लिए सबसे उपयुक्त उपकरण हैं। उन्हें उड़ान और अवतरण के लिए कम क्षेत्र की आवश्यकता होती है और ऊर्ध्वाधर उड़ान और ऊर्ध्वाधर अवतरण क्षमता होती है। वांछित रिज़ॉल्यूशन की चित्र प्राप्त करने के लिए ऊंचाई को घुमा और बदल सकते हैं। मुख्य रूप से चित्रण और निगरानी उद्देश्यों के लिए मल्टी-रोटर ड्रोन प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाता है। प्रोपेलर की संख्या के आधार पर, इन्हें ट्राइकॉप्टर, क्याडकॉप्टर, हेक्साकॉप्टर और ऑक्टोकॉप्टर में चिह्नित किया गया है। इन चिह्नित श्रृंखलाओंमें, क्याडकॉप्टर का व्यापक रूप से उनकी सरल संरचना, आकार और लागत दक्षता के अलावा उनकी गतिशीलता, ऊर्ध्वाधर उड़ान और ऊर्ध्वाधर लैंडिंग क्षमताओं के कारण उपयोग किया जाता है। क्वाडकॉप्टर एक लोकप्रिय और सरल अभिन्यास है जो चारों रोटर से बेहतर स्थिरता और विश्वसनीयता प्रदान करता है।
यूएएस संचालन के लिए कुछ मानदंड
यूएवी के बढ़ते उपयोग के कारण, ड्रोन उपयोग और उड़ान में कानूनी और नीतिगत जटिलताएं भी बढ़ गई हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) से राष्ट्रीय ड्रोन नीति की शुरुआत हुई है, जो भारत में यूएवी नियामक संस्था है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राजपत्र अधिसूचना CG&DL&E-26082021-229221 दिनांक 25 अगस्त 2021 द्वारा ड्रोन नियम प्रकाशित किए और राजपत्र अधिसूचना CG-DL-E 26012022-232917 दिनांक 26 जनवरी 2022 द्वारा मानव रहित विमान प्रणालियों के लिए प्रमाणन योजना प्रकाशित की। नागरिक उड्डयन महानिदेशक द्वारा यूएएस प्रचालनों में तैयार किए गए कुछ प्रमुख मानदंड निम्नानुसार हैं।
भारत सरकार ने एक इंटरेक्टिव मानचित्र स्थापित किया है जिसमें हरा, पीला औरलाल जोन हैं। हरे जोन को अप्रतिबंधित और अनियंत्रित हवाई क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। ग्रीन जोन में 400 फीट/120 मीटर की ऊर्ध्वाधर दूरी तक ड्रोन के लिए हवाई क्षेत्र है। एक परिचालित हवाई अड्डे से 8 किमी से 12 किमी के मध्य स्थित क्षेत्र में 200 फीट/60 मीटर की ऊर्ध्वाधर दूरी तक हवाई क्षेत्र है जिसे पीला जोन कहते हैं। यह जोन एक प्रतिबंधित नियंत्रित हवाई क्षेत्र है, जिसके भीतर मानव रहित विमान प्रणाली संचालन के लिए संबंधित वायु यातायात नियंत्रण प्राधिकरण से अनुमति की आवश्यकता होती है। लाल जोन पूर्णतः प्रतिबंधित नियंत्रित हवाई क्षेत्र है, जिसके भीतर मानव रहित विमान प्रणाली संचालन की अनुमति केवल नागरिक उड्डयन महानिदेशक के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा दी जाती है। गैर-वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए नैनोड्रोन और माइक्रोड्रोन संचालित करने वाले संचालकों को छोड़कर सभी ड्रोन संचालकों को भारतीय विमानन प्राधिकरण द्वारा अधिकृत संस्थानों से ड्रोन पायलट लाइसेंस प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक है।
ड्रोन को उपयुक्त मौसम में उड़ाया जाना चाहिए क्योंकि खराब मौसम इसके संचालन और गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। ड्रोन उड़ाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि बैटरी पूरी तरह से चार्ज है और मौसम साफ एवं स्पष्ट है। यदि उड़ान के दौरान बैटरी चार्ज 30 प्रतिशत से कम है, तो ड्रोन को उस स्थान पर उतारने की सलाह दी जाती है, जहां से उसने उड़ान भरी थी, जिसे होम कहा जाता है। ड्रोन पायलटों को समय से कई महीने पहले साइट-विशिष्ट नियमों की जांच करनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे ड्रोन संचालन के लिए स्थानीय कानूनों और प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्रों में ड्रोन ने विभिन्न चुनौतियों के लिए अभिनव समाधान की पेशकश करते हैं और इन क्षेत्रों में उनसे जुड़े अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं।
मत्स्य पालन और जलीय कृषि में ड्रोन के अनुप्रयोग
मत्स्य पालन के विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन के विभिन्न अनुप्रयोग इस बात की पुष्टि करते हैं कि मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़ी कई चुनौतियों को हल करने में समाधान दिया है। साथ ही इन क्षेत्रों में भविष्य के विकास औरनवाचाकी स्थिति प्रदान करता है।
मत्स्य आवास मानचित्रणःउच्च रिज़ॉल्यूशन मल्टी-स्पेक्ट्रल और थर्मल कैमरों से युक्त ड्रोन जल की सतह और भीतर के निवास स्थान का मानचित्रण करने में अति सहायक हैं।
मत्स्य जैविक भण्डार का अनुमान, प्रजातियों की पहचान और ठिकानों पर डाटा संग्रहःजल के भीतर मत्स्य जैविक भण्डारका अनुमान लगाने के लिए उच्च रिज़ॉल्यूशन मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरे से युक्त जल के भीतर ड्रोन जिनको दूरस्थ संचालित पनडुब्बी कहते हैं का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त इन ड्रोन का उपयोग मत्स्य प्रजातियों की पहचान और उनकी ठिकानों को दर्ज करने के लिए किया जा सकता है।
अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों पर निगरानीःउच्च रिज़ॉल्यूशन मल्टी-स्पेक्ट्रल आरजीवी कैमरे से युक्त ड्रोन का उपयोग अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए किया जाता है।
मछली पकड़ने के गियर और एंगलर्स की मैपिंगःजल की सतह और भीतर, लिडार ड्रोन का उपयोग मछली पकड़ने के गियर और एंगलर्स काउंट का मानचित्रण करने के लिए किया जाता है।
गैर-इन्वेसिव निगरानीःड्रोन जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पन्न होने वालीबाधाओं को कम करके वास्तविक समय डेटा एकत्र करने के लिये एक गैर-आक्रामक तरीका प्रदान करते हैं।
जीवित मछली परिवहनःभारत में ICAR-CIFRI जैसी संस्थाएं आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ाने के लिये जीवित मछलियों के परिवहन हेतु ड्रोन के उपयोग का समाधान ढूंढ रही हैं।
वास्तविक समय में निगरानीःउच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरे और संवेदक से युक्तड्रोन मछली के व्यवहार, पानी की गुणवत्ता और पर्यावरण मापदंडों की निगरानी कर सकते हैं।
घुसपैठ का पता लगानाःड्रोन जलीय कृषि फार्मों तक अनाधिकृत पहुँच और संभावित खतरों की पहचान करने में मदद करते हैं।
सटीक और वास्तविक समय डेटा संग्रहःड्रोन वास्तविक समय में सटीक डेटा संग्रह प्रदान करते हैं, जिससे संभावित मुद्दों जैसे कि मछली की आबादी, स्वास्थ्य और विकास पर सटीक डेटा एकत्र करते हैं, जो बेहतर प्रबंधन और निर्णय लेने में सहायता करते हैं।
कवरेज में वृद्धिःड्रोन बड़े क्षेत्रों को तेज़ी से और व्यापक रूप में कवर करते हैं, जिससे आवश्यक समय और श्रम कम होजाता है।
लागत बचतः ड्रोन निगरानी और डेटा संग्रह के लिये एक लागत प्रभावी समाधान प्रदान करते हैं, जिससे महँगे उपकरण और जन शक्ति की आवश्यकता में कम हो जाती है।
रोग के प्रकोप का पता लगानाःड्रोन रोगके प्रकोप जैसे संभावित मुद्दों की जल्दी से पहचान कर सकते हैं, जिससे समय पर हस्तक्षेप करने की अनुमति मिलती है।
मछली का पता लगानाःड्रोन में लिडार ड्रोन मछलियों की उपस्थिति का पता लगा सकते हैं, उनके व्यवहार की निगरानी कर सकते हैं और उनके स्वास्थ्य का भी आकलन कर सकते हैं। ये मछली की आबादी के प्रबंधन के लिये मूल्यवान डेटा प्रदान कर सकते हैं।
3डी मैपिंगः लिडार ड्रोन का अक्सर उपयोग जल के भीतर के वातावरण की विस्तृत तीन दिशाओं में आकर मानचित्र बनाने के लिए किया जाता है, जो मछली के व्यवहार, आवास की गुणवत्ता और जलीय कृषि बुनियादी ढांचे पर सटीक डेटा प्रदान करता है।
सटीक भोजनःआहार प्रसारण प्रणालियों से युक्त ड्रोन जलीय कृषि खेतों में समान रूप से आहार वितरित कर सकते हैं, ईष्टतम भोजन सुनिश्चित कर सकते हैं और कचरे को कम कर सकते हैं।
सटीक छिड़कावःछिड़काव प्रणाली से युक्तड्रोन मछलियों को संभावित बीमारियों से बचाने के लिए जलीय कृषि खेतों में समान रूप से दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं।
विस्तृत मानचित्रण और पर्यावरण निगरानीः लिडारड्रोन पानी के नीचे के वातावरण केअत्यधिक विस्तृत मानचित्र बनाते हैं, जो मछली के व्यवहार, आवास की गुणवत्ता और कृषि बुनियादी ढांचे पर सटीक डेटा प्रदान करते हैं। इसके साथ ही ये ड्रोन जल तापमान, पीएच और घुलित ऑक्सीजन जैसे जल गुणवत्ता मानकों को माप सकते हैं, जो बेहतर प्रबंधन के लिये महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त लिडारड्रोन पानी में दूषित पदार्थों और प्रदूषणों का पता लगा सकते हैं, जिससे स्वस्थ जलीय वातावरण को बनाए रखने में मदद मिलती है।
कृषि अवसंरचनाः लिडार ड्रोन जाल और पिंजरों जैसे कृषि बुनियादी ढाँचे की स्थिति का निरीक्षण कर सकते हैं। यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वे अच्छी स्थिति में हैं और संभावित मुद्दों को रोक सकते हैं।
ड्रोन से जुड़े अनुप्रयोग मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे है। और जलीय कृषि में इसका व्यापक रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ड्रोन तकनीक के उद्भव नेमत्स्य पालन निगरानी सहित विभिन्न उद्योगों में कीर्तिमान बदलाव लाया है, उदाहरण के तौर पर कवरेज में वृद्धि, लागत-दक्षता और वास्तविक समय डेटा संग्रह आदि। हालाँकि ड्रोन से जुड़ी कुछ सामान्य चुनौतियाँ हैं जो इसके उपयोग के दर को कुछ हद तक सीमित करती हैं जैसे कि सीमित उड़ान, पेलोड क्षमता, डेटा प्रसंस्करण और नियामक ढाँचा जिसमें सुरक्षित एवं प्रभावी ड्रोन संचालन लिये उचित नियम और प्रशिक्षण निहित हैं। मत्स्य प्रबंधन में ड्रोन की क्षमता का पूरा दोहन करने के लिए इन चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिए। विश्व में कृषि और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन के उपयोग पर बल दिया गया है।, भारत सरकार ने भी 'भारत ड्रोन शक्ति' कार्यक्रम की पहल कृषि और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया है जिसका उद्देश्य ड्रोन का अनुप्रयोग इन क्षेत्रों के प्रबंधन और विकास में करना है। इसके अलावा ड्रोन पर शिक्षा और कौशल विकास जैसे कार्यक्रम का क्रियान्वयन करके भारत सरकार ड्रोन उद्योग के लिए कार्य बल तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिसमें केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान जैसे संस्थान ड्रोन तकनीक में विशेष पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। कुल मिलाकर, मत्स्य पालन और निगरानी में ड्रोन एक स्थायी संसाधन प्रबंधन और प्रभावी संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है जो विशेष रूप से भारत देश को आर्थिक और सामाजिक लाभों के साथ ड्रोन तकनीक में अग्रणी बनाता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
