
ट्रइकोडर्मा का उपयोग करने के लाभ एवं इसके काम करने का तरीका Publish Date : 07/07/2026
ट्रइकोडर्मा का उपयोग करने के लाभ एवं इसके काम करने का तरीका
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता
- ट्राइकोडर्मा (फंफूद) – मिट्टी जनित फफूंद रोगों को नियंत्रित करता है।
- स्यूडोमोनास फ्लोरोसेंस (बैक्टीरिया) – पौधों के रोगों को नियंत्रित करता है।
- बैसिलस थुरिंजिएंसिस / Bt (बैक्टीरिया) – सुंडी/कीड़ों को मारता है।
- बवेरिया बैसियाना, मेटाराइजियम ऐनीसोप्ली (फंफूद) – कीड़ों को मारते हैं।
- NPV (न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस वायरस) – खास सुंडियों को मारता है।
अन्य प्रकार (गैर-माइक्रोबियल):
1. बायोकेमिकल पेस्टिसाइड — प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले पदार्थ जो जीवित जीव नहीं होते; ये सीधे ज़हरीले तरीके से नहीं, बल्कि मेटिंग (संभोग) को बाधित करने या कीट को भगाने जैसे तरीकों से काम करते हैं।
उदाहरण: कीट सेक्स फेरोमोन (मेटिंग रोकने वाले ट्रैप), पौधों के हार्मोन, एंजाइम, नीम का तेल, एसेंशियल ऑयल।
2. बॉटैनिकल (वानस्पतिक) पेस्टिसाइड — सीधे पौधों के हिस्सों से निकाले जाते हैं।
उदाहरण: नीम एक्सट्रैक्ट (अज़ाडिरेक्टिन), पायरेथ्रम (गुलदाउदी से), लहसुन/मिर्च एक्सट्रैक्ट, तंबाकू एक्सट्रैक्ट (निकोटीन)।
3. प्लांट-इनकॉर्पोरेटेड प्रोटेक्टेंट्स (PIPs) — किसी कीट-प्रतिरोधी जीव का जीन फसल के अपने DNA में डाला जाता है, ताकि पौधा खुद ही सुरक्षात्मक पदार्थ बनाए।
उदाहरण: Bt कपास (पौधा खुद वही टॉक्सिन बनाता है जो Bt बैक्टीरिया बनाता है)।
4. बायोटिक एजेंट / मैक्रोबियल — जीवित लेकिन बड़े जीव (सूक्ष्म नहीं), जैसे लाभदायक कीड़े।
उदाहरण: परजीवी ततैया (parasitoid wasps), शिकारी माइट्स, लेडीबग (कीटों के खिलाफ इस्तेमाल होते हैं, रोगों के नहीं)।
"अलग-अलग समूह" का क्या मतलब था:
मेरा मतलब था — यह मत मान लीजिए कि सभी माइक्रोबियल प्रोडक्ट्स सिर्फ इसलिए एक-दूसरे के साथ compatible हैं क्योंकि वे सब "बायो" हैं। मिलाने के लिए असल में यह मायने रखता है:
क्या यह फंफूद बनाम फंफूद है? (जोखिम — एक फंफूद दूसरे को दबा सकता है, जैसे ट्राइकोडर्मा बनाम बवेरिया)।
क्या यह बैक्टीरिया बनाम फंफूद है? (आमतौर पर मिलाना ज़्यादा सुरक्षित)।
क्या यह जीवित सूक्ष्मजीव बनाम बायोकेमिकल/वानस्पतिक एक्सट्रैक्ट है? (आमतौर पर सुरक्षित, क्योंकि एक्सट्रैक्ट "जीवित" नहीं होता, इसलिए उस पर हमला नहीं हो सकता)।
तो व्यावहारिक रूप से: ट्राइकोडर्मा + स्यूडोमोनास (फंफूद + बैक्टीरिया) → आमतौर पर ठीक है। ट्राइकोडर्मा + बवेरिया (फंफूद + फंफूद) → ज़्यादा जोखिम भरा, पहले जार-टेस्ट ज़रूरी है, क्योंकि ट्राइकोडर्मा खासतौर पर एक एंटी-फंगल एजेंट है और दूसरे फंफूद को दबा सकता है।
BT (Bacillus thuringiensis) युक्त जैविक कीटनाशक चूसक एवं कुतरक कीटों के समेकित प्रबंधन में प्रभावी हैं।

BVM आधारित जैविक कीटनाशक द्वारा पायरिला, मिलीबग, दीमक, व्हाइट ग्रब, रूट बोरर आदि कीटों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
BT आधारित जैविक कीटनाशक अर्ली शूट बोरर, टॉप बोरर, इंटर्नोड बोरर तथा अन्य इल्ली वर्गीय कीटों के नियंत्रण में उपयोगी है।
इन जैविक कीटनाशकों का उपयोग कीटों की प्रारंभिक अवस्था तथा आर्द्र वातावरण में अधिक प्रभावकारी पाया गया है।
उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जलवायु एवं प्रचलित फसल पद्धतियों के कारण गन्ना फसल में कीट एवं रोगों की समस्या अधिक गंभीर रहती है। अतः दीर्घकालीन दृष्टिकोण से केवल रासायनिक नियंत्रण उपायों पर निर्भर रहने के बजाय फसल पारितंत्र में जैविक नियंत्रण उपायों को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है।
ये 19231 हे इसकी बताओ बदलाव तो किया इस हाँ, ज्यादातर मामलों में बायोफंगीसाइड और बायोपेस्टिसाइड को साथ मिलाकर छिड़का जा सकता है, लेकिन कुछ सावधानियाँ ज़रूरी हैं।
मिलाना कब ठीक है:
दोनों अगर सूक्ष्मजीव-आधारित हैं (जैसे ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास, बवेरिया बेसियाना, मेटाराइजियम आदि) और अलग-अलग समूह के हैं, तो अक्सर एक साथ इस्तेमाल किए जा सकते हैं क्योंकि ये एक-दूसरे को सामान्यतः नुकसान नहीं पहुँचाते।
- ज़्यादातर किसान ट्राइकोडर्मा + मेटाराइजियम/बवेरिया जैसे कॉम्बिनेशन खेत में साथ इस्तेमाल करते हैं।
सावधानी क्यों ज़रूरी है:
कुछ बायोफंगीसाइड (फफूंद-आधारित, जैसे ट्राइकोडर्मा) कुछ बायोपेस्टिसाइड फफूंदों (जैसे बवेरिया, मेटाराइजियम) पर विपरीत असर डाल सकते हैं, क्योंकि ट्राइकोडर्मा एक "एंटी-फंगल" एजेंट है — यह दूसरी फफूंद-आधारित प्रोडक्ट के जीवाणु/स्पोर को भी दबा सकता है।
टैंक में मिलाने से पहले पानी का pH जांचना ज़रूरी है — ज़्यादातर बायोप्रोडक्ट्स न्यूट्रल से हल्के अम्लीय pH (6-7) में सबसे अच्छा काम करते हैं। बहुत क्षारीय पानी जीवित सूक्ष्मजीवों को मार सकता है।
कभी भी बायो-प्रोडक्ट को रासायनिक (केमिकल) फफूंदनाशक या कीटनाशक के साथ एक ही टैंक में न मिलाएँ — क्योंकि रसायन जीवित बैक्टीरिया/फंफूद को नष्ट कर देते हैं और इन्हें कभी भी रासायनिक कीटनाशकों के साथ एक ही टैंक में नहीं मिलाना चाहिए।
सुरक्षित तरीका:
पहले छोटी मात्रा में जार-टेस्ट करें — यदि मिलाना आवश्यक हो तो पहले छोटे पैमाने पर जाँच कर लेना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
